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पीएम मोदी की पहल पर पाकिस्तान ने उठाए सवाल, सार्क देशों के इमरजेंसी फंड पर रखीं शर्तें

Wed, 25 Mar 2020 11:14 PM IST
आसिम खान वर्ल्ड डेस्क, डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: आसिम खान Updated Wed, 25 Mar 2020 11:14 PM IST
सार

  • फंड का नियंत्रण सार्क के सेक्रेट्री जनरल के पास रहे, शर्तें तय हों: कुरैशी
  • प्रधानमंत्री मोदी के प्रस्ताव पर हुआ था इमरजेंसी फंड बनाने का फैसला
  • पाकिस्तान को छोड़कर सभी देशों ने फंड के लिए रकम का किया एलान
  • भारत देगा सबसे ज्यादा एक करोड़ डॉलर, अबतक कुल 190 करोड़ की पेशकश

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Pakistan raised questions on the decision of Emergency Fund of SAARC countries
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

करोना जैसी विश्वव्यापी महामारी से लड़ने के लिए जिस कोविड-19 इमरजेंसी फंड की पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्क देशों की बैठक में की थी, उसपर पाकिस्तान ने सवाल उठाए हैं और कहा है कि इसका नियंत्रण सार्क के महासचिव के पास होना चाहिए। पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि पहले ये तय हो जाना चाहिए कि इस फंड के इस्तेमाल की शर्तें क्या होंगी।  

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इस इमरजेंसी फंड के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ओर से एक करोड़ डॉलर देने की घोषणा की थी। भारत के अलावा श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, अफगानिस्तान, मालदीव और भूटान जैसे देशों ने अपनी अपनी सीमा के मुताबिक इस फंड में योगदान देने का एलान किया है और अबतक इस इमरजेंसी फंड में करीब 190 करोड़ डॉलर जमा हो चुके हैं। 
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इसके लिए भारत के अलावा श्रीलंका ने 50 लाख डॉलर, बांग्लादेश ने 15 लाख डॉलर, नेपाल और अफगानिस्तान ने 10-10 लाख डॉलर, मालदीव ने दो लाख डॉलर और भूटान ने एक लाख डॉलर का योगदान देने को कहा है। पाकिस्तान ही इकलौता ऐसा देश है जिसने अभी तक इस फंड में हिस्सेदारी नहीं की है।
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पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा है कि पहले ये तय होना चाहिए कि इस फंड का नियंत्रण सार्क के जनरल सेक्रेट्री के पास होना चाहिए और कोई देश इस फंड का इस्तेमाल किन शर्तों के आदर पर कर सकता है।

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक जबतक इन तमाम मामलों के बारे में साफ तौर पर कोई फैसला नहीं होता और कोई स्पष्टता नहीं होती, पाकिस्तान को शक है कि इस फंड की योजना सफल नहीं हो पाएगी। उसका मानना है कि सिर्फ घोषणा कर देने से चीजें साफ नहीं होतीं और जमीन पर नहीं उतारी जा सकतीं।  

पिछले 15 मार्च को वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिए हुई सार्क देशों की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इस फंड का प्रस्ताव रखा था जिसपर सभी देशों ने सहमति जताई थी। यह तय हुआ था कि यह फंड कोरोना से जंग के लिए दक्षिण एशियाई देशों की मदद के लिए बनाया जा रहा है। हालांकि बैठक में यह तय नहीं हुआ था कि इस फंड की निगरानी कौन करेगा और इसे इस्तेमाल करने की क्या शर्तें होंगी।  

पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने इसे लेकर बांग्लादेश के विदेश मंत्री अब्दुल मोमेन से भी बात की है और अपनी आशंकाएं जाहिर की हैं। उन्होंने कहा कि जल्दी से जल्दी इस फंड के बारे में विस्तार से फैसला हो जाना चाहिए और इसके लिए सार्क देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों की वीडियो कांफ्रेंसिग के जरिए एक बैठक जल्दी से जल्दी होनी चीहिए। पाकिस्तान इस बैठक की पहल करेगा और इसमें सबकी सहमति से इस इमरजेंसी फंड की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा सकता है। मोमेन ने भी कुरैशी के इस प्रस्ताव का समर्थन किया और कहा कि बांग्लादेश स्वास्थ्य मंत्रियों के इस प्रस्तावित बैठक में हिस्सा लेगा।


कुरैशी ने तुर्की, स्पेन और फ्रांस के विदेश मंत्रियों से भी बातचीत की है और कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए तमाम एहतियाती कदमों और मदद की संभावनाओं पर चर्चा की है। कुरैशी ने ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध हटाने का मुद्दा भी जोर देकर उठाया और कश्मीर में लॉकडॉउन से पैदा हुई मुश्किलों की भी चर्चा की।

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