Honey Trap: हनी ट्रैप का पाकिस्तानी 'इंद्रजाल' तैयार कर रही 'यूनिट 412', जानें कैसे शुरू होता है फंसाने का खेल
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विस्तार
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिकों, सैन्य अधिकारियों और केंद्रीय सुरक्षा बलों की खुफिया फाइलों में सेंध लगाने के लिए पाकिस्तान ने अब हनी ट्रैप का नया 'इंद्रजाल' तैयार किया है। खुफिया एजेंसी 'आईएसआई' ने इसके लिए एक खास यूनिट '412' खड़ी की है। इस यूनिट में पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों से सुंदर लड़कियों को भर्ती किया जाता है। इन लड़कियों को जिन कमरों में ठहराया जाता है, वहां 'हिंदुओं' के रीति रिवाज और परंपराओं की झलक दिखाई पड़ती है। कमरे की दीवारों पर हिंदू देवी देवताओं की तस्वीरें और छोटे से मंदिर में रखी मूर्तियों की रंगीन थीम नजर आती है। यहीं से 'हनी ट्रैप' का खेल शुरू होता है। मकसद, भारतीय वैज्ञानिकों, आर्मी अफसरों, केंद्रीय बलों के कर्मी और दूसरे मंत्रालयों के अधिकारियों को जब टारगेट किया जाए, तो उन्हें शक न हो कि उनके साथ किसी दूसरे मुल्क से कोई व्यक्ति बात कर रहा है। कमरे के माहौल से यह नजर आता है कि वह भारत के ही किसी प्रांत से बोल रहा है। यह भी दिखाने का प्रयास होता है कि वह 'हिंदू' है।
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सोशल मीडिया का होता है इस्तेमाल
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी आईएसआई के ऑपरेटिव, वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल और डार्कनेट जैसी संचार तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इस तकनीक के जरिए जब वे किसी व्यक्ति के साथ सोशल मीडिया पर जुड़ते हैं, तो उसे यह नहीं मालूम होता कि वह व्यक्ति कहां से बोल रहा है। इस स्थिति से पहले पाकिस्तानी ऑपरेटिव लड़कियां, सोशल मीडिया पर भारतीय वैज्ञानिकों और सैन्य अधिकारियों के साथ बातचीत को आगे बढ़ाती हैं। इसके लिए कई तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं। वे लड़कियां खुद को शोधकर्ता, फेलोशिप पर काम करने वाली और किसी खास विषय पर लेखनी चलाने वाले के तौर पर पेश करती हैं। अगर उनके बीच नियमित बातचीत का माहौल बनता है, तो वे वीडियो कॉल करने लगती हैं। वीडियो कॉल में उनका खूबसूरत लिबास नजर आता है। उनके पीछे का बैंकग्राउंड ऐसा नजर आता है कि वह लड़की 'हिंदू' है। कमरे की दीवारों पर हिंदू देवी देवताओं की तस्वीरें होती हैं। कमरे में एक छोटा सा मंदिर भी होता है। पर्दों का रंग और दूसरी वस्तुएं भी ऐसी ही दिखती हैं, जैसे वह भारत की ही कोई जगह है। लड़कियों की वेशभूषा पूरी तरह से भारतीय होती है। ये लड़कियां, हिंदी बोलने में निपुण होने के अलावा दूसरी भारतीय भाषाएं बोलने में भी पारंगत होती हैं।
सोशल मीडिया में सब कुछ छद्म ही रहता है
पाकिस्तान के हैदराबाद के सिंध प्रांत में आईएसआई का एक वरिष्ठ अधिकारी इन्हें ट्रेंड करता है। इनके नाम भी वहीं से तय होते हैं। हनी ट्रैप में एक्सपर्ट बनाने के लिए लड़कियों को साठ दिन की ट्रेनिंग भी दी जाती है। टारगेट किसे बनाना है, यह आईएसआई द्वारा तय किया जाता है। बाकायदा इसकी सूची तैयार होती है। इसमें भारत के विभिन्न रक्षा बलों के अधिकारी शामिल होते हैं। दूसरी सूची में डीआरडीओ में वैज्ञानिकों का नाम रहता है। तीसरी सूची में केंद्रीय मंत्रालयों का नाम होता है। अगर कोई लड़की हनी ट्रैप में किसी वैज्ञानिक या अधिकारी से कोई दस्तावेज निकलवाने में कामयाब रहती है, तो उसे लगभग दो लाख रुपये की इनामी राशि दी जाती है। उसकी पदोन्नति भी हो जाती है। डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रदीप कुरुलकर, जिन्हें हनी ट्रैप के एक संदिग्ध मामले में महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस) ने गिरफ्तार किया था, वे पाकिस्तानी खुफिया ऑपरेटरों का शिकार हुए थे। उन्हें आईएसआई ऑपरेटर, पूजा शर्मा (नकली नाम) ने अपने जाल में फंसाया। पूजा ने खुद को पंजाब (भारत) की नागरिक बताया। उसने अपने परिचय में एक रिसर्च फेलो होने का बात कह कर रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए मदद मांगी। वैज्ञानिक कुरुलकर, मिसाइलों की लॉन्चिंग के जानकार माने जाते हैं। उनके पास मिसाइल लांच ट्रायल का अनुभव रहा है।
लाइब्रेरी जैसे कमरे में शुरू होती है अश्लीलता
यूनिट 412 की सदस्य लड़कियां, जब किसी वैज्ञानिक, आर्मी अफसर या केंद्रीय बलों के कार्मिक का मन जीत लेती हैं, तो उसके बाद अश्लीलता की कहानी शुरू होती है। आईएसआई ऑपरेटिव, टारगेट को देखकर अपने कमरे की सजावट करती हैं। अगर उनके टारगेट पर कोई वैज्ञानिक है, तो उसके विषय से संबंधित किताबों की एक पूरी लाइब्रेरी, बैंकग्राउंड में दिखाई पड़ती है। रिसर्च से जुड़े प्रोजेक्ट नजर आते इैं। दुनिया के प्रसिद्ध वैज्ञानिकों द्वारा कही गई बातों का सार दिखाई पड़ता है। सोशल मीडिया पर ये लड़कियां, सामने वाले की रूचि का पता कर लेती हैं। जब सामने वाला व्यक्ति खुल जाता है, यानी वह लड़की उसका विश्वास जीतने में सफल रहती है, तो उसके बाद अश्लीलता का पार्ट नजर आता है। टारगेट बने व्यक्ति को यह मालूम नहीं चलता है कि उसकी चैट और स्क्रीन, रिकॉर्ड हो रही है। वीडियो कॉल भी रिकॉर्ड होती रहती है। बाद में ब्लैकमेलिंग के लिए इन्हीं क्लिप का इस्तेमाल किया जाता है।