कांग्रेस की किरकिरी कराने के बाद बोले अधीर रंजन- कश्मीर हमारा आंतरिक मामला, कानून बनाने का अधिकार
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केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के एक खंड को छोड़कर बाकी सभी को समाप्त करते हुए जम्मू कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक भाग जम्मू-कश्मीर तो दूसरा भाग लद्दाख है और दोनों को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया है। भारत के इस फैसले से पाकिस्तान काफी बौखला गया है। उसने इस फैसले को संयुक्त राष्ट्र के नियमों का उल्लंघन बताया है। केवल इतना ही नहीं उसने भारत के साथ व्यापार और तीन हवाई मार्ग को बंद कर दिया है। पड़ोसी देश के इस कदम पर लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि हमारे देश को कानून पारित करने का अधिकार है।
अधीर रंजन चौधरी ने कहा, 'मुझे पता था कि पाकिस्तान कुछ जरूर करेगा। कश्मीर हमारा आंतरिक मामला है। हमारे देश को यह तय करने का अधिकार है कि राष्ट्र में किस कानून को पारित किया जाए। प्रधानमंत्री ने लाल किले से घोषणा की थी कि हम कश्मीरियों को गोलियों से नहीं बल्कि उन्हें गले लगाकर आगे बढ़ाएंगे। लेकिन आज कश्मीर की परिस्थिति नजरबंदी शिविर की तरह है। कोई मोबाइल/ इंटरनेट कनेक्शन नहीं, कोई अमरनाथ यात्रा नहीं, वहां क्या हो रहा है?'
#WATCH Adhir Ranjan Chowdhary, Congress leader in Lok Sabha: PM had announced from Red Fort that we'll take Kashmiris forward not with bullets but by embracing them, but today, the situation in Kashmir is similar to that of a concentration camp. pic.twitter.com/jzGnZ6sSWy
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) August 8, 2019
इससे पहले अधीर रंजन चौधरी मंगलवार को लोकसभा में कश्मीर मुद्दे पर कांग्रेस की किरकिरी करवा चुके हैं। लोकसभा में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पर चर्चा के दौरान उन्होंने अनुच्छेद 370 पर संयुक्त राष्ट्र का जिक्र कर दिया। इसके जवाब में शाह ने कांग्रेस को घेरते हुए पूछा था, 'इस मामले पर कांग्रेस को अपना रुख साफ करना चाहिए, कांग्रेस बताएं कि क्या कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र मॉनिटर करे।'
दरअसल, अधीर रंजन ने कहा था कि कश्मीर का मामला संयुक्त राष्ट्र में है। ऐसे में यदि संयुक्त राष्ट्र इस मामले को मॉनिटर कर रहा है तो सरकार इसपर बिल कैसे बना रही है? उनके इसी सवाल पर अमित शाह ने उन्हें घेरा और कहा कि इसपर कांग्रेस अपना रुख साफ करे। क्या वो यही चाहती है कि कश्मीर को संयुक्त राष्ट्र मॉनिटर करे। उन्होंने कहा था कि 1948 से संयुक्त राष्ट्र राज्य संबंधी निगरानी कर रहा है, यह बुनियादी प्रश्न है और सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।