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Central Govt Employees: अगर खाते में ज्यादा आ गई रकम तो? सरकारी कर्मचारियों के लिए रिकवरी से जुड़ी राहत की खबर

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Sat, 06 Apr 2024 07:21 PM IST
सार

केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में ओवरपेमेंट के मामले सामने आते रहते हैं। कुछ मामलों में जल्द ही नोटिस दे दिया जाता है, तो कई केसों में लंबे समय तक फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल पर घूमती रहती हैं। कई ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिनमें कर्मचारी रिटायर हो जाता है, मगर उसका ओवरपेमेंट का केस नहीं सुलझता।

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Overpayment amount up to Rs 2 lakh will not be recovered from government employees, know its conditions
सरकारी कर्मियों को राहत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वित्त मंत्रालय के 'व्यय विभाग' ने सरकारी कर्मियों के लिए एक राहत भरा आदेश जारी किया है। पहली अप्रैल को जारी कार्यालय ज्ञापन में कहा गया है कि अगर किसी कर्मचारी के खाते में ओवरपेमेंट के तहत कोई राशि जमा हुई है, तो उसकी वसूली नहीं होगी। इस मामले में ओवरपेमेंट की राशि की सीमा दो लाख रुपये रखी गई है। अगर गलती से सरकारी सेवक के खाते में पैसा चला गया है, तो परेशान नहीं किया जाएगा। अगर ओवरपेमेंट हुई है, तो उसकी रिकवरी के लिए एक माह के भीतर आदेश जारी होना अनिवार्य बनाया गया है। वित्त मंत्रालय ने इस मामले में वित्तीय शक्ति प्रत्यायोजन नियम (डीएफपीआर), 2024 के नियम 15 का हवाला दिया है। इसमें कहा गया है कि सरकारी कर्मचारियों को, मंत्रालय या विभाग द्वारा किए गए अधिक भुगतान की वसूली से छूट दी जा सकती है। हालांकि इसके लिए संबंधित विभाग को कुछ शर्तों का पालन करना होगा।
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लंबे समय तक चलते हैं ओवरपेमेंट के मामले
केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में ओवरपेमेंट के मामले सामने आते रहते हैं। कुछ मामलों में जल्द ही नोटिस दे दिया जाता है, तो कई केसों में लंबे समय तक फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल पर घूमती रहती हैं। कई ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिनमें कर्मचारी रिटायर हो जाता है, मगर उसका ओवरपेमेंट का केस नहीं सुलझता। रिटायरमेंट के बाद उससे वसूली की मांग की जाती है। मई 2022 में उच्चतम न्यायालय ने अपने एक फैसले में कहा था, किसी कर्मचारी को किया गया अतिरिक्त भुगतान, उसकी सेवानिवृत्ति के बाद इस आधार पर नहीं वसूला जा सकता है कि उसे किसी गलती के कारण वेतन वृद्धि दी गई थी।
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क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट का आदेश
न्यायमूर्ति एस ए नजीर और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने कहा था, अतिरिक्त भुगतान की वसूली पर रोक लगाने की अनुमति अदालतों द्वारा दी जाती है। यह कर्मचारियों के किसी अधिकार के कारण नहीं, बल्कि न्यायिक विवेक के तहत कर्मियों को उसके कारण होने वाली कठिनाई से बचाने के लिए है। यदि कर्मचारी की किसी गलतबयानी या धोखाधड़ी के कारण अतिरिक्त राशि का भुगतान नहीं किया गया है, यदि नियोक्ता द्वारा वेतन व भत्ते की गणना के लिए गलत सिद्धांत लागू कर या नियम की किसी विशेष व्याख्या के आधार पर अधिक भुगतान किया गया था, जो बाद में गलत पाया जाता है, तो किया गया अधिक भुगतान वसूली योग्य नहीं है। सर्वोच्च अदालत ने कहा था, कोई सरकारी कर्मचारी, विशेष रूप से, जो सेवा के निचले पायदान पर है, वह जो भी राशि प्राप्त करता है, उसे अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए खर्च करता है। सर्वोच्च अदालत का कहना था, जहां कर्मचारी को मालूम है कि उसे प्राप्त भुगतान देय राशि से अधिक है या गलत भुगतान किया गया है या जहां गलत भुगतान का पता जल्द ही चल जाता है, तो अदालत उसे वसूली के खिलाफ राहत नहीं देगी।
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वित्त मंत्रालय के कार्यालय ज्ञापन के मुताबिक, वित्तीय सलाहकार 'एफए' संबंधित मंत्रालय/विभाग के सचिव को ओवरपेमेंट की फाइल भेजेगा। उसमें एफए द्वारा यह संस्तुति की जाएगी कि अतिरिक्त भुगतान को माफ कर दिया जाए। ऐसे मामले, वित्तीय शक्ति प्रत्यायोजन नियम (डीएफपीआर), 2024 के नियम 15 के तहत निपटाए जाएंगे। भारत सरकार में विभागीय प्रशासक और कोई अन्य अधीनस्थ प्राधिकारी, जिसे राष्ट्रपति के विशेष आदेश द्वारा या उसके तहत शक्तियां सौंपी जा सकती हैं, वह अधिक भुगतान की गई राशि की वसूली को माफ कर सकता है।


क्या हैं शर्तें?
इस मामले में विभाग को कुछ शर्तों का पालन करना होगा। अधिक भुगतान की वसूली के लिए जारी आदेश की तारीख, छूट के संबंध में निर्णय लेने के लिए एक महत्वपूर्ण इनपुट होगा। अधिक भुगतान की वसूली के लिए ऐसा आदेश अधिक भुगतान का पता चलने की तारीख से एक महीने के भीतर जारी किया जाना चाहिए। डीएफपीआर 2024 के नियम 15 के अनुसार, भारत सरकार का एक विभाग दो लाख रुपये तक के अधिक भुगतान की वसूली को माफ कर सकता है। मंत्रालयों/विभागों को डीएफपीआर के नियम 15 में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार सभी प्रस्तावों की जांच करनी चाहिए। उन्हें यह सत्यापित करना चाहिए कि छूट के मामलों में, किसी भी सरकारी कर्मचारी की ओर से कोई गंभीर लापरवाही तो नहीं हुई है, जिसके लिए उच्च प्राधिकारी द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई की आवश्यकता हो सकती है।

वित्तीय सलाहकार दे छूट के मामलों की सिफारिश
यदि किसी मंत्रालय/विभाग का मानना है कि ओवरपेमेंट से हुआ नुकसान, मौजूदा नियमों या प्रक्रियाओं में किसी दोष के कारण है, तो इसे ऐसे नियमों या प्रक्रियाओं में संशोधन करने के अधिकार के साथ विभाग/मंत्रालय के ध्यान में लाया जाएगा। डीओपीटी द्वारा भी इस बाबत दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। सरकारी सेवकों को किए गए अतिरिक्त भुगतान की छूट पर विचार करते समय प्रशासनिक मंत्रालय/विभाग द्वारा 02.03.2016 को जारी आदेशों का सख्ती से पालन किया जाएगा। छूट के प्रत्येक मामले की सिफारिश, वित्तीय सलाहकार द्वारा की जानी चाहिए। उसे प्रशासनिक सचिव द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए।


ऐसे मामलों में, जहां वसूली की छूट अदालत के निर्देश से उत्पन्न होती है, मंत्रालयों/विभागों को खुद को संतुष्ट करना चाहिए कि ऐसे अदालत के निर्देश को चुनौती न देने के लिए उचित औचित्य हैं। यदि कोई वसूली, जिसे बाद में माफ कर दिया गया है, नियमों या प्रक्रियाओं की गलत व्याख्या के कारण है, तो मंत्रालय/विभाग भविष्य के मामलों में वसूली की छूट की आवश्यकता की जांच करने के लिए समान रूप से रखे गए सभी मामलों की समीक्षा कर सकते हैं। नियमों या प्रक्रियाओं की गलत व्याख्या के मामले में, मंत्रालय/विभाग यह सुनिश्चित करने के लिए उचित उपाय करेंगे कि ऐसी खामियों को ठीक किया जाए। यदि जिम्मेदारी तय करने के लिए कोई जांच की गई है, तो अंतिम रिपोर्ट के साथ-साथ मंत्रालय द्वारा की गई कार्रवाई को रिकॉर्ड में रखा जा सकता है।

यदि नियमों या प्रक्रियाओं की गलत व्याख्या (उदाहरण के लिए, गलत वेतन निर्धारण) लंबे समय तक पता नहीं चली है, तो मंत्रालय/विभाग उचित औचित्य रिकॉर्ड में रख सकता है कि नियमित समीक्षा के दौरान ऐसे मामलों पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया। इस मामले में आंतरिक लेखापरीक्षा, आदि फाइलों पर गौर किया जाए। दो लाख रुपये से अधिक की वसूली की छूट वाले मामलों में डीओपीटी को संदर्भित किया जाना चाहिए। ऐसे मामलों को भरे हुए चेकलिस्ट (इस कार्यालय ज्ञापन के साथ संलग्न) के साथ पैरा-3 पर दी गई जानकारी सहित एक विस्तृत नोट के साथ भेजा जा सकता है। डीओपीटी का कहना है कि यदि कोई रिकवरी का आदेश कोर्ट ने दिया है, तो भी उसे भी अच्छी तरह से स्टडी करें। उसमें देखें कि कर्मचारी अपनी बात पर खरा उतरता है। उसकी कोई गलती नहीं है और कोर्ट का आदेश चैलेंज करने लायक है, तो उसे चैलेंज करो। मतलब, सरकारी कर्मी को कोई नुकसान न हो।
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