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Hindi News ›   India News ›   Orissa High Court directs Tehsildar to plant 50 trees as punishment for imposing fine on illiterate woman without hearing her case news in Hindi

ओडिशा हाईकोर्ट: अनपढ़ महिला की शिकायत सुने बिना लगा दिया था जुर्माना, तहसीलदार को दी गई 50 पौधे लगाने की सजा

Sat, 21 May 2022 03:58 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sat, 21 May 2022 03:58 PM IST
सार

पुरी जिले में काकटपुर के तहसीलदार ने अतिक्रमण से जुड़े एक अनपढ़ महिला के मामले पर ठीक तरह से गौर किए बगैर ही महिला पर जुर्माना लगाया था और जमीन खाली करने का आदेश भी जारी किया था। हाईकोर्ट ने तहसीलदार की कार्रवाई को 'अजीब' बताया है।

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Orissa High Court directs Tehsildar to plant 50 trees as punishment for imposing fine on illiterate woman without hearing her case news in Hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

एक अनपढ़ महिला का मामला उचित तरीके से सुने बगैर उस पर जुर्माना लगाने वाले एक तहसीलदार को ओडिशा हाईकोर्ट ने 50 पौधे रोपित करने का निर्देश दिया है। न्यायाधीश विश्वनाथ रथ की अदालत ने हाल ही में पुरी जिले में काकटपुर के तहसीलदार को कटक विकास प्राधिकरण (सीडीए) के किसी भी सेक्टर में सड़कों के किनारे पौधरोपण करने के लिए कहा था। 

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तहसीलदार बिरंची नारायण बहेरा ने मीता दास नामक एक महिला के खिलाफ कथित तौर पर बलाना गांव में 0.08 एकड़ चराई भूमिक पर कब्जा करने और वहां कच्चा घर बनाने के आरोप में स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की थी। पिछले साल बेदखली का आदेश भी जारी किया गया था और साथ ही अनपढ़ मीता दास के खिलाफ एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।
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महिला की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश रथ ने कहा कि तहसीलदार ने सुनवाई का मौका दिए बिना एक अजीब आदेश पारित किया था। अदालत ने कहा कि प्रशासन से इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने तहसीलदार को सीडीसी इलाके में सड़कों के किनारे कम से कम 50 पौधों का रोपण करने का निर्देश दिया।
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वन अतिक्रमण निवारण कानून के तहत की थी कार्रवाई
मामले में तहसीलदार ने महिला के खिलाफ ओडिशा वन अतिक्रमण निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की थी। महिला के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता अनपढ़ है, इसे संबंधित कानून के बारे में जानकारी नहीं है और उसे अपनी ओर से कारण बताने का अवसर दिया जाना चाहिए था। वहीं, तहसीलदार के वकील ने कहा है कि कार्रवाई उचित आंकलन करने के बाद की गई थी।


सुनवाई पूरी करने के बाद ओडिशा हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब भी किसी कानून के तहत कार्यवाही की शुरुआत की जाती है, तो मामले में अधिक विचार करने का एक निश्चित उद्देश्य होता है। विशेषकर, जब वह मामला अतिक्रमण से जुड़ा हो। हाईकोर्ट ने आगे कहा कि तहसीलदार को उसी तारीख पर ही मामले को तय करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए थी।

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