OPS Update: CRPF में इन कर्मियों को मिलेगी पुरानी पेंशन, ओपीएस लागू करने वाले राज्यों को केंद्र की ना
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पुरानी पेंशन को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। केंद्र सरकार ने सीआरपीएफ में कुछ जवानों और अधिकारियों को पुरानी पेंशन देने का निर्णय लिया है। ये सभी जवान और अधिकारी, मौजूदा समय में एनपीएस के दायरे में आते हैं। खास बात ये है कि जब ये कार्मिक, ओपीएस में शामिल होंगे, तो इनका एनपीएस खाता भी ट्रांसफर हो जाएगा। यानी ये सभी कार्मिक एनपीएस से हटकर जीपीएफ में शामिल होंगे। दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने पुरानी पेंशन व्यवस्था 'ओपीएस' को लागू करने से साफ मना कर दिया है। इतना ही नहीं, जिन गैर-भाजपाई सरकार वाले राज्यों में इसे लागू किया जा रहा है, उनके लिए साफतौर पर कह दिया गया है कि 'एनपीएस' वाले कर्मियों का पैसा 'पेंशन फंड एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी' (पीएफआरडीए) के पास जमा है। पीएफआरडीए पर केंद्र सरकार का नियंत्रण होता है। वह पैसा राज्य सरकार को नहीं दिया जाएगा। दूसरी तरफ अब केंद्र सरकार, जिन कार्मिकों को पुरानी पेंशन व्यवस्था में शामिल कर रही है, उनके एनपीएस खाते को जीपीएफ में तब्दील कर रही है।
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सूत्रों के मुताबिक, सीआरपीएफ ने अपने सभी जोन को सूचित किया है कि उन कार्मिकों को एनपीएस से ओपीएस में शामिल किया जाएगा, जिनका भर्ती विज्ञापन या अधिसूचना, 22 दिसंबर 2003 से पहले हुई थी। ऐसे अनेक कार्मिक बाद में किसी वजह से एनपीएस में शामिल कर दिए गए। इस बाबत अदालत में भी मामला जा चुका है। सभी जोन के एडीजी से कहा गया है कि वे 20 सितंबर 2023 तक ऐसे कार्मिकों के केस तैयार करें, जो उक्त शर्त को पूरा करते हैं। नियुक्ति प्राधिकरण द्वारा 30 सितंबर तक ऐसे केसों में अंतिम आदेश जारी किया जाएगा। यानी वे कर्मी एनपीएस से ओपीएस में शामिल हो जाएंगे। इस बीच ही एनपीएस का पैसा निकालकर उसे जीपीएफ में जमा करा दिया जाएगा।
इस प्रक्रिया को कई चरणों में पूरा करना है। इसके लिए कई कमेटियां बनाई गई हैं। ये कमेटी अपने अपने दायरे में सर्विस बुक और दूसरे रिकॉर्ड की जांच करेंगी। नियुक्त कमेटी द्वारा सीआरपीएफ के किसी भी सेक्टर/दफ्तर को दिशा निर्देश जारी किया जा सकता है। इसका मकसद, कार्य में तेजी लाना रहेगा। उक्त मामले में आदेश जारी होने के बाद नियुक्ति प्राधिकरण/डीडीओ एनपीएस खाते को बंद कर सकता है। इसके बाद संबंधित कर्मचारी/अधिकारी को जीपीएफ खाता संख्या जारी करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसमें उन कर्मियों को लगाया जाए, जिन्हें इस तरह के मामले निपटाने में विशेष अनुभव प्राप्त हो। सीआरपीएफ की कादरपुर अकादमी से संबंधित केसों का निपटारा ट्रेनिंग सेक्टर करेगा। सभी कमेटियों से कहा गया है कि वे 20 सितंबर तक अपनी कार्यवाही पूरी कर लें।
विभिन्न राज्यों में 'एनपीएस' वाले कर्मियों का पैसा 'पेंशन फंड एंड रेगुलेटरी अथारिटी' (पीएफआरडीए) के पास जमा है। पीएफआरडीए पर केंद्र सरकार का नियंत्रण होता है। छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब, झारखंड और हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मियों को ओपीएस लागू करने का भरोसा दिलाया गया था। छत्तीसगढ़ और राजस्थान सरकार ने पीएफआरडीए से पैसा वापस लेने के लिए फाइल चलाई थी, लेकिन उसमें सफलता नहीं मिल सकी। छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मियों ने पीएफआरडीए में 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा कराई है। इस राशि की वापसी के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पीएम मोदी को पत्र लिख चुके हैं। राज्य सरकार ने एनपीएस में जमा होने वाली कर्मियों के हिस्से की राशि लेनी बंद कर दी है।
इस मामले में भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ के महासचिव मुकेश कुमार बताते हैं, एनपीएस का पैसा तो केंद्र सरकार के नियंत्रण में है। दूसरी तरफ कई राज्यों ने अपने कर्मियों को ओपीएस का लाभ देने की घोषणा कर दी। अब यह सवाल उठता है कि कर्मियों का एनपीएस में जमा पैसा, जो केंद्र के नियंत्रण में है, वह वापस कैसे आएगा। अगर वह पैसा वापस नहीं आता है, तो राज्य सरकार के खजाने पर इसका अतिरिक्त भार पड़ेगा। सरकारी खाते में उस पैसे का डिस्पोजल क्या होगा, यह एक अहम सवाल है। एनपीएस में जमा पैसा तो बाजार में लगा है, उसे कैसे वापस लाएंगे, इसका कोई मेकैनिज्म तो बनाना ही पड़ेगा। केंद्र सरकार एनपीएस का पैसा दे सकती है, बशर्ते कि इसके लिए पीएफआरडीए एक्ट में संशोधन करना पड़ेगा। इस बाबत केंद्र सरकार को तैयार रहना चाहिए। वजह, आने वाले समय में कई दूसरे राज्यों में भी 'ओपीएस' लागू हो सकता है। जब 'कर्मचारी और नियोक्ता' दोनों ही एनपीएस से बाहर निकलना चाहते हैं तो केंद्र सरकार उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकती।