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विपक्ष मिलकर उतारेगा राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार

Wed, 12 Apr 2017 12:16 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Wed, 12 Apr 2017 12:16 PM IST
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Opposition will nominate presidential candidate together
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
राजनीति में बने रहना है तो भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों के खिलाफ विपक्षी एकता जरूरी है। यह आवाज जद(यू) के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने उठाई और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने भी इसे आगे बढ़ाया है। इसी क्रम में जद(यू) ने विपक्षी एकता के लिए कांग्रेस से आगे बढऩे का ऐलान किया है और सूत्र बताते हैं कि सभी विपक्षी पार्टियों को एकजुट करके साझा राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार उतारने की कोशिश शुरू हो गई है।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इसको लेकर लगातार सक्रिय हैं। इसके लिए कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं से भी मंत्रणा चल रही है। पार्टी चाहती है कि आम सहमति के आधार पर राष्ट्रपति और उसके बाद उप राष्ट्रपति पद के लिए साझा उम्मीदवार उतारा जाए। इसके लिए कांग्रेस ने भी कोशिशें तेज कर दी है।
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कांग्रेस पार्टी के एक महासचिव का कहना है कि कुछ दलों के नेताओं से बात चल रही है। कांग्रेस भी विपक्षी दलों की एकता की पक्षधर है। हालांकि अभी इसके बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। जद(यू) के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने कहा कि हमारे नेता नीतिश कुमार लगातार विपक्षी एकता की वकालत कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए सभी विपक्षी दल एक जुट हों। कांग्रेस लीड करे और साझा उम्मीदवार उतारा जाए।
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त्यागी बताते हैं कि इसी क्रम में हाल में माकपा महासचिव सीताराम येचुरी के साथ चर्चा हुई थी। इस चर्चा में नीतिश कुमार के साथ केसी त्यागी भी थे और चर्चा का केन्द्र बिन्दु विपक्षी एकता थी। इस भेंट के बाद सीताराम येचुरी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बीच भी 45 मिनट की मंत्रणा हुई।

हालांकि सीताम येचुरी ने इसे एक कप चाय तक सीमित मुलाकात ही बताया था, लेकिन सूत्र बताते हैं कि विपक्षी दलों की संसद भवन के भीतर, बाहर तथा राजनीतिक रूप में एकता पर मंथन हुआ था।

बने न्यूनतम साझा कार्यक्रम
वामदल, जद(यू) समेत अन्य दल चाहते हैं कि विपक्षी एकता के लिए कोई भी एक चेहरा नेता न हो। इसके लिए एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार किया जाए और इसी आधार पर आगे राजनीतिक कदम उठाए जाएं तथा मिलकर चुनाव लड़े जाएं। ताकि राज्यों की विधानसभाओं में भी भाजपा को सत्ता में आने से रोका जा सके। जद(यू) के केसी त्यागी साफ कहते हैं कि देश में नये राष्ट्रपति का चुनाव काफी संवेदनशील मसला है। कुछ ही महीने में नये राष्ट्रपति का चुनाव होना है। इसलिए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संवैधानिक मूल्यों विश्वास रखने वाले व्यक्ति का राष्ट्रपति चुना जाना हम सबकी प्राथमिकता है। इसे ध्यान में रखकर विपक्षी एकता जरूरी है और इसके लिए जद(यू) लगातार प्रयत्नशील है।


एक विडंबना यह भी
विपक्षी एकता के लिए प्रयास तो हो रहे हैं, लेकिन एक विडंबना भी है। गुजरात में एनसीपी और जद(यू) कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लडऩा चाहती है। ताकि वहां की भाजपा की सरकार को सत्ता से बेदखल किया जा सके। इसके लिए एनसीपी और जद(यू) ने कांग्रेस के साथ चुनाव लडऩे की इच्छा भी जताई है, लेकिन अभी तक कांग्रेस ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। कांग्रेस के रुख से साफ है कि वह बिहार में एकला चलना चाहती है। इसपर केसी त्यागी कहते हैं कि कांग्रेस अकेले भाजपा को हरा नहीं सकती और साथ आने की बात कहने पर नखरे दिखाने लगती है।
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