G20 डिनर: विपक्षी एकता के रिश्तों के आजमाइश की चढ़ी हांडी; इसलिए नीतीश को छोड़ सिर्फ ममता पर भड़के अधीर!
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विस्तार
G20 के लिए आयोजित होने वाले ग्रैंड डिनर में गए तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी थे। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी राष्ट्रपति की ओर से आयोजित इस ग्रैंड डिनर में बतौर मेहमान शामिल हुए। और तो और इस डिनर में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी शामिल हुए। लेकिन कांग्रेस के प्रमुख नेता अधीर रंजन चौधरी ने अपनी पूरी भड़ास पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर ही निकाल दी। सियासी गलियारों में चौधरी की भड़ास को लेकर चर्चा यह हो रही है कि जब उनके गठबंधन में शामिल अन्य दूसरे बड़े नेता भी इस डिनर में शामिल थे तो सिर्फ ममता बनर्जी पर ही कांग्रेस के नेता ने सवाल क्यों उठाए। सियासी जानकारों का कहना है कि दरअसल इसमें कांग्रेस की रणनीति की बजाय अधीर रंजन चौधरी और ममता बनर्जी की व्यक्तिगत अदावत ज्यादा नजर आ रही है।
कहने को तो दुनिया भर के तमाम दिग्गज नेता जी20 के दौरान आयोजित किए गए ग्रैंड डिनर में अपने कूटनीतिक रिश्ते दुरुस्त कर रहे थे। जबकि दूसरी ओर देश के विपक्षी नेताओं की सियासी रिश्तो की आजमाइश भी इसी ग्रैंड डिनर में हो रही थी।
दरअसल, इस डिनर में जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तस्वीर दुनिया भर के बड़े नेताओं और योगी-शाह के साथ वायरल होनी शुरू हुई तो अधीर रंजन चौधरी ने सवालिया निशान उठाने शुरू कर दिए। राजनीतिक विश्लेषक रामेंद्र प्रसाद आहूजा कहते हैं कि जिस तरीके से अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी को निशाने पर लिया उससे पार्टी की रणनीति कम बल्कि चौधरी की अपनी व्यक्तिगत अदावत ज्यादा नजर आ रही थी। वह कहते हैं अगर पार्टी को इस कार्यक्रम के बायकॉट करने की रणनीति होती तो कांग्रेस से हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह को भी इसमें शामिल नहीं होने देती।
आहूजा कहते हैं कि अगर गठबंधन को इसका विरोध ही करना था तो वह ममता बनर्जी के साथ-साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का भी विरोध करते। लेकिन इस पर कोई भी विरोध के सुर विपक्षी गठबंधन INDIA की ओर से नहीं उठे। हालांकि यह बात अलग है इस कार्यक्रम में कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री में से सुक्खू के सिवा और कोई भी नहीं आया। न आने वाले नेताओं में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी शामिल थे।
सियासी जानकारों का कहना है कि इस कार्यक्रम में शामिल हुए विपक्षी दलों के बड़े नेताओं कांग्रेस पार्टी की ओर से सीधे तौर पर कोई न हमला किया गया न ही कोई सवाल जवाब हुआ। वरिष्ठ पत्रकार दीपेंद्र ठाकुर कहते हैं कि इस कार्यक्रम में जितने भी नेता शामिल हुए वह सभी लोग देश के एक बड़े कार्यक्रम में राष्ट्रीय अध्यक्षों के स्वागत समारोह में बुलाए गए कार्यक्रम की गंभीरता को समझते हुए गए थे। ऐसा जानकारों का कहना है कि शुरुआती दौर में कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने इसका विरोध किया लेकिन सुक्खू के पहुंचने के साथ उस विरोध का कोई महत्व नहीं बचता है। लेकिन अधीर रंजन चौधरी का ममता बनर्जी पर किया गया बयान सुक्खू के पहुंचने के साथ साबित करता है कि पार्टी का वास्तव में राष्ट्रपति की ओर से आयोजित किए गए इस डिनर पार्टी का कोई विरोध नहीं रहा होगा। अगर ऐसी कोई रणनीति होती तो हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुक्खू को भी इस कार्यक्रम में शिरकत करने से मना कर दिया जाता। हालांकि कुछ सियासी जानकारों का कहना है कि कांग्रेस ने सुक्खू को रणनीति के तहत ही कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए भेजा। ताकि उनपर यह आरोप न लगे कि इतने बड़े कार्यक्रम में कांग्रेस के नेताओं ने पूरी तरह से इसका बायकाट कर दिया।
वहीं डिनर में कुछ तस्वीरें ऐसी जरूर सामने आई हैं जिसको लेकर सियासी चर्चाएं हो रही हैं। इसमें देश के गृहमंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ बैठी हुई पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तस्वीर सबसे ज्यादा चर्चाओं में है। सियासी गलियारों में इस तस्वीर के अलग-अलग मायने तलाशे जा रहे हैं। विपक्षी दलों के गठबंधन पर सवाल उठाने वाले सियासी विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी की यह तस्वीर बताती है कि किस तरीके से वह ग्रैंड डिनर के दौरान अमित शाह से मुलाकात कर अपने भतीजे के ऊपर कसे जा रहे शिकंजे को हल्का करना चाहती हैं। वही इस कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर प्रशांत किशोर कहते हैं कि नीतीश कुमार जब कोई भी एक दरवाजा खोलते हैं तो उसके साथ में खिड़की भी खुली रखते हैं। उनका कहना है कि वह INDIA के साथ दरवाजे से विपक्षी एकता में प्रवेश कर रहे हैं। जबकि खुली हुई छोटी खिड़की से भाजपा में भी तांक झांक कर रहे हैं।
कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जी20 के डिनर में नहीं पहुंच पाने पर कहा कि, मेरे पहले से ही चौरड़िया और रामदेवरा के कार्यक्रम थे। हालांकि वह कहते हैं कि उस दिन दिल्ली में उड़ान पर रोक भी थी। इसलिए वह कार्यक्रम में नहीं पहुंच सके। वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल का कहना था कि इस समिट को लेकर दिल्ली और आसपास हवाई यात्रा पर बंदिशों की वजह से वे नहीं आ पाए। हालांकि गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री या अन्य मेहमानों के लिए उड़ानों पर कोई रोक नहीं थी।
डिनर में शामिल नहीं हुए एमपी सीएम शिवराज चौहान
9 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से विदेशी मेहमानों के लिए आयोजित डिनर में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद नहीं थे। सूत्रों के मुताबिक सीएम चौहान जन आर्शिवाद यात्रा और चुनावी तैयारियों में व्यस्त थे। हालांकि उनका दिल्ली आने का कार्यक्रम था। मगर इन कार्यक्रमों के चलते उन्हें देर हो गई। चूंकि इसी वक्त विदेशी मेहमानों के प्लेन दिल्ली में उतर रहे थे। इस वजह से लोकल विमान सेवाएं कुछ समय तक प्रभावित हुई थीं। उनका प्लेन भी इसी वजह से समय से उड़ान नहीं भर पाया।