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टीवी पर आने के लिए विपक्ष कर रहा नोटबंदी का विरोध: जेटली

Wed, 07 Dec 2016 08:45 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 07 Dec 2016 08:45 PM IST
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Opposition oppose Notbandi to come on TV
- फोटो : Getty

नोटबंदी के मुद्दे पर संसद में विपक्ष की घेरेबंदी के सामने अब सरकार भी हमलावर हो गई है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा में विपक्षी सांसदों को कहा कि वे टीवी कवरेज के लिए नोटबंदी का विरोध करते है। मगर विस्तार से चर्चा करने से भाग खड़े होते हैं। 

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जेटली ने विपक्ष को सीधे चुनौती दी कि अगर उसमें हिम्मत है तो चर्चा आज से ही शुरू करें। सरकार ने आंकड़ों के साथ विपक्ष पर संसद न चलने देने के लिए जनता का करोड़ों रुपये बर्बाद करने का आरोप लगाया। राज्यसभा की बुधवार को कार्यवाही शुरू होते हुए विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि नोटबंदी के कारण बडी संख्या में लोगों का रोजगार छिन गया है और कामगारों की छंटनी हो रही है। 
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पिछले 10 दिनों से रिजर्व बैंक ने जमा होने वाले नोटों के बारे में जानकारी देनी बंद कर दी है। राज्यसभा में सरकार के एक सवाल के दिए गए जवाब का जिक्र करते हुए आजाद ने कहा कि सरकार के उत्तर में कहा गया है कि बैंकों के पास पर्याप्त पैसा है। उन्होंने कहा कि जब बैंकों में पर्याप्त पैसा है तो लोग लाइनों में क्यों लगे हुए हैं। 

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'चर्चा को रोकने का काम यह विपक्ष कर रहा है'

Opposition oppose Notbandi to come on TV

इसके जवाब में वित्त मंत्री ने कहा कि रोज किसी ने किसी बहाने चर्चा को रोकने का काम यह विपक्ष कर रहा है। सुबह शून्य काल में दो मिनट के लिए टेलीविजन कवरेज के लिए यह मुद्दा उठा दिया जाता है। फिर हंगामा कर संसद ठप कर दी जाती है। जेटली ने कहा, ‘अगर विपक्ष में हिम्मत है तो चर्चा आज से शुरू करें।’ विपक्ष की ओर से सपा सांसद नरेश अग्रवाल, बसपा मायावती ने जवाब देने की कोशिश की। 

जेटली ने व्यवस्था का सवाल उठाते हुए इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि जब सदन में पहले ही नोटबंदी के मुद्दे पर नियम के तहत चर्चा होनी है तो आसन क्यों शून्य काल में इस विषय पर सदस्यों को बोलने की अनुमति दे रहा है। इसके बाद सत्तापक्ष के सदस्यों ने नारे दिए, ‘हिम्मत हो तो चर्चा करो’। 

विपक्ष नारे लगा रहा था ‘जनता का पैसा वापस दो।’ नकवी ने कहा कि लोकसभा में एक घंटे की कार्यवाही के लिए 1.25 करोड़ तो राज्यसभा में एक 1.1 करोड़ रुपये खर्च होता है। राज्यसभा में अब तक 65 घंटे हंगामे की भेंट चढ़ गए हैं।


 
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