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विपक्ष का वार: लोकसभा में सरकारी संपत्तियों को बेचने और महंगाई पर सरकार को घेरा
Fri, 19 Mar 2021 02:59 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 19 Mar 2021 02:59 AM IST
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एनसीपी नेता सुप्रिया सुले (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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विपक्षी दलों ने बृहस्पतिवार को विनिवेश और सरकारी संपत्तियों की बिक्री करने तथा पेट्रोल, डीजल व गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। लोकसभा में ‘अनुदान की अनुपूरक मांगें’ पर चर्चा के दौरान एनसीपी की सुप्रिया सुले ने कहा कि आठ मंत्रालयों ने अपनी संपत्ति के मुद्रीकरण की योजना तैयार की है और भारतीय जीवन बीमा निगम में भी सरकार अपनी हिस्सेदारी कम करने जा रही है।
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उन्होंने कहा कि कुछ मात्रा में विनिवेश समय की जरूरत है लेकिन इतनी आक्रामकता के साथ? आखिर सरकार आठ मंत्रालयों के लिए इतनी तेजी में क्यों है? ये सभी और एलआईसी फायदे में हैं... यही चिंता का विषय है। वहीं शिवसेना ने सरकार से पूछा कि महंगाई को कम करने के लिए वह क्या कदम उठा रही है?
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वाईएसआरसीपी के मार्गनी भरत ने कहा कि सरकार को राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड का निजीकरण नहीं करना चाहिए। उन्होंने इसका सेल में विलय करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि इस प्लांट ने कोविड-19 से पहले 200 करोड़ का लाभांश कमाया था। कांग्रेस के सप्तगिरि उलका ने आरोप लगाया कि सरकार के पास विनिवेश को लेकर कोई रणनीति नहीं है। वह बहुत ऊंचे लक्ष्य तय करती है। रणनीति न होने के चलते ही एयर इंडिया का विनिवेश अभी तक नहीं हो सका है।
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तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने आरोप लगाया कि सरकार का व्यवहार ‘क्रूर’ है और वह (सरकार) देश की संपत्तियों को बेच रही है और पेट्रोल, डीजल तथा रसोई गैस के दाम कम करने पर चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने सवाल किया कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन पर प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि तीनों कानूनों को वापस लिया जाए, बजट में पेट्रोल-डीजल पर घोषित उपकर को वापस लिया जाए और एलपीजी सिलिंडर के दाम कम किए जाएं।
चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए वित्तराज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि एलआईसी का निजीकरण नहीं किया जा रहा है। इसके लिए केवल प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) लाने का प्रस्ताव किया गया है। वहीं भाजपा सांसदों ने कहा कि मोदी सरकार ने स्वास्थ्य, शिक्षा, आधारभूत ढांचा, कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए बजट में पर्याप्त आवंटन किया है, जिससे आत्मनिर्भर भारत का मार्ग प्रशस्त हुआ है और भारत का दुनिया में कद बढ़ा है।