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मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खड़ा करने में जुटी कांग्रेस को झटका, विपक्ष में पड़ी दरार

Mon, 26 Dec 2016 07:39 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 26 Dec 2016 07:39 PM IST
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Oppn split again: JD(U), NCP, CPM decide to skip Cong’s show of strength
फाइल फोटो - फोटो : Getty Images
मोदी सरकार के खिलाफ संसद के बाहर एकजुट विपक्ष का मोर्चा खड़ा करने की कांग्रेस की रणनीति को सोमवार को करारा झटका लगा। जदयू के नीतीश कुमार, एनसीपी के शरद पवार और सीपीआई(एम) के सीताराम येचुरी ने विपक्षी एकजुटता के प्रदर्शन से दूर रहने का फैसला किया है। 
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सीपीआई(एम) के नेता सीताराम येचुरी ने कहा, 'उनकी पार्टी मंगलवार को होने वाले कार्यक्रम में शिरकत नहीं करेगी। सभी 16 विपक्षी पार्टियां कार्यक्रम में मौजूद नहीं होंगी। चीजों को योजनागत तरीके से नहीं किया गया है।' येचुरी ने आगे जोड़ा कि लालू प्रसाद यादव की पार्टी भी इससे इत्तेफाक रखती है। 
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उन्होंने कहा, 'कांग्रेस को यह पता होना चाहिए कि संयुक्त प्रयासों से पहले बेहतर समझ बनाने और सलाह मशविरा जरूरी होता है।'

जदयू नेता केसी त्यागी ने कहा, 'हमें नहीं पता कि एजेंडा क्या है?' एनसीपी के वरिष्ठ नेता डीपी त्रिपाठी ने भी कहा कि उनकी पार्टी प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं होगी। 



समाजवादी पार्टी भी इस मुद्दे पर निर्णय की स्थिति में है। सपा नेता नरेश अग्रवाल ने कहा, 'हमने कोई फैसला नहीं लिया है.. कम से कम मैं नहीं जाऊंगा। ज्यादा जानकारी के लिए आपको नेता जी (मुलायम सिंह यादव) से संपर्क करना चाहिए।'

राहुल के आरोपों को पुख्ता करने की कोशिश

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फाइलः राहुल गांधी - फोटो : amar ujala
विपक्ष में फूट पड़ना कांग्रेस के लिए किसी झटके से कम नहीं है, जोकि साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को और विपक्ष की मौजूदगी के जरिए पुख्ता करना चाहती है। 

प्रधानमंत्री के खिलाफ लगाए गए कांग्रेस उपाध्यक्ष के आरोप हाल के दिनों में चर्चा में रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राहुल गांधी की मुलाकात ने विपक्ष की एकजुटता में दरार डाल दी। 

शीत सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों में विपक्ष ने एकजुटता दिखाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 1000 और 500 रुपये के नोटों को बंद करने की घोषणा के बाद सदन चलने नहीं दी। 

मंगलवार को होने वाली बैठक में कांग्रेस पार्टी का जोर पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए दो मुद्दों पर रहने की उम्मीद है। पहला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों और दूसरा नोटबंदी के चलते आम लोगों को हो रही परेशानी का मसला। ध्यान रहे कि 2014 के चुनावों में नरेंद्र मोदी भ्रष्टाचार मुक्त शासन के वादे पर प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे। 

हालांकि व्यापक राजनीतिक लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस की कोशिश संसद के बाहर भी एकजुट विपक्ष खड़ा करने की है।

राहुल और मोदी की बैठक ने डाली फूट

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फाइलः विपक्ष की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस - फोटो : Getty Images
एक कांग्रेस नेता के मुताबिक संसद के शीत सत्र में एनडीए सरकार के खिलाफ सभी विपक्षी पार्टियों ने एकजुटता दिखाई, लेकिन आखिरी दिन प्रधानमंत्री के साथ राहुल गांधी की बैठक को लेकर थोड़ी गलतफहमी पैदा हो गई है। 

मंगलवार के कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी अन्य पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं के साथ मौजूद रहने की उम्मीद है। इसके लिए विपक्षी पार्टियों को न्यौता भेजा गया है।  हालांकि ओडिशा की सत्ताधारी पार्टी बीजेडी, तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी एआईएडीएमके और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम को न्यौता नहीं भेजा गया है। 

विपक्षी दलों के समर्थन से साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की योजना में जुटी कांग्रेस के एक नेता ने कहा, 'पार्टी चाहेगी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या जेडीयू नेता शरद पवार गुजरात में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लगाए गए आरोपों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगे।' हालांकि कांग्रेस नेता के बयान के बाद जेडीयू ने इससे दूर रहने का फैसला किया। 

'नोटबंदी का लक्ष्य ब्लैकमनी और भ्रष्टाचार को खत्म करना'

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फाइलः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : Getty Images
कांग्रेस उपाध्यक्ष का प्रधानमंत्री पर आरोप है कि 2013-14 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने कॉरपोरेट से करोड़ों रुपये की रिश्वत ली थी। वहीं, बीजेपी का कहना है कि राहुल गांधी के आरोप आधारहीन हैं।

मंगलवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस आधारभूत समस्याओं पर भी फोकस करना चाहती है। इनमें किसानों से जुड़ी समस्याएं प्रमुख हैं। कांग्रेस सहित विपक्ष का कहना है कि अचानक लिए गए नोटबंदी के फैसले से सौ से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो गई है। 

नोटबंदी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चौंकाने वाले फैसले और उसके बाद लगातार बदल रहे नियम कायदों के चलते बैंकों में भगदड़ सा माहौल बन गया है। लाखों खाता धारक बैंकों और एटीएम के बाहर लाइन में लगे हुए हैं ताकि वे अपने पुराने नोट बदल सकें और नए निकाल सकें। 

मोदी सरकार कहना है कि नोटबंदी का लक्ष्य ब्लैकमनी और भ्रष्टाचार को खत्म करना है, लेकिन विपक्षी पार्टियां नोटबंदी को लागू करने की प्रक्रिया पर सवाल उठा रही हैं।
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