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संसद में 'भाषा' को लेकर मौन रहते हैं अधिकांश सांसद, 16 साल में पूछे मात्र 77 सवाल

Fri, 04 Oct 2019 04:29 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 04 Oct 2019 04:29 PM IST
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Only 77 Questions asked in Parliament on Rajbhasha Hindi by Members of parliament till 2016
parliament - फोटो : PTI
संसद के बाहर 'भाषा' को लेकर विभिन्न दलों के सांसदों की तीखी नोक-झोंक सुनने को मिलती है। चुनावी रैली हो या कोई दूसरा कार्यक्रम, वहां भी नेताओं के मुख से भाषा के नाम पर कुछ ऐसा निकल जाता है, जो कई दिन तक मीडिया की सुर्खियों में चलता रहता है। संसद में राजभाषा को लेकर हमारे सांसद कितने गंभीर हैं, यह अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने राजभाषा को लेकर पिछले 16 साल में केवल 77 सवाल पूछे हैं।
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2000 में एनडीए सरकार में पूछे 21 सवाल 

सर्वाधिक 21 सवाल वर्ष 2000 प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली तत्कालीन एनडीए सरकार में पूछे गए थे। अब हालात यह हैं कि राजभाषा का विकास, प्रचार-प्रसार या उससे जुड़ी दूसरी बातों को लेकर सदन में सांसद मौन हो गए हैं। राजभाषा विभाग के तरफ से जारी सूचना के मुताबिक, वर्ष 2016 के बाद भाषा को लेकर सदन में कोई सवाल जवाब नहीं पूछा गया है।

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साल 2000 में पूछा, कब शुरू होगी हिंदी में ई-मेल सुविधा

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राजभाषा विभाग की जानकारी के मुताबिक, 19 दिसंबर 2000 को शीतकालीन सत्र के दौरान सांसद विजय कुमार खंडेलवाल ने यह सवाल पूछा था कि हिंदी में ई-मेल भेजने की सुविधा कब शुरू होगी। उस वक्त जवाब देने वाले गृह राज्यमंत्री थे आईडी स्वामी। 25 जुलाई 2000 को सुरेश रामराव जाघव ने सवाल पूछा कि राजभाषा के प्रचार-प्रसार के लिए कितनी लघु फिल्म या टीवी कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। उसी साल 22 अगस्त को संसद सदस्य ब्रह्मानंद मंडल ने पूछा कि हिंदी को राजभाषा घोषित किए जाने के बाद भी यह व्यापक प्रयोग में क्यों नहीं आ पा रही है।


29 फरवरी को सदन में डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे ने सवाल किया, एनसीईआरटी ने अर्थशास्त्र या अन्य पुस्तकों में मानक हिंदी पर्याय का प्रयोग न कर राजभाषा नीति का पालन नहीं किया है, सरकार इस पर क्या कार्रवाई कर रही है।18 भाषाओं को राजभाषा घोषित करना, राजभाषा उल्लंघन बाबत कार्रवाई और इसके प्रचार पर खर्च हुआ धन, कई सांसदों ने ऐसे सवाल किए थे।


2007 में हिंदी के विश्वकोष की मांगी जानकारी

21 अगस्त 2007 को सांसद रघुवीर सिंह कौशल ने सवाल पूछा, क्या सरकार ने राजभाषा हिंदी का विश्वकोष तैयार करने की योजना बनाई है। 2005 में सांसद तुकाराम गणपतराव पाटिल और बीर सिंह महतो ने राजभाषा विभाग में अनियमितताओं को लेकर सवाल किया। 2010 में सांसद गोरखप्रसाद जायसवाल और यशवंत लागुरी ने सवाल किया कि हिंदी को राजभाषा का दर्जा देने के लिए सरकार ने क्या कुछ किया है। 2013 में सांसद देवजी एम पटेल और कामेश्वर बैठा ने पूछा कि विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की अधिकारिक वेबसाइट पर केवल अंग्रेजी में ही जानकारी क्यों मिलती है, हिंदी में क्यों नहीं।

अंग्रेजी में क्यों काम कर रहे हैं बैंक

उसी साल कैप्टन जय नारायण प्रसाद निषाद ने पूछा, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या बैंक केवल अंग्रेजी में ही काम कर रहे हैं। यह राजभाषा अधिनियम का उल्लंघन है। खासतौर पर सरकार ने ऐसे बैंकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है। 10 मई 2016 को सांसद नीलम सोनकर ने सवाल किया, विभिन्न मंत्रालय, विभाग या बैंक, यहां हिंदी का प्रयोग करने के लिए सरकार ने क्या निर्देश दिए हैं। अंतिम सवाल जो कि 2016 में 9 अगस्त को सांसद वीरेंद्र कश्यप ने पूछा था। विभिन्न मंत्रालयों में कनिष्ठ हिंदी अनुवादकों के कितने पद खाली हैं। तत्कालीन गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू ने इसका जवाब देते हुए बताया कि अभी तक 31 पद रिक्त हैं।

साल      संसद में हिंदी भाषा पर पूछे गए सवालों की संख्या    

2000                   21     
2001                   2
2002                   5
2003                   7
2004                   3 
2005                   11
2006                   2
2007                   3
2008                   4
2009                   0
2010                   2
2011                   1 
2012                   3
2013                   4
2014                   4  
2015                   1
2016                   4
2017                   0
2018                   0

2019                   0 (अभी तक संपन्न हुए सत्र) 

 

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