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उच्च न्यायालयों में 670 जजों में सिर्फ 73 महिला जज, सरकार ने संसदीय समिति को बताया
Sun, 13 Jan 2019 09:12 PM IST
आसिम खान
भाषा, नई दिल्ली
भाषा, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Sun, 13 Jan 2019 09:12 PM IST
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देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में सेवारत 670 न्यायाधीशों में सिर्फ 73 महिला न्यायाधीश हैं। सरकार ने एक संसदीय कमेटी को यह जानकारी दी। सरकार ने इस बात का जिक्र किया कि 23 मार्च 2018 तक न्यायाधीशों की मंजूर संख्या 1,079 थी जबकि सिर्फ 670 न्यायाधीश ही देश के 24 उच्च न्यायालयों में नियुक्त थे। इस तरह 409 रिक्तियां थी।
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कानून मंत्रालय के न्याय विभाग ने कानून एवं कार्मिक मामलों से जुड़ी स्थायी समिति को बताया कि 23 मार्च 2018 तक विभिन्न उच्च न्यायालयों में 73 महिला न्यायाधीश सेवा दे रही थीं जो कार्य क्षमता का 10. 89 प्रतिशत है।
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महिलाओं और हाशिये पर मौजूद समुदायों के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व पर चिंता जाहिर करते हुए मंत्रालय ने कहा कि केंद्र उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों से यह अनुरोध करता रहा है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजे जाने के दौरान अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अल्पसंख्यक समुदायों तथा महिलाओं में से उपयुक्त उम्मीदवारों पर विचार करे।
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सरकार ने कहा, ‘‘उच्चतर न्यायपालिका में समाज के विभिन्न तबके का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए यह किया जा रहा है।’’ हालांकि, केंद्र ने यह स्पष्ट किया है कि उच्च न्यायपालिका में आरक्षण के लिए अनुच्छेद 124 और 217 में संशोधन करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
साथ ही यह भी कहा गया है कि कमेटी को ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री/ राज्यपाल को दी गई छह महीने की समय सीमा न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज करने के लिए घटाई जा सकती है। गौरतलब है कि जिस वक्त यह रिपोर्ट तैयार की गई थी उस समय देश में 24 उच्च न्यायालय थे। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लिए अलग - अलग उच्च न्यायालय हो जाने के बाद इस साल एक जनवरी से इनकी संख्या बढ़ कर 25 हो गई है।