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ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग केस: जिन प्रदेशों में बैन, वहां जोड़े नए यूजर्स, करोड़ों खर्च, कितना प्लेटफॉर्म कमीशन?

Sun, 27 Sep 2026 08:08 PM IST
पवन पांडेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Sun, 27 Sep 2026 08:08 PM IST
सार

ईडी ने ‘रमीकल्चर’ और अन्य ऑनलाइन गेमिंग ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करीब 442.35 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं। जांच में कंपनियों पर कथित तौर पर बॉट के जरिए यूजर्स को नुकसान पहुंचाने, लत बढ़ाने और अवैध कमाई करने के आरोप हैं। अब तक कुल 2,843 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच, फ्रीज या जब्त की जा चुकी है।

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Online Real-Money Gaming Case: New users added in states where bans exist, crores spent, platform commission?
ED

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बंगलूरू जोनल ऑफिस ने 'रमीकल्चर ऐप' और अन्य से जुड़े मामले में, मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत लगभग 442.35 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त (अटैच) किया है। अस्थायी रूप से जब्त की गई संपत्तियों में फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा राशि, कमर्शियल दुकानें, एक विला और कई रिहायशी अचल संपत्तियां शामिल हैं। ये संपत्तियां गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के शेयरधारकों के परिवार के सदस्यों, प्राइवेट फैमिली ट्रस्ट और उनसे जुड़ी विभिन्न संस्थाओं के नाम पर थीं।
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ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत इस केस की जांच शुरू की है। यह जांच तेलंगाना राज्य में कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर की जा रही है। इन एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रावधानों के तहत धोखाधड़ी के अपराधों का आरोप है, जो पीएमएलए के तहत 'शेड्यूल्ड ऑफेंस' (निर्धारित अपराध) की श्रेणी में आते हैं।
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इससे पहले, ईडी ने सात मई से 14 मई और 20 जून से 21 जून के दौरान गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के ऑफिस और उसके डायरेक्टरों व मुख्य कर्मचारियों के घरों पर तलाशी लेने और जब्ती की कार्रवाई की थी। इन तलाशी अभियानों में कई अहम दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए गए, जो जांच के दौरान महत्वपूर्ण सबूत साबित हुए हैं। अब तक हुई जांच से पता चला है कि गेम्स क्राफ्ट टेक्नोलॉजी प्रा. लि. और रमी टाइप टेक्नोलॉजी प्रा. लि. मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए ऑनलाइन 'रियल मनी गेम्स'–खासकर ऑनलाइन रम्मी गेम और टूर्नामेंट चला रही थीं। ये गेम रमी कल्चर, रमी प्राइम, प्लेशिप और रमीटाइम जैसे कई ब्रांड के तहत चलाए जा रहे थे। इन प्लेटफ़ॉर्म के देश भर में लगभग 3 करोड़ यूजर थे। जांच में यह भी पता चला कि बड़ी संख्या में यूजर उन राज्यों से थे, जहां ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग पर प्रतिबंध है, जैसे तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु। इन कंपनियों ने यूज़र द्वारा जमा की गई दांव की रकम पर 10% से 15% तक प्लेटफॉर्म कमीशन लेकर भारी कमाई की है।
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इसके अलावा, जांच से पता चला है कि यूजर को यह भरोसा दिलाने के बावजूद कि गेमिंग प्लेटफ़ॉर्म पारदर्शी, निष्पक्ष और ऑटोमेटेड प्लेयर से मुक्त हैं, इन कंपनियों ने सीधे-सादे यूजर के खिलाफ उनकी जानकारी या सहमति के बिना बीओटी (ऑटोमेटेड प्रोग्राम/एल्गोरिदम) का इस्तेमाल किया। बीओटी के इस्तेमाल से यूजर को भारी आर्थिक नुकसान हुआ, जबकि कंपनियों के लिए 'अपराध से प्राप्त आय' पैदा हुई। कंपनियों ने यूजर्स को जोड़ने और उन्हें बनाए रखने के लिए धोखेबाज और लत लगाने वाली रणनीतियां अपनाईं।

नए यूजर्स को जोड़ने के लिए कंपनियों ने मार्केटिंग और प्रमोशन कैंपेन पर लगभग 1,035 करोड़ रुपये खर्च किए। नए यूजर्स को बोनस, रेफरल इंसेंटिव, फ्री टूर्नामेंट एंट्री और प्रमोशनल रिवॉर्ड्स का लालच देकर लगातार गेम खेलने और ज्यादा पैसे जमा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कंपनियों पर पैसे निकालने (विड्रॉल) के लिए मुश्किल नियम लागू करने का भी आरोप है, जिसमें कुछ मामलों में 5% से 10% तक विड्रॉल लेवी (शुल्क) शामिल है। साथ ही, 'सुपर बूस्टर' ऑफर के जरिए यूजर्स को निकाले जा सकने वाले बैलेंस को 'गेम कैश' (जिसे निकाला नहीं जा सकता) में बदलने के लिए भी प्रेरित किया गया। जो यूजर्स गेम खेलना बंद कर चुके थे (जिनमें भारी आर्थिक नुकसान के बाद खेलने वाले भी शामिल थे), उन्हें फिर से गेम खेलने के लिए प्रेरित करने के मकसद से इंस्टेंट कैश क्रेडिट, प्रमोशनल ऑफर, पुश नोटिफिकेशन, एसएमएस कैंपेन और टेलीमार्केटिंग कॉल के जरिए टारगेट किया गया।


कंपनियों के इन गलत तरीकों ने गेमिंग का ऐसा माहौल बनाया जिससे लत लग गई और बार-बार दांव लगाने को बढ़ावा मिला, जिससे कंपनियों को प्लेटफॉर्म कमीशन के रूप में अपराध से भारी कमाई हुई। इसके अलावा, जांच से पता चला है कि ऊपर बताई गई गतिविधियों से हुई अपराध की कमाई को बाद में शेयरधारकों को डिविडेंड और शेयरों की बाय-बैक के भुगतान के जरिए अलग-अलग लेयर्स में बांटा गया और सिस्टम में मिलाया गया।  साथ ही, इस कमाई को म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, कन्वर्टिबल नोट, इक्विटी शेयर, चल संपत्ति और महंगी अचल संपत्ति (जिनमें फैमिली ट्रस्ट और जुड़ी हुई संस्थाओं के पास मौजूद संपत्तियां भी शामिल हैं) में निवेश के रूप में छिपाया गया, ताकि उन्हें साफ-सुथरी संपत्ति के तौर पर दिखाया जा सके। इससे पहले, तलाशी के दौरान, लगभग 495 करोड़ रुपये की चल संपत्ति को फ्रीज किया गया था। साथ ही, 11 लाख रुपये नकद और सोने/हीरे के गहने (जिनमें लगभग 2.30 किलोग्राम वजन का बुलियन भी शामिल है) जब्त किए गए थे और लगभग 1,906 करोड़ रुपये की संपत्ति को अटैच करने का प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया गया था। इस तरह, अब तक जांच के दौरान अटैच, फ़्रीज और ज़ब्त की गई अपराध की कमाई का कुल मूल्य लगभग 2,843 करोड़ रुपये है।
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