Online Gaming पर सख्त कार्रवाई: ऑनलाइन मनी गेमिंग संस्थाओं की 357 वेबसाइट/यूआरएल ब्लॉक, 126 करोड़ रुपये फ्रीज
गृह मंत्रालय ने साइबर अपराधों से व्यापक और समन्वित तरीके से निपटने के लिए एलईए को एक ढांचा और ईकोसिस्टम प्रदान करने के मकसद से भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की स्थापना की है। सख्त कार्रवाई करते हुए सरकार ने ऑनलाइन मनी गेमिंग संस्थाओं की 357 वेबसाइट या यूआरएल को ब्लॉक किया है। 126 करोड़ रुपये फ्रीज भी किए गए हैं।
विस्तार
एमईआईटीवाई ने वर्ष 2022-25 (फरवरी 2025 तक) के बीच ऑनलाइन सट्टेबाजी/जुआ/गेमिंग वेबसाइटों (मोबाइल एप्लिकेशन सहित) से संबंधित 1410 अवरोधन निर्देश जारी किए हैं। जीएसटी आसूचना मुख्यालय महानिदेशालय 'डीजीजीआई' ऑनलाइन मनी गेमिंग/सट्टेबाजी/जुआ की आपूर्ति में शामिल ऑफशोर संस्थाओं की भी जांच कर रहा है। अब तक, डीजीजीआई ने आईटी एक्ट के तहत, एमईआईटीवाई के साथ समन्वय में, अवैध/गैर अनुपालन वाली ऑफशोर ऑनलाइन मनी गेमिंग संस्थाओं की 357 वेबसाइट/यूआरएल को ब्लॉक किया है। लगभग 126 करोड़ रुपये फ्रीज किए हैं। डीजीजीआई ने लोगों को सतर्क रहने और ऑफशोर ऑनलाइन मनी गेमिंग प्लेटफॉर्म से जुड़ने से बचने की सलाह दी है।
वर्गीकृत गैरकानूनी जानकारी हटाने की दिशा में त्वरित कार्रवाई
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद के मुताबिक, आईटी नियम 2021, सोशल मीडिया मध्यस्थों और ऑनलाइन गेमिंग मध्यस्थों सहित मध्यस्थों पर विशिष्ट दायित्व डालता है। मध्यस्थों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे लागू किसी भी कानून का उल्लंघन करने वाली किसी भी जानकारी को होस्ट, स्टोर या प्रकाशित न करें। वे अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भी बाध्य हैं, जिसमें सरकार के आदेश के खिलाफ या किसी भी गैर कानूनी जानकारी के खिलाफ प्राप्त शिकायतों के आधार पर आईटी नियम 2021 के तहत वर्गीकृत गैरकानूनी जानकारी को हटाने की दिशा में उनकी त्वरित कार्रवाई शामिल है। ऐसी गैरकानूनी जानकारी में ऐसी कोई भी जानकारी शामिल है, जो अन्य बातों के अलावा, बच्चों के लिए हानिकारक है या जो मनी लॉन्ड्रिंग या जुए से संबंधित है या उसे प्रोत्साहित करती है, या जो हिंसा भड़काने के इरादे से धर्म या जाति के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देती है, या जो गलत सूचना है, स्पष्ट रूप से झूठी जानकारी है, प्रकृति में असत्य या भ्रामक है, या जो भारत की एकता, अखंडता, रक्षा, सुरक्षा या संप्रभुता, सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा पहुंचाती है या जो वर्तमान में लागू किसी कानून का उल्लंघन करती है।
भारतीय विज्ञापन मानक परिषद के निर्देशों को मानने की सलाह
ऑनलाइन गेम की लत के संबंध में, शिक्षा मंत्रालय ने माता पिता और शिक्षकों के लिए 'ऑनलाइन गेमिंग के नुकसानों पर काबू पाने' और 'बालकों के लिए सुरक्षित ऑनलाइन गेमिंग' पर परामर्शी निर्देश जारी किया है। इसके अलावा, सूचना और प्रसारण मंत्रालय 'एमआईबी' ने सभी निजी उपग्रह टेलीविजन चैनलों को 'ऑनलाइन गेम्स, फेंटेसी खेलों आदि पर विज्ञापन' पर एक परामर्शी जारी किया है, जिसमें सभी प्रसारकों को सलाह दी गई है कि भारतीय विज्ञापन मानक परिषद द्वारा जारी दिशा निर्देशों का अनुपालन किया जाए।
ऑडियो/वीडियो फॉर्म में अस्वीकरण होना चाहिए
टेलीविजन पर प्रसारित विज्ञापन उसी के अनुरूप हों। दिशा निर्देशों में यह भी शामिल है कि किसी भी गेमिंग विज्ञापन में 18 वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति को चित्रित नहीं किया जा सकता या जो 18 वर्ष से कम आयु का प्रतीत होता है, जो वास्तविक धन कमाने के लिए ऑनलाइन गेमिंग के खेल में लगा हुआ है, या यह सुझाव नहीं दे सकता है कि ऐसे व्यक्ति इन खेलों को खेल सकते हैं और प्रत्येक गेमिंग विज्ञापन में प्रिंट/स्टेटिक मीडिया में एएससीआई कोड के साथ साथ ऑडियो/वीडियो फॉर्म में यह दर्शाते हुए अस्वीकरण यानी डिस्क्लेमर होना चाहिए कि इस गेम में वित्तीय जोखिम का एक तत्व शामिल है। नशे की लत हो सकता है। एमआईबी ने सट्टेबाजी और जुआ प्लेटफार्मों के विज्ञापनों (सरोगेट सहित) पर रोक लगाने के लिए परामर्शी निर्देश भी जारी किए हैं।
डीजीजीआई को मध्यस्थों को निर्देश देने का अधिकार
सरकार ने एक अक्तूबर 2023 से ऑनलाइन गेमिंग पर 28 प्रतिशत की दर से जीएसटी लागू किया है। ऑनलाइन मनी गेमिंग के आपूर्तिकर्ता को एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम 2017 (आईजीएसटी अधिनियम) में संदर्भित सरलीकृत पंजीकरण योजना के तहत एकल पंजीकरण प्राप्त करना होगा। ऑफशोर ऑनलाइन मनी गेमिंग के आपूर्तिकर्ताओं को भी आईजीएसटी अधिनियम के तहत विनियमित किया जा रहा है। जीएसटी आसूचना मुख्यालय महानिदेशालय (डीजीजीआई) को आईटी अधिनियम और आईजीएसटी अधिनियम के तहत उपयुक्त सरकार/एजेंसी के रूप में आईजीएसटी अधिनियम का उल्लंघन करने वाले अपंजीकृत ऑफशोर ऑनलाइन मनी गेमिंग प्लेटफार्मों को अवरुद्ध करने के लिए मध्यस्थों को निर्देश देने का अधिकार है।
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इसके अलावा आईटी अधिनियम में संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों या सार्वजनिक व्यवस्था के हित में या सूचना प्रौद्योगिकी (सार्वजनिक रूप से सूचना तक अभिगम को अवरुद्ध करने के लिए प्रक्रिया और सुरक्षा) नियम 2009 में परिकल्पित यथोचित प्रक्रिया का पालन करते हुए उपरोक्त से संबंधित किसी भी संज्ञेय अपराध के कमीशन को रोकने के लिए विशिष्ट सूचना/लिंक तक अभिगम को अवरुद्ध करने के लिए मध्यस्थों को अवरोधन आदेश जारी कराने का प्रावधान है।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस) की धारा 112, जो एक जुलाई 2024 से लागू हुई, अनधिकृत सट्टेबाजी और जुए के लिए न्यूनतम 1 वर्ष के कारावास की सजा देती है, जिसे 7 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। गृह मंत्रालय ने साइबर अपराधों से व्यापक और समन्वित तरीके से निपटने के लिए एलईए को एक ढांचा और ईकोसिस्टम प्रदान करने के मकसद से भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की स्थापना की है।
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गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (https://cybercrime.gov.in) भी लांच किया है ताकि जनता को साइबर वित्तीय धोखाधड़ी सहित सभी प्रकार के साइबर अपराधों की रिपोर्ट करने में सक्षम बनाया जा सके। इस पोर्टल पर रिपोर्ट की गई साइबर अपराध की घटनाओं को कानून के प्रावधानों के अनुसार आगे की कार्यवाही के लिए संबंधित राज्य/संघ शासित प्रदेश की कानून प्रवर्तन एजेंसी को भेजा जाता है। पोर्टल में वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित शिकायतें दर्ज कराने के लिए अलग अलग तंत्र हैं। ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने में सहायता के लिए एक टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर '1930' शुरु किया गया है।
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