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Assam News: जंगली हाथियों का नहीं थम रहा आंतक, हमले में एक की मौत, पांच घायल
Mon, 19 Sep 2022 02:00 PM IST
वीरेंद्र शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, गुवाहाटी
अमर उजाला ब्यूरो, गुवाहाटी
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Mon, 19 Sep 2022 02:00 PM IST
सार
जंगल से जंगली हाथियों का झुंड भोजन की तलाश में क्षेत्र में घुस आया। लोगों ने उन्हें भगाने की कोशिश की, लेकिन हाथियों ने उन पर हमला कर दिया।
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हाथी(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पूर्वोत्तर खास करके असम में हाथी और मानव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। इस बीच, बक्सा जिले में जंगली हाथियों के झुंड के हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक पास के जंगल से जंगली हाथियों का झुंड भोजन की तलाश में क्षेत्र में घुस आया। लोगों ने उन्हें भगाने की कोशिश की, लेकिन हाथियों ने उनपर हमला कर दिया।
हाथी के हमले में रविंद्र बोड़ो बुरी तरह घायल हो गए। उन्हें अन्य पांच घायलों के साथ रंगिया के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने रविंद्र को मृत घोषित कर दिया। पांच घायलों में धनपति बोड़ो, अनिल दैमारी, परेश बोड़ो, थेंगोना मुशहरी और सुलेंद्र बोड़ो हैं। दाईमरी की हालत नाजुक बताई जा रही है।
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि, पहले कुछ अन्य लोगों पर भी जंगली हाथियों ने हमला किया था। ग्रामीणों ने यह भी शिकायत की कि जंगली हाथियों द्वारा फसलों को भी नियमित रूप से नष्ट कर देते हैं। असम में हाथी-मानव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। पर्यावरणविदों ने पहले ही चेतावनी दी है कि जब तक वन क्षेत्रों को संरक्षित नहीं किया जाता है तब तक ऐसे संघर्ष और भी बढ़ते रहेंगे।
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हाथी के हमले में रविंद्र बोड़ो बुरी तरह घायल हो गए। उन्हें अन्य पांच घायलों के साथ रंगिया के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने रविंद्र को मृत घोषित कर दिया। पांच घायलों में धनपति बोड़ो, अनिल दैमारी, परेश बोड़ो, थेंगोना मुशहरी और सुलेंद्र बोड़ो हैं। दाईमरी की हालत नाजुक बताई जा रही है।
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स्थानीय लोगों ने दावा किया कि, पहले कुछ अन्य लोगों पर भी जंगली हाथियों ने हमला किया था। ग्रामीणों ने यह भी शिकायत की कि जंगली हाथियों द्वारा फसलों को भी नियमित रूप से नष्ट कर देते हैं। असम में हाथी-मानव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। पर्यावरणविदों ने पहले ही चेतावनी दी है कि जब तक वन क्षेत्रों को संरक्षित नहीं किया जाता है तब तक ऐसे संघर्ष और भी बढ़ते रहेंगे।
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