फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   One Nation One Election: Government told why new system is needed, know important facts

One Nation One Election: एक साथ चुनाव नई अवधारणा नहीं...;सरकार ने बताया नई व्यवस्था की क्यों पड़ रही जरूरत

Wed, 18 Dec 2024 04:42 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: शिव शुक्ला Updated Wed, 18 Dec 2024 04:42 AM IST
सार

एक साथ चुनाव कराने से शासन में निरंतरता को बढ़ावा मिलता है। सरकार इसे विकास गतिविधियों में तेजी लाने के उद्देश्य से बेहद अहम मान रही है। इसमें यह भी कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के पहले आम चुनाव 1951-52 में एक साथ कराए गए थे।

विज्ञापन
One Nation One Election: Government told why new system is needed, know important facts
एक देश, एक चुनाव - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

एक देश-एक चुनाव विधेयक लोकसभा में पेश करने और मंथन के लिए जेपीसी को भेजे जाने के बीच सरकार ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि आखिर यह व्यवस्था अपनाने की जरूरत क्यों पड़ रही। सरकार का कहना है कि एक साथ चुनाव कराना कोई नई अवधारणा नहीं है। देश में पहले यही व्यवस्था थी। यही नहीं, इसको लागू करने से देश के विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ने की पूरी संभावना है।

विज्ञापन


सरकार ने कहा कि एक साथ चुनाव कराने से सरकार का ध्यान विकासात्मक गतिविधियों और जनता के कल्याण को बढ़ावा देने वाली नीतियों को लागू करने पर केंद्रित होगा। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति के निष्कर्षों का हवाला देते हुए बयान में कहा गया कि देश के विभिन्न हिस्सों में समय-समय पर चुनावी चक्र में उलझे होने के कारण राजनीतिक दल, उनके नेता, विधायक और राज्य और केंद्र सरकारें अक्सर शासन संबंधी कार्यों को प्राथमिकता देने में चूक जाते हैं। उनका सारा ध्यान अगले चुनाव की तैयारियों पर केंद्रित हो जाता है।
विज्ञापन


शासन की निरंतरता को मिलेगा बढ़ावा
एक साथ चुनाव कराने से शासन में निरंतरता को बढ़ावा मिलता है। सरकार इसे विकास गतिविधियों में तेजी लाने के उद्देश्य से बेहद अहम मान रही है। इसमें यह भी कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के पहले आम चुनाव 1951-52 में एक साथ कराए गए थे। यह परंपरा 1957, 1962 और 1967 में भी जारी रही। कुछ राज्य विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने के कारण 1968 और 1969 में यह चक्र बाधित हो गया। चौथी लोकसभा भी 1970 में समय से पहले भंग कर दी गई थी, जिसके बाद 1971 में नए चुनाव हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन


आपातकाल के बाद स्थिति ज्यादा बिगड़ी
पांचवीं लोकसभा का कार्यकाल आपातकाल की घोषणा के कारण अनुच्छेद 352 के तहत 1977 तक बढ़ा दिया गया था। तबसे स्थिति कुछ ज्यादा ही बिगड़ी और केवल कुछ ही लोकसभाएं पांच साल का कार्यकाल पूरा कर पाईं जिसमें आठवीं, 10वीं, 14वीं और 15वीं लोकसभा शामिल हैं। छठी, सातवीं, नौवीं, 11वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा को समय से पहले भंग किया गया। पिछले कुछ वर्षों में राज्य विधानसभाओं में भी इसी तरह के व्यवधान सामने आए हैं।

राजनीतिक अवसर बढ़ेंगे, क्षेत्रीय दलों की बनी रहेगी प्रासंगिकता
सरकार का निष्कर्ष कहता है कि एक साथ चुनाव राजनीतिक दलों के लिए अवसर बढ़ाने वाले साबित होंगे और जिम्मेदारियों को भी न्यायोचित तरीके से बांटा जा सकेगा। इससे विभिन्न दलों का प्रतिनिधित्व करने वाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच विविधता और समावेशिता की अधिक गुंजाइश होती है। बयान में यह भी कहा गया कि यह व्यवस्था क्षेत्रीय दलों की भूमिका को कम नहीं करेगा। बल्कि स्थानीय स्तर पर अधिक केंद्रित भूमिका को प्रोत्साहित कर उनकी प्रासंगिकता को बरकरार रखेगा। यह व्यवस्था एक ऐसा राजनीतिक माहौल बनाती है जिसमें स्थानीय मुद्दे राष्ट्रीय चुनाव अभियानों से प्रभावित नहीं होते, इस प्रकार क्षेत्रीय मुद्दों को उठाने वालों की प्रासंगिकता बनी रहती है।

 संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित होगा
बड़ी संख्या में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी मूल जिम्मेदारियों से हटाकर चुनाव ड्यूटी में लगाना संसाधनों के इस्तेमाल के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। बार-बार तैनाती की जरूरत न रहने से संसाधनों का उचित इस्तेमाल हो सकेगा। यह व्यवस्था हर चुनाव के दौरान मानव-शक्ति, उपकरणों और सुरक्षा संबंधी संसाधनों की तैनाती से संबंधित व्यय भी घटाएगी।


80 फीसदी जनता प्रस्ताव के पक्ष में
सरकार ने बताया कि उच्च स्तरीय समिति को जनता की तरफ से 21,500 से अधिक प्रतिक्रियाएं मिलीं, जिनमें 80 फीसदी ने एक साथ चुनाव का समर्थन किया। इसमें सबसे अधिक प्रतिक्रियाएं तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, पश्चिम बंगाल, गुजरात और उत्तर प्रदेश से आई थीं। समिति के समक्ष 47 राजनीतिक दलों ने इस विषय पर अपने विचार रखे। इनमें 32 ने संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग और सामाजिक सद्भाव जैसे लाभों का हवाला देते हुए एक साथ चुनाव कराने का समर्थन किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed