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एक करोड़ लोगों ने छोड़ी एलपीजी सब्सिडी, 2,000 करोड़ रुपये की होगी बचत
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 22 Apr 2016 05:12 AM IST
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स्वेच्छा से घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सब्सिडी छोड़ने वालों की संख्या 1 करोड़ से ज्यादा हो गई है। वर्तमान सब्सिडी स्तर पर जोड़ा जाए तो इससे सरकार को हर वर्ष करीब 2,000 करोड़ रुपये की बचत होगी। इस राशि का इस्तेमाल गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले (बीपीएल) परिवार को एलपीजी कनेक्शन देने में होगा।
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एलपीजी सब्सिडी छोड़ने के लिए ग्राहकों को प्रेरित करने वाले अभियान गिव इट अप की वेबसाइट के मुताबिक बृहस्पतिवार को दोपहर बाद सब्सिडी छोड़ने वाले ग्राहकों की संख्या 1,00,06,303 हो गई।
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पेट्रोलियम मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इस कार्यक्रम में अधिकतर मध्य वर्ग के लोगों ने सब्सिडी छोड़ी है। इसमें सबसे अधिक, 40 फीसदी ग्राहक इंडियन ऑयल के हैं जबकि भारत पेट्रोलियम एवं हिंदुस्तान पेट्रोलियम के ग्राहक तीस-तीस फीसदी हैं।
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इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में भी इसका जिक्र किया था। फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन भी इस अभियान का हिस्सा बने।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने सब्सिडी छोड़ने वाले ग्राहकों पर एक सैम्पल सर्वे कराया था, जिससे पता चला था कि 10 लाख रुपये से अधिक आमदनी वाले महज तीन फीसदी ग्राहकों ने ही गिव इट अप में भाग लिया। इस साल एक जनवरी से सरकार ने दस लाख रुपये से अधिक सालाना आमदनी वाले ग्राहकों की गैस सब्सिडी बंद करने का फैसला किया है।
इस मद में बची राशि का उपयोग प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी कनेक्शन देने में होगा। इसी वर्ष बजट में इस योजना की घोषणा हुई है। इसके तहत तीन साल में 5 करोेड़ गरीब महिलाओं केनाम रसोई गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा। चालू वर्ष केलिए 2,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं जिनमें 1.5 करोड़ महिलाओं को कनेक्शन दिलाया जाएगा।
देखा जाए तो एलपीजी में सब्सिडी छोड़ने की योजना तो वर्ष 2012 से ही चल रही है लेकिन मार्च 2015 में पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा गिव इट अप कार्यक्रम चलाने के बाद इसमें तेजी आई। इसमें एक समय तो हर रोज 30 से 40 हजार ग्राहक रोज सब्सिडी छोड़ रहे थे।