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एक देश-एक चुनाव: JPC की पहली बैठक में तीखी नोंकझोंक, सदस्यों को सौंपी गई 18000 पन्नों की रिपोर्ट; जानें सबकुछ

Wed, 08 Jan 2025 11:08 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 08 Jan 2025 11:08 PM IST
सार

One Country One Election: लोकसभा और विधानसभाओं के एक साथ चुनाव कराने के प्रस्ताव पर जेपीसी पहली बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। भाजपा ने इसे राष्ट्रहित में बताया, जबकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे असंवैधानिक और अव्यावहारिक बताया। समिति की अगली बैठक इस महीने होगी, जिसमें और राय ली जाएगी।

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One country one election: squabble in first JPC meeting, 18000 pages report submitted members; Know everything
एक राष्ट्र एक चुनाव - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

देश में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के प्रावधान वाले दो विधेयकों पर विचार के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की पहली बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। सत्तारूढ़ राजग के सदस्यों ने जहां विधेयकों की सराहना की और इसे राष्ट्रहित में बताया। वहीं, कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने विधेयकों के औचित्य पर ही सवाल उठाए और इसे असांविधानिक बताया।

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एक देश, एक चुनाव से संबंधित दोनों विधेयकों पर विचार के लिए भाजपा सांसद पीसी चौधरी की अध्यक्षता में 39 संयुक्त सदस्यीय समिति गठित की गई है। पहली बैठक में समिति के सभी सदस्यों को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की अध्यक्षता वाली कमेटी की रिपोर्ट सौंपी गई। इस 18 हजार से अधिक पन्नों वाली रिपोर्ट नीले रंग के बड़े सूटकेस में प्रत्येक सदस्यों को दी गई। बैठक की शुरुआत में ही कानून मंत्रालय ने दोनों विधेयकों के प्रावधानों के संदर्भ में विस्तृत प्रजेंटेशन दिया।
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बैठक में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने दोनों विधेयकों के औचित्य पर सवाल उठाए और इन्हें अलोकतांत्रिक और अव्यावहारिक बताया। उन्होंने कहा कि इसका आर्थिक और व्यावहारिक पक्ष भी देखा जाना चाहिए। यह भी पता होना चाहिए कि एक साथ चुनाव कराने के लिए कितने ईवीएम लगेंगे, कितने कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी, इस पर कितना खर्च आएगा? टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने दोनों विधेयकों का विरोध करते हुए इसे संविधान के मूल ढांचे और लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताया। आप के संजय सिंह ने भी इन विधेयकों का विरोध किया। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि इस प्रस्ताव के लागू होने से कई राज्य की विधानसभा को समय से पहले भंग करना होगा जो सांविधानिक मूल्यों का उल्लंघन होगा।
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भाजपा के सांसद संजय जायसवाल ने विधेयक को संविधान के खिलाफ बताने के विपक्ष के आरोपों का प्रतिकार किया। उन्होंने कहा कि 1957 में लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव कराने के लिए सात राज्यों की विधानसभाओं को कार्यकाल पूरा होने से पहले ही भंग कर दिया गया था। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से पूछा कि क्या तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, जो संविधान सभा के अध्यक्ष भी थे, और नेहरू सरकार में शामिल अन्य प्रतिष्ठित कानून निर्माताओं ने संविधान का उल्लंघन किया था। भाजपा के ही सांसद वीडी शर्मा ने कहा कि एक साथ चुनाव का विचार लोकप्रिय जनभावना को दर्शाता है। इसके अलावा, राजद के घटक दल जदयू के संजय झा और शिवसेना के श्रीकांत शिंदे ने विधेयकों का समर्थन करते हुए एक साथ चुनाव कराने की अवधारणा का समर्थन किया।


इस महीने होगी एक और बैठक
लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के प्रावधान वाले संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और उससे जुड़े संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2024 पर विचार के लिए जेपीसी का गठन किया गया है। इसमें लोकसभा के 27 और राज्यसभा के 12 सदस्य हैं। समिति की इसी महीने एक और बैठक होने की संभावना है। समिति से जुड़े सूत्रों ने बताया कि योजना बजट सत्र से पहले एक और बैठक बुलाने की है। दूसरी बैठक से विमर्श और राय जानने का सिलसिला शुरू कर दिया जाएगा। समिति की योजना देश भर में बैठकें आयोजित कर सभी पक्षों प्रबुद्ध लोगों की राय जानने की है।

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