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होम क्वारंटीन की अवधि पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, इसे केवल 14 दिनों तक सीमित नहीं किया जा सकता
Wed, 13 May 2020 01:15 AM IST
श्रीधर मिश्रा
नेशनल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
नेशनल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रीधर मिश्रा
Updated Wed, 13 May 2020 01:15 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : PTI
घर में क्वारंटीन रहने की अवधि को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि इसकी अवधि को सीमित नहीं किया जा सकता है। दरअसल अक्सर आप सुनते हैं कि 14 दिनों के लिए किसी भी व्यक्ति को घर में क्वारंटीन किया गया है। इस 14 दिन की अवधि को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि घर पर क्वारंटीन में रहने की अवधि केवल अनिवार्य 14 तक सीमित नहीं की जा सकती। कोर्ट का कहना था कि वायरस से संक्रमित किसी व्यक्ति में लक्षण सामने आने में लगने वाले समय को लेकर कोई निश्चितता नहीं है।
न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने इस दौरान कहा कि जब दुनियाभर को कोरोना वायरस ने हैरान और परेशान कर रखा है तो यहां प्रशासन ‘‘अज्ञात क्षेत्र से गुजर रहा है।’’ कोर्ट ने कहा कि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए प्रशासन को नीति तैयार करने और उसे लागू करने की जरूरी स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।
अदालत ने घर में केवल 14 दिनों के लिए क्वारंटीन रहने पर असहमति जताते हुए कहा कि इस पृष्ठभूमि में यह अदालत इसका समर्थन करने के लिए तैयार नहीं। कोर्ट ने कहा कि हर मामले में घर पर क्वारंटीन रहने की अवधि को केवल 14 दिन के लिए सीमित या उससे अधिक न बढ़ाने का वह समर्थन नहीं करती है।
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हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को 14 दिन से अधिक समय के लिए क्वारंटीन में रखा जाता है, जिसमें कोविड-19 के कोई लक्षण नहीं हैं तो वह इसके खिलाफ प्राधिकारियों के सामने अपनी बात रख सकता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में फिर प्राधिकारियों को इसके लिए कारण बताने होंगे या पाबंदी हटानी होगी।
यह आदेश फोटो पत्रकार अमित भार्गव की एक अर्जी पर आया। भार्गव को 24-25 मार्च की आधीरात से क्वारंटीन किया गया जब वह पिज्जा पहुंचाने वाले व्यक्ति के सम्पर्क में आये थे। भार्गव को इस दौरान 28 अप्रैल तक क्वारंटीन में रखा गया। यानी उन्हें इस दौरान 30 दिन से भी अधिक समय के लिए क्वारंटीन किया गया, जबकि 14 दिन क्वारंटीन रखना निर्धारित है।
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न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने इस दौरान कहा कि जब दुनियाभर को कोरोना वायरस ने हैरान और परेशान कर रखा है तो यहां प्रशासन ‘‘अज्ञात क्षेत्र से गुजर रहा है।’’ कोर्ट ने कहा कि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए प्रशासन को नीति तैयार करने और उसे लागू करने की जरूरी स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।
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अदालत ने घर में केवल 14 दिनों के लिए क्वारंटीन रहने पर असहमति जताते हुए कहा कि इस पृष्ठभूमि में यह अदालत इसका समर्थन करने के लिए तैयार नहीं। कोर्ट ने कहा कि हर मामले में घर पर क्वारंटीन रहने की अवधि को केवल 14 दिन के लिए सीमित या उससे अधिक न बढ़ाने का वह समर्थन नहीं करती है।
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हालांकि, कोर्ट ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को 14 दिन से अधिक समय के लिए क्वारंटीन में रखा जाता है, जिसमें कोविड-19 के कोई लक्षण नहीं हैं तो वह इसके खिलाफ प्राधिकारियों के सामने अपनी बात रख सकता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में फिर प्राधिकारियों को इसके लिए कारण बताने होंगे या पाबंदी हटानी होगी।
यह आदेश फोटो पत्रकार अमित भार्गव की एक अर्जी पर आया। भार्गव को 24-25 मार्च की आधीरात से क्वारंटीन किया गया जब वह पिज्जा पहुंचाने वाले व्यक्ति के सम्पर्क में आये थे। भार्गव को इस दौरान 28 अप्रैल तक क्वारंटीन में रखा गया। यानी उन्हें इस दौरान 30 दिन से भी अधिक समय के लिए क्वारंटीन किया गया, जबकि 14 दिन क्वारंटीन रखना निर्धारित है।