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सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट की गिनती को लेकर विपक्षी पार्टियों को दिया 8 अप्रैल तक का समय

Mon, 01 Apr 2019 11:12 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 01 Apr 2019 11:12 AM IST
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on matching 50 percent VVPAT Supreme Court grants time to opposition parties
फाइल फोटो

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को विपक्षी दलों के 21 नेताओं से कहा कि वे लोकसभा चुनाव में वीवीपैट पर्चियों की गिनती के संबंध में निर्वाचन आयोग के हलफनामे पर अपना जवाब एक सप्ताह के भीतर दाखिल करें।

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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में विपक्षी दलों के नेताओं ने मांग की है कि लोकसभा चुनाव के दौरान प्रत्येक सीट से कम से कम 50 प्रतिशत ईवीएम की वीवीपैट पर्चियों की जांच की जानी चाहिए। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पीठ ने विपक्ष के नेताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ए. एम. सिंघवी से कहा कि वह अगले सोमवार तक इस संबंध में जवाब दाखिल करें।
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निर्वाचन आयोग ने पिछले शुक्रवार को इस याचिका को रद्द करने का अनुरोध किया था। आयोग ने अपने हलफनामे में कहा है कि विपक्ष के नेता वीवीपैट पर्चियों की गिनती के मौजूदा तरीके को बदलने का कोई ठोस कारण नहीं बता सके हैं। फिलहाल प्रत्येक सीट के एक मतदान केंद्र पर वीवीपैट पर्चियों की क्रम रहित (रैंडम) गिनती की जाती है।
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इस मामले पर 25 मार्च को सुनवाई थी। सुनवाई में न्यायालय ने चुनाव आयोग को 28 मार्च तक यह बताने का निर्देश दिया था कि क्या वह आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए मौजूदा समय में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में किए जाने वाले वीवीपैट के नमूना सर्वेक्षण की संख्या बढ़ाकर एक से ज्यादा कर सकता है या नहीं।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने आयोग से कहा था कि वह 28 मार्च को अपराह्न चार बजे तक इस संबंध में जवाब दें। पीठ ने आयोग को यह बताने का भी निर्देश दिया था कि क्या मतदाताओं की संतुष्टि के लिए वोटर वैरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

पीठ ने संकेत दिया था कि वह चाहती है कि वीवीपैट की संख्या बढ़ाई जाए। उसने कहा कि यह आशंकाएं पैदा करने का सवाल नहीं है बल्कि यह ‘संतुष्टि’ का मामला है। पीठ ने इस निर्देश के साथ ही आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में 21 विपक्षी नेताओं की याचिका पर सुनवाई एक अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी थी।

 

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