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Old Pension: पुरानी पेंशन देने का एलान कर रहे राज्यों के सामने आई ये अड़चन, इसमें भी चलेगी केंद्र की मर्जी

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 13 Dec 2022 10:53 PM IST
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सार
Old Pension: भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ के महासचिव मुकेश कुमार बताते हैं, एनपीएस का पैसा तो केंद्र सरकार के नियंत्रण में है। दूसरी तरफ कई राज्यों ने अपने कर्मियों को ओपीएस का लाभ देने की घोषणा कर दी। अब यह सवाल उठना है कि कर्मियों का एनपीएस में जमा पैसा, जो केंद्र के नियंत्रण में है, वह वापस कैसे आएगा...
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Old Pension scheme has many hurdles, still ball in court of central government
Old Pension Scheme - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

केंद्र सरकार ने पुरानी पेंशन व्यवस्था 'ओपीएस' को लागू करने से साफ मना कर दिया है। दूसरी ओर, गैर-भाजपाई सरकार वाले राज्यों में इसे लागू किया जा रहा है। हालांकि इसमें एक अड़चन आ गई है। विभिन्न राज्यों में 'एनपीएस' वाले कर्मियों का पैसा 'पेंशन फंड एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी' (पीएफआरडीए) के पास जमा है। पीएफआरडीए पर केंद्र सरकार का नियंत्रण होता है। भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ के महासचिव और रक्षा मंत्रालय की जेसीएम-2 लेवल काउंसिल के सदस्य मुकेश सिंह ने कहा, ये पैसा राज्य सरकारों को मिल जाए, इसके लिए केंद्र सरकार को पीएफआरडीए एक्ट में संशोधन करना पड़ेगा। मौजूदा परिस्थितियों में केंद्र सरकार, ऐसे किसी बदलाव के मूड में नजर नहीं आ रही।

केंद्र की सहमति के बिना आसान नहीं ये 'तोड़'

गैर-भाजपाई सरकारें, जिनमें कांग्रेस एवं आप सरकार शामिल हैं, वहां पर एनपीएस को खत्म कर पुरानी पेंशन व्यवस्था को दोबारा से लागू किया जा रहा है। इन सरकारों ने चुनाव से पहले 'ओपीएस' को लागू करने का वादा किया था। छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब, झारखंड और हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मियों को ओपीएस लागू करने का भरोसा दिलाया गया था। झारखंड में सरकारी कर्मियों को पुरानी पेंशन और एनपीएस, में से किसी एक व्यवस्था को चुनने का विकल्प दिया गया है। इस बात से राज्य सरकारें वाकिफ हैं कि एनपीएस से उनके कर्मियों का पैसा निकलना आसान बात नहीं है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान सरकार ने पीएफआरडीए से पैसा वापस लेने के लिए फाइल चलाई थी, लेकिन उसमें सफलता नहीं मिल सकी। छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मियों ने पीएफआरडीए में 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा कराई है। इस राशि की वापसी के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पीएम मोदी को पत्र लिख चुके हैं। राज्य सरकार ने पहली मई से एनपीएस में जमा होने वाली कर्मियों के हिस्से की राशि लेनी बंद कर दी है। ओपीएस लागू करने वाले राज्य इसी कानूनी अड़चन का तोड़ निकालने में लगे हैं। यह तोड़ बिना केंद्र की सहमति के संभव नहीं दिखता।

केंद्र को पीएफआरडीए एक्ट में करना पड़ेगा संशोधन

भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ के महासचिव मुकेश कुमार बताते हैं, एनपीएस का पैसा तो केंद्र सरकार के नियंत्रण में है। दूसरी तरफ कई राज्यों ने अपने कर्मियों को ओपीएस का लाभ देने की घोषणा कर दी। अब यह सवाल उठना है कि कर्मियों का एनपीएस में जमा पैसा, जो केंद्र के नियंत्रण में है, वह वापस कैसे आएगा। अगर वह पैसा वापस नहीं आता है, तो राज्य सरकार के खजाने पर इसका अतिरिक्त भार पड़ेगा। सरकारी खाते में उस पैसे का डिस्पोजल क्या होगा, यह एक अहम सवाल है। एनपीएस में जमा पैसा तो मार्केट में लगा है, उसे कैसे वापस लाएंगे, इसका कोई मेकेनिज्म तो बनाना ही पड़ेगा। केंद्र सरकार एनपीएस का पैसा दे सकती है, बशर्ते कि इसके लिए पीएफआरडीए एक्ट में संशोधन करना पड़ेगा। इस बाबत केंद्र सरकार को तैयार रहना चाहिए। वजह, आने वाले समय में कई दूसरे राज्यों में भी 'ओपीएस' लागू हो सकता है। जब 'कर्मचारी और नियोक्ता' दोनों ही एनपीएस से बाहर निकलना चाहते हैं, तो केंद्र सरकार उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकती। हमें तो बेहतर स्कीम का विकल्प मिल रहा है, 'कर्मचारी और नियोक्ता' केंद्र सरकार से ऐसा कह सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का देंगे हवाला

केंद्र सरकार को एनपीएस का पैसा वापस लौटाना होगा। 2024 तक बहुत सी परिस्थितियां बदल सकती हैं। केंद्र सरकार के कर्मचारी संगठन भी ओपीएस के लिए लामबंद हो रहे हैं। सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। लोकसभा चुनाव से पहले ऐसी स्थिति आ सकती है, जिसमें केंद्र को पुरानी पेंशन लागू करने के लिए राजी होना पड़े। बतौर मुकेश कुमार, भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ इस मामले में राज्य सरकारों की मदद करेगा। पहली जनवरी 2004 के बाद सरकारी सेवा में आए कर्मी, जो एनपीएस का हिस्सा हैं, उनकी रिटायरमेंट कई साल बाद शुरू होगी। तब तक किसी न किसी माध्यम से यह मामला सुलझा लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने चार वर्ष पहले अपने एक फैसले में कहा था कि ऐसे कर्मचारी, जिनकी भर्ती प्रक्रिया एक जनवरी से 2004 से पहले पूरी हो चुकी थी और उनकी नियुक्ति पहली जनवरी 2004 के बाद हुई है, उन सभी कर्मचारियों को 'ओपीएस' का लाभ मिलेगा। उस केस में भी एनपीएस वाले कर्मियों का पैसा, दोबारा से जीपीएफ में जमा हुआ है। उसमें भी तो पीएफआरडीए को इजाजत दी गई है। इसी तरह से अब कोई न कोई सार्थक समाधान निकाला जाएगा।

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