फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Officers body expresses deep dismay at Bihar govt decision to allow Anand Mohan to walk free

Anand Mohan: आनंद मोहन को रिहा करने के बिहार सरकार के फैसले पर IAS लॉबी नाराज, CM नीतीश से पुनर्विचार को कहा

Tue, 25 Apr 2023 10:42 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 25 Apr 2023 10:42 PM IST
सार

10 अप्रैल को बिहार सरकार ने बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम 481 (I) (क) बदलाव किया था। इसके बाद आनंद मोहन की रिहाई का रास्ता साफ हो गया था।

विज्ञापन
Officers body expresses deep dismay at Bihar govt decision to allow Anand Mohan to walk free
आनंद मोहन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आईएएस अधिकारी की हत्या के लिए दोषी पूर्व सांसद आनंद मोहन को रिहा करने के बिहार सरकार के फैसले की आलोचना की है। इंडियन सिविल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (सेंट्रल) एसोसिएशन ने सोमवार को इस बाबत एक बयान भी जारी किया। इसमें एसोसिएशन ने बिहार सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए कहा कि यह न्याय से इनकार करने के समान है। 

विज्ञापन


इंडियन सिविल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (सेंट्रल) एसोसिएशन के बयान में कहा गया है कि केंद्रीय आईएएस एसोसिएशन गोपालगंज के पूर्व जिलाधिकारी जी कृष्णैया की नृशंस हत्या के दोषियों को रिहा करने के बिहार सरकार के फैसले पर गहरी निराशा व्यक्त करता है। 
विज्ञापन


इसमें जोर देकर कहा गया है कि ड्यूटी पर एक लोक सेवक की हत्या के आरोप में दोषी करार दिए गए व्यक्ति को कम जघन्य श्रेणी में फिर से वर्गीकृत नहीं किया जा सकता है। जेल नियमावली के मौजूदा वर्गीकरण में संशोधन करना, जोकि एक लोक सेवक के सजायाफ्ता हत्यारे को रिहा करने की ओर ले जाता है, न्याय से दूर करने के समान है। इससे, लोक सेवकों के मनोबल में गिरावट आती है और सार्वजनिक व्यवस्था कमजोर होती है। साथ ही न्याय के प्रशासन का मजाक बनता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


सरकार कर्मचारी की हत्या वाले वाक्यांश विलोपित
दरअसल, 10 अप्रैल को बिहार सरकार ने बिहार कारा हस्तक, 2012 के नियम 481 (I) (क) बदलाव किया था। इसके बाद आनंद मोहन की रिहाई का रास्ता साफ हो गया था। दरअसल, बिहार सरकार कारा हस्तक से उस वाक्यांश को ही विलोपित कर दिया था जिसमें सरकार कर्मचारी की हत्या का जिक्र था। बिहार सरकार ने कारा अधिनियम 1894  की धारा 59 एवं दंड प्रक्रिया संहिता 1973 (1974 का 2) की धारा 432 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिहार कारा हस्तक 2012 में अधिसूचना निर्गत होने की तिथि से यह संशोधन किया था। आनंद मोहन गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी कृष्णैया की हत्या के आरोप अपनी सजा पूरी कर चुके हैं। 


गौरतलब है कि आईएएस अधिकारी कृष्णैया की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन को 26 अन्य लोगों के साथ रिहा किया गया है। वे 14 साल से अधिक समय से राज्य की विभिन्न जेलों में बंद हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed