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Odisha: आदिवासियों ने UAPA मामलों को वापस लेने की मांग की, कहा- पुलिस लोगों की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही

Sun, 13 Aug 2023 04:59 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, भुवनेश्वर।
पीटीआई, भुवनेश्वर। Published by: देव कश्यप Updated Sun, 13 Aug 2023 04:59 PM IST
सार

एनएसएस नेता लिंगराज आजाद ने शनिवार को यूएपीए के प्रावधान के तहत आदिवासी निकाय के नौ सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए राज्य सरकार और रायगडा जिला पुलिस की आलोचना की।

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Odisha tribals demand withdrawal of UAPA cases slapped against them for holding protests
एनएसएस नेता लिंगराज आजाद (फाइल फोटो)। - फोटो : Wikipedia

विस्तार

एक दशक से अधिक समय से ओडिशा के कालाहांडी और रायगडा जिलों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशील नियमगिरि पहाड़ियों में बॉक्साइट खनन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे एक आदिवासी निकाय ने अपने सदस्यों के खिलाफ यूएपीए मामलों को तत्काल वापस लेने की मांग की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह मांग कथित तौर पर वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का विरोध करने के लिए नियमगिरि सुरक्षा समिति (एनएसएस) के नौ सदस्यों के खिलाफ सख्त गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत आरोप तय करने के बाद की गई है।

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एक संवाददाता सम्मेलन में एनएसएस नेता लिंगराज आजाद ने शनिवार को यूएपीए के प्रावधान के तहत आदिवासी निकाय के नौ सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए राज्य सरकार और रायगडा जिला पुलिस की आलोचना की। आजाद ने दावा किया कि पुरुषों और महिलाओं के एक समूह ने छह अगस्त को कल्याणसिंहपुर पुलिस स्टेशन के सामने प्रदर्शन किया था, जिसमें दो ग्रामीणों का पता मांगा गया था, जिन्हें कथित तौर पर पुलिसकर्मियों ने लांजीगढ़ हाट से उठाया था।
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उन्होंने दावा किया, शुरुआत में पुलिस ने दोनों का पता नहीं बताया। बाद में एक ग्रामीण पर 2018 में हुए दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया और दूसरे को रिहा कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार कालाहांडी और रायगडा के पर्यावरण-नाजुक क्षेत्रों में बॉक्साइट खनन के खिलाफ स्थानीय लोगों की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। आजाद ने कहा, पुलिस ने यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत हमारे निकाय के नौ सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की, इसमें मेरा नाम भी शामिल है, जबकि मैं छह अगस्त को प्रदर्शन स्थल पर मौजूद नहीं था। उन्होंने अचानक आरोप तय कर दिए।
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कल्याणसिंहपुर पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक सुमति मोहंती ने कहा, एफआईआर में उल्लेख किया गया है कि लाठी और हथियारों से लैस लगभग 200 लोगों ने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का विरोध करने के लिए परसाली गांव में एक जुलूस का आयोजन किया था।


आजाद ने आगे कहा, यह पुलिस द्वारा स्थानीय लोगों, विशेषकर नियमगिरि के डोंगरिया कोंध समुदाय की आवाज को दबाने का एक और प्रयास है, जो बॉक्साइट खनन का विरोध कर रहे हैं।

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