श्री जगन्नाथ मंदिर: स्थानांतरित नहीं की जा सकी आंतरिक रत्न भंडार की सामग्री; इसके लिए फिर से दिन तय किया जाएगा
रत्न भंडार फिर से खोल दिया गया है, लेकिन मूल्यवान वस्तुओं की सूची तत्काल नहीं बनाई जाएगी। रत्न भंडार के आंतरिक और बाहरी कक्षों में रखे गए आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुओं को लकड़ी के संदूकों में बंद कर अस्थायी सुरक्षित कमरे में रखा जाएगा। सूची तैयार करने का काम मूल्यांकनकर्ताओं, सुनारों और अन्य विशेषज्ञों को नियुक्त किए जाने पर सरकार की मंजूरी मिलने के बाद किया जाएगा।
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ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF) की टीम पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर से रत्न भंडार खोलने की प्रक्रिया में शामिल अपने उपकरणों के साथ बाहर आई। पुरी में श्री जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार आज 46 साल बाद फिर से खोला गया है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के प्रमुख अरबिंद पाधी ने बताया कि बाहरी रत्न भंडार के सभी आभूषणों को स्थानांतरित कर दिया गया है। आंतरिक रत्न भंडार को ताले तोड़कर खोला गया। वहां से मिली सामग्री अलमारियों और संदूकों में है। चूंकि आंतरिक रत्न भंडार की सामग्री को स्थानांतरित नहीं किया जा सका और समय खत्म गया, इसलिए हमने निर्णय लिया है कि इस प्रक्रिया के लिए एक और दिन तय किया जाएगा।
#WATCH | Puri, Odisha: Odisha Disaster Rapid Action Force (ODRAF) team comes out from the Sri Jagannath Temple premises with their equipment involved in the opening process of the Ratna Bhandar.
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Ratna Bhandar of Sri Jagannath Temple in Puri re-opened today after 46 years. pic.twitter.com/SDHObq1rZS — ANI (@ANI) July 14, 2024
दरअसल, ओडिशा के पुरी में स्थित 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर का ‘रत्न भंडार’ 46 साल बाद रविवार दोपहर को फिर से खोला गया। आभूषणों, कीमती वस्तुओं की सूची बनाने और भंडार गृह की मरम्मत करने के लिए रत्न भंडार को खोला गया है। इसके पहले 1978 में इसे खोला गया था। राज्य सरकार की ओर से गठित समिति के सदस्यों ने दोपहर करीब 12 बजे मंदिर में प्रवेश किया और अनुष्ठान करने के बाद रत्न भंडार फिर से खोला गया।
चुनाव में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा था
ओडिशा में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में रत्न भंडार को फिर से खोलना एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा था। भाजपा ने तत्कालीन सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) पर इसकी खोई हुई चाबियों को लेकर निशाना साधा था। पार्टी ने लोगों से वादा किया था कि अगर वह चुनाव जीतती है तो रत्न भंडार को फिर से खोलने का प्रयास करेगी।
सीएम कार्यालय ने क्या कहा?
ओडिशा के मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, 'भगवान जगन्नाथ की इच्छा पर उड़िया समुदाय ने उड़िया अस्मिता की पहचान के साथ आगे बढ़ने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। आपकी इच्छा पर ही जगन्नाथ मंदिर के चारों द्वार खोले गए थे। आज आपकी इच्छा पर ही 46 साल बाद रत्न भंडार को एक बड़े उद्देश्य के लिए दोपहर एक बजकर 28 मिनट पर शुभ घड़ी पर खोला गया।
रत्न भंडार को खोलने में कितने लोग लगे?
रत्न भंडार को खोलते समय 11 लोग मौजूद थे, जिसमें उड़ीसा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश विश्वनाथ रथ, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाधी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीक्षक डीबी गड़नायक और पुरी के नाममात्र राजा 'गजपति महाराजा' के एक प्रतिनिधि शामिल थे।
रत्न भंडार खोलने के बाद क्या-क्या होगा?
मंदिर में प्रवेश करने से पहले पाधी ने कहा कि रत्न भंडार फिर से खोल दिया गया है, लेकिन मूल्यवान वस्तुओं की सूची तत्काल नहीं बनाई जाएगी। रत्न भंडार के आंतरिक और बाहरी कक्षों में रखे गए आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुओं को लकड़ी के संदूकों में बंद कर अस्थायी सुरक्षित कमरे में रखा जाएगा। सूची तैयार करने का काम मूल्यांकनकर्ताओं, सुनारों और अन्य विशेषज्ञों को नियुक्त किए जाने पर सरकार की मंजूरी मिलने के बाद किया जाएगा। हमारी पहली प्राथमिकता रत्न भंडार की मरम्मत करना है। मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद कीमती सामान वापस लाया जाएगा और फिर सूची तैयार की जाएगी।