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OBC: 'मराठा आरक्षण से समस्या नहीं, ओबीसी पर न हो प्रभाव', दो कार्यकर्ताओं का अनशन खत्म करने से इनकार
Mon, 17 Jun 2024 03:55 PM IST
मेघा झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा झा
Updated Mon, 17 Jun 2024 03:55 PM IST
सार
ओबीसी के दो कार्यकर्ता महाराष्ट्र के जालना में अनशन पर बैठ गए हैं, उनकी मांग है कि मराठा आरक्षण के चलते उनका ओबीसी आरक्षण प्रभावित नहीं होना चाहिए। वहीं सरकार की एक टीम इस अनशन को समाप्त करने पहुंची, लेकिन दोनों ने इससे मना कर दिया।
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विस्तार
सोमवार को ओबीसी कार्यकर्ता जो अनशन पर बैठे हैं, उन्होंने इसे समाप्त करने से इंकार कर दिया है। अनशन पर बैठे कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे मराठों आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं। एक सरकारी मंडल भी ओबीसी कार्यकर्ताओं से बातचीत करने पहुंचा। लेकिन प्रदर्शनकारियों ने अनशन समाप्त करने से इंकार कर दिया।
दो अन्य पिछड़ा वर्ग कार्यकर्ता लक्ष्मण हेक और नवनाथ वामघारे पिछले पांच दिनों से अंतरवाली सारथी गांव के पास स्थित वाडीगोदरी गांव में अनशन पर बैठे हैं। बता दें कि ओबीसी श्रेणी के तहत मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग के लिए मनोज जरांगे भी अनशन पर बैठे थे। महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य लक्ष्मण हेक और ओबीसी के कल्याण के लिए काम करने वाले संगठन समता परिषद जालना के अध्यक्ष नवनाथ वामघारे अनशन पर बैठे हैं।
आंदोलनकारियों का कहना है कि वे मराठों के लिए आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इससे ओबीसी आरक्षण पर संकट नहीं आनी चाहिए। ओबीसी कार्यकर्ता सरकार की मसौदा अधिसूचना को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। जिसमें कुनबी को मराठा समुदाय के सदस्यों के "ऋषि सोयारे" (रक्त संबंधी) के रूप में मान्यता दी गई है। ओबीसी समुदाय के एक नेता ने चेतावनी दी कि अगर सरकार के कार्यों से उनके आरक्षण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है तो वे पूरे राज्य में अनशन करेंगे।
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सोमवार को, एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने ओबीसी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। उनसे अपना अनशन समाप्त करने का आग्रह किया, लेकिन कार्यकर्ताओं ने इनकार कर दिया। महाराष्ट्र के मंत्री अतुल सावे, राज्यसभा सदस्य डॉ. भागवत कराड और शिवसेना सांसद संदीपन भूमरे के एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर अनशन समाप्त करने, पानी पीने का अनुरोध किया। उन्होंने इनकार कर दिया। आंदोलनकारियों ने सरकार से लिखित आश्वासन मांगा कि मराठा आरक्षण से ओबीसी कोटा प्रभावित नहीं होगा।
सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने आश्वासन दिया कि मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में उनकी मांगों पर चर्चा की जाएगी। कराड ने हेक और वाघमारे के बिगड़ते स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त की और उनसे गुर्दे की अपरिवर्तनीय क्षति को रोकने के लिए पानी पीने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "एक डॉक्टर होने के नाते, मैं आपसे पानी पीने का अनुरोध करता हूं।" हालांकि, कार्यकर्ताओं ने अनुरोध पर ध्यान देने से इनकार कर दिया। एक लक्ष्मण हेक ने कहा, "जब तक सरकार लिखित आश्वासन नहीं देती, हम अनशन समाप्त नहीं करेंगे।" उन्होंने दावा किया कि सरकार ओबीसी कोटा मुद्दे की उपेक्षा कर रही है। "हम मराठों के लिए आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इससे ओबीसी कोटा प्रभावित नहीं होना चाहिए।"
हेक ने दावा किया कि वह और वाघमारे पिछले पांच दिनों से अनशन पर बैठे हैं और सरकार की "उदासीनता" के बाद रविवार से उन्होंने पानी पीना बंद कर दिया है। रविवार को भाजपा के पूर्व विधायक और ओबीसी नेता प्रकाश शेंडगे ने हेक से मुलाकात की और उन्हें समर्थन दिया। शेंडगे ने "सेज सोयारे" पर मसौदा अधिसूचना को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा, "सरकार ने मराठों को 10 प्रतिशत कोटा दिया है और अब जरांगे 'सेज सोयारे' (अधिसूचना) के तहत कुनबी प्रमाण पत्र मांग रहे हैं, जो हमें स्वीकार्य नहीं है।"
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दो अन्य पिछड़ा वर्ग कार्यकर्ता लक्ष्मण हेक और नवनाथ वामघारे पिछले पांच दिनों से अंतरवाली सारथी गांव के पास स्थित वाडीगोदरी गांव में अनशन पर बैठे हैं। बता दें कि ओबीसी श्रेणी के तहत मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग के लिए मनोज जरांगे भी अनशन पर बैठे थे। महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य लक्ष्मण हेक और ओबीसी के कल्याण के लिए काम करने वाले संगठन समता परिषद जालना के अध्यक्ष नवनाथ वामघारे अनशन पर बैठे हैं।
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आंदोलनकारियों का कहना है कि वे मराठों के लिए आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इससे ओबीसी आरक्षण पर संकट नहीं आनी चाहिए। ओबीसी कार्यकर्ता सरकार की मसौदा अधिसूचना को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। जिसमें कुनबी को मराठा समुदाय के सदस्यों के "ऋषि सोयारे" (रक्त संबंधी) के रूप में मान्यता दी गई है। ओबीसी समुदाय के एक नेता ने चेतावनी दी कि अगर सरकार के कार्यों से उनके आरक्षण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है तो वे पूरे राज्य में अनशन करेंगे।
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सोमवार को, एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने ओबीसी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। उनसे अपना अनशन समाप्त करने का आग्रह किया, लेकिन कार्यकर्ताओं ने इनकार कर दिया। महाराष्ट्र के मंत्री अतुल सावे, राज्यसभा सदस्य डॉ. भागवत कराड और शिवसेना सांसद संदीपन भूमरे के एक सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर अनशन समाप्त करने, पानी पीने का अनुरोध किया। उन्होंने इनकार कर दिया। आंदोलनकारियों ने सरकार से लिखित आश्वासन मांगा कि मराठा आरक्षण से ओबीसी कोटा प्रभावित नहीं होगा।
सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने आश्वासन दिया कि मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में उनकी मांगों पर चर्चा की जाएगी। कराड ने हेक और वाघमारे के बिगड़ते स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त की और उनसे गुर्दे की अपरिवर्तनीय क्षति को रोकने के लिए पानी पीने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "एक डॉक्टर होने के नाते, मैं आपसे पानी पीने का अनुरोध करता हूं।" हालांकि, कार्यकर्ताओं ने अनुरोध पर ध्यान देने से इनकार कर दिया। एक लक्ष्मण हेक ने कहा, "जब तक सरकार लिखित आश्वासन नहीं देती, हम अनशन समाप्त नहीं करेंगे।" उन्होंने दावा किया कि सरकार ओबीसी कोटा मुद्दे की उपेक्षा कर रही है। "हम मराठों के लिए आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इससे ओबीसी कोटा प्रभावित नहीं होना चाहिए।"
हेक ने दावा किया कि वह और वाघमारे पिछले पांच दिनों से अनशन पर बैठे हैं और सरकार की "उदासीनता" के बाद रविवार से उन्होंने पानी पीना बंद कर दिया है। रविवार को भाजपा के पूर्व विधायक और ओबीसी नेता प्रकाश शेंडगे ने हेक से मुलाकात की और उन्हें समर्थन दिया। शेंडगे ने "सेज सोयारे" पर मसौदा अधिसूचना को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा, "सरकार ने मराठों को 10 प्रतिशत कोटा दिया है और अब जरांगे 'सेज सोयारे' (अधिसूचना) के तहत कुनबी प्रमाण पत्र मांग रहे हैं, जो हमें स्वीकार्य नहीं है।"