Health: भारत में डिब्बाबंद खाने के लिए पोषण लेबल प्रणाली की जरूरत, सेहतमंद भोजन के विकल्पों में मिलेगी मदद
जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ के शोध के अनुसार, एफओपीएल कुछ देशों में अनिवार्य हैं और अन्य में निर्माताओं की ओर से स्वेच्छा से लागू किए जाते हैं। हालांकि, भारत में ऐसी कोई प्रणाली नहीं है। एफओपीएल भोजन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं, जिनका उपयोग उपभोक्ता विकल्प चुनने और खरीदारी संबंधी निर्णय लेने के लिए कर सकते हैं।
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डिब्बाबंद खानों पर फ्रंट ऑफ पैक पोषण लेबल (एफओपीएल) प्रणाली स्वस्थ भोजन विकल्पों को समझने और बढ़ावा देने में आसान है। डिब्बाबंद भोजन की गुणवत्ता को उजागर करने वाले विभिन्न प्रकार के एफओपीएल दुनिया के कई हिस्सों में उपयोग में हैं।
जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ के शोध के अनुसार, एफओपीएल कुछ देशों में अनिवार्य हैं और अन्य में निर्माताओं की ओर से स्वेच्छा से लागू किए जाते हैं। हालांकि, भारत में ऐसी कोई प्रणाली नहीं है। एफओपीएल भोजन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं, जिनका उपयोग उपभोक्ता विकल्प चुनने और खरीदारी संबंधी निर्णय लेने के लिए कर सकते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, एफओपीएल का उपयोग मृत्यु के खतरे तक को कम करता है और इसे विभिन्न आय समूहों में समान रूप से उपयोगी पाया गया है। हेल्थ स्टार रेटिंग, मल्टीपल ट्रैफिक लाइट्स, न्यूट्री-स्कोर और चेतावनी लेबल स्पष्ट जानकारी वाले एफओपीएल का मूल्यांकन करते हैं। यह न सिर्फ खाद्य उत्पादों की पोषण गुणवत्ता के बारे में स्पष्ट जानकारी देते हैं, बल्कि इनके जरिये पोषण सूचना पैनल में मौजूद अधिक जटिल जानकारी को तेजी और आसानी से समझा जा सकता है।
एफएसएसएआई कर रहा तैयारी
शोध के अनुसार, भारत में अभी तक कोई एफओपीएल प्रणाली नहीं है इसलिए वहां की आबादी के लिए स्वस्थ आहार को बढ़ावा देने के हिस्से के रूप में इसे लागू किया जा सकता है। इसके लागू हो जाने पर लोगों को डिब्बाबंद भोजन की गुणवत्ता की पूरी जानकारी मिलेगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) भारत में एफओपीएल प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रहा है।
पोषण बदलाव के लिए महत्वपूर्ण कदम
फूड क्वालिटी एंड प्रेफरन्स में प्रकाशित अध्ययन भारत की जरूरतों और प्राथमिकताओं को हल करता है। इसकी ओर से दी गई जानकारी भारतीय आबादी को बेहतर किराना और भोजन संबंधी विकल्प चुनने में मदद कर सकती है। यह भारत में जारी पोषण बदलाव और अस्वास्थ्यकर डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों के बढ़ते प्रचलन से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
दो रंग का लेबल पहली पसंद
जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ के शोधकर्ता डॉ. डी. प्रवीण के अनुसार विभिन्न भारतीय उपभोक्ताओं के साथ व्यापक परामर्श के माध्यम से हमारे अध्ययन ने निर्णायक रूप से दिखाया है कि ट्रैफिक लाइट प्रारूप का उपयोग करने वाला दो रंग का लेबल न केवल महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है बल्कि उपयोगी भी है। अध्ययन में बताया गया है कि अधिकतर उत्तरदाताओं की ओर से इसे व्यापक रूप से प्रभावी, उपयोगी और पसंद किए जाने योग्य माना गया। इन निष्कर्षों में फ्रंट ऑफ पैक लेबलिंग प्रणाली को लागू करने के चल रहे प्रयासों में भारत सरकार को मदद मिलेगी।