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17 साल पहले हुए हमले की सजा आज भी भुगत रहा है अमेरिका, लगातार बढ़ रहे हैं कैंसर के मरीज

Tue, 14 Aug 2018 11:54 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 14 Aug 2018 11:54 AM IST
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Number of cancer patients increasing in America because of terrorist attack of world trade centre

अमेरिका में 17 साल पहले हुए आतंकी हमले ने आज भी वहां धूल का आतंक फैलाया हुआ है। इस आतंक के तहत देश के करीब 10 हजार लोगों को कैंसर हुआ है। यह हमला 11 सितंबर साल 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुआ था। अब अगले महीने इसके 17 साल पूरे होने जा रहे हैं। इसी के तहत डब्ल्यूटीसी हेल्थ प्रोग्राम द्वारा एक अध्ययन कराया गया। जिसमें इस हमले से होने वाले स्वास्थ्य के नुकसानों की जांच की गई।

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इस अध्ययन में पता चला कि हमला बेशक 2001 में हुआ था लेकिन लोगों के स्वास्थ्य पर इसका प्रभाव 2012 के बाद अधिक  पड़ना शुरू हुआ है। अगर बीते तीन साल की बात करें तो इस दौरान यहां तीन गुना कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ी है। जिससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगली तीन पीढ़ियां भी अब खतरे में हैं।
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इस हमले के बाद से ही अमेरिका ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था काफी मजबूत कर ली थी। ताकि वहां अन्य कोई हमला न हो पाए। 17 साल पहले यहां डब्लूसीसी के दो टावर गिर गए थे। जिससे आज तक यहां धूल के कारण लोग परेशान हैं। आंकड़ों की मानें तो देश में करीब 9,795 लोग कैंसर के मरीज हैं। ये आंकड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है और लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

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अलग-अलग तरीके से हो रहा है सेहत पर असर

Number of cancer patients increasing in America because of terrorist attack of world trade centre

इस हमले का असर लोगों की सेहत पर अलग अलग तरीके से हो रहा है। इसी बात की जांच के लिए वर्ल्ड हेल्थ प्रग्राम भी शुरू किया गया था। लोगों के कैंसर होने के पीछे की वजह टावर गिरने से फैली धूल है। डॉक्टरों का मानना है कि टावर गिरने से जेट का जला हुआ तेल, एस्बेस्टस के टुकड़े, कांच के टुकड़े और सीमेंट जैसे हानिकारक तत्व धूल में मौजूद थे। जो कि आज भी लोगों की सांस की नली को खराब कर रहे हैं।

2013 के बाद से लगातार बढ़ रही हैं शिकायतें

अध्ययन के दौरान एकत्रित किए गए आंकड़े बताते हैं कि ऐसे मामले 2012 में ही आने शुरू हो गए थे। लेकिन ऐसी शिकायतें 2013 के बाद से लगातार बढ़ती गईं। 2013 तक ऐसी 1500 शिकायतें आई थीं, जो 2015 में बढ़कर 3,204 और 2016 में 8,188 हो गईं। यानी हमले के 17 साल बाद भी ये शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही हैं। कहा जा रहा है कि इस धूल का असर अगले 15 सालों तक रहने वाला है।

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