Nuh: 11वीं सदी के राजपूत वंश से निकले मुस्लिमों के खिलाफ क्यों नहीं गए जाट, क्या हिंदुत्व की दुकान हुई बंद?
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विस्तार
मेवात के नूंह में हिंसा हो गई। वैसे तो उसे होना ही नहीं था। अगर हुई तो उसे तभी रोका जा सकता था। क्या कुछ नहीं था, सरकार थी, पुलिस थी और केंद्रीय अर्धसैनिक बल भी पहुंच गए थे। इसके बाद भी हिंसा होती रही तो मतलब सीधा सा है कि इसके पीछे कुछ तो था। खैर, 11वीं सदी के राजपूत वंश से निकले मुस्लिमों के खिलाफ न जाकर 'जाट समाज' ने 'हिंदुत्व' के कथित ठेकेदारों की दुकान बंद कर दी है। उन ठेकेदारों ने जाट समुदाय को खूब उकसाया, अपील की, आ जाओ तुम्हारे हिंदू भाई संकट में हैं। नहीं, बिल्कुल नहीं गए। क्यों जाएंगे, किस लिए जाएंगे। कुछ दिन पहले तक तो वे ठेकेदार जाटों को हिंदू मानने को तैयार नहीं थे। किसान आंदोलन और पहलवानों के आंदोलन में 'जाट समुदाय' को खालिस्तानी और न जाने, क्या क्या कह रहे थे। यूं समझ लें कि ये एक नए राजनीतिक और सामाजिक बदलाव की बयार है। जाट, अब किसी के बहकावे में नहीं आएंगे।
इन्हीं लोगों ने दिया था 35/1 का नारा
अखिल भारतीय जाट महासभा और भारतीय किसान यूनियन के महासचिव युद्धवीर सिंह ने यह बात कही है। शुक्रवार को अमर उजाला डॉट कॉम के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, ये सोचने वाली बात है कि वे कौन लोग हैं, जो खुद को हिंदुत्व का ठेकेदार बताते हैं। उन्होंने पहले समाज 35/1 का नारा दिया था। जाटों को अलग-थलग करने का प्रयास किया। साल 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे में जाटों को उकसा दिया था। उस वक्त नंगला मंदौड़ में महापंचायत हो रही थी। हमने प्रशासन को कह दिया था कि हम आपको कातिलों का नाम बता रहे हैं। उस वक्त मुस्लिम समुदाय के कुछ युवकों ने दो ममेरे भाइयों, गौरव और सचिन की हत्या कर दी थी। कथित ठेकेदारों ने महापंचायत पर कब्जा करने का प्रयास किया। किसानों को बदला लेने के लिए उकसाया। हालांकि बाद में उन लोगों के चेहरों से नकाब हट गया था, जिन्होंने नंगला मंदौड़ की महापंचायत में जाट समुदाय को बदला लेने को उकसाया था। इसके लिए भाजपा नेताओं पर आरोप लगे थे। हरियाणा में भी 2016 के दौरान आरक्षण आंदोलन में 35/1 का नारा दे दिया।
भाजपा के मंत्री ने लूट कराई, नाम हमारा आया
युद्धवीर सिंह बताते हैं, हरियाणा में आरक्षण आंदोलन के दौरान भी वही हुआ था। जाट समाज को उकसाने का प्रयास किया गया। डीएसपी भाटिया ने होस्टल से जाट समुदाय के युवाओं को उठा लिया। हरियाणा सरकार में तत्कालीन मंत्री मनीष ग्रोवर के लोगों ने शहर में लूट कराई, नाम जाट समाज का आया। मंत्री के पीए और सुरक्षा कर्मी के घर पर माल बरामद हुआ। जब भी जाट समाज को अलग थलग करने का प्रयास हुआ था। समझना होगा कि ये कौन लोग हैं, जिनका जब मन करता है तो वे जाटों को हिंदू बना देते हैं। जब मन करता है, उन्हें किसी दूसरे धर्म का बता देते हैं। किसान और पहलवान के आंदोलन में वे लोग जाट समाज को हिंदू नहीं मान रहे थे। भाजपा से जुड़े एक संगठन के लोग कह रहे थे कि एक दिन में पीट-पीट कर धरना स्थल खाली करा देंगे। संत समाज को भी जाटों के खिलाफ कर दिया। अब उन्होंने मेवात में भी वैसा ही कुछ करने की कोशिश की। जाटों को हिंसा में शामिल करने का प्रयास किया, मगर जाट समुदाय ने उन लोगों को दो टूक जवाब दे दिया। हम लोग वैदिक धर्म पर चलते हैं। चौ. छोटूराम और चौ. चरणसिंह की भाईचारे व धर्मनिरपेक्षता की नीति का अनुसरण करते हैं।
भाजपा को नुकसान होना निश्चित है
किसान नेता कहते हैं, मौजूदा परिस्थितियों में समाज को बांटने का काम कर रही भाजपा को भारी राजनीतिक नुकसान पहुंचना निश्चित है। राजनीति बदल रही है। हिंदुत्व की राजनीति को अलग दिशा और रंग दिया जा रहा है। कभी तो गुर्जर समुदाय को उकसाते हैं तो कभी राजपूतों को। यौन शोषण मामले में पहलवान जंतर मंतर पर बैठते हैं तो देशद्रोही बताते हैं। समाज में अलग करने का प्रयास होता है। धीरे-धीरे पिछड़ी जातियां अब मौजूदा शासन को समझने लगी हैं। धर्म के ठेकेदारों की दुकान जल्द ही बंद हो जाएगी। चौ. चरण सिंह की लाइन पर काम हो रहा है। धारा बदलने का प्रयास होगा। हरियाणा में जाट समाज के इस निर्णय से फायदा किसे पहुंचेगा, इस सवाल के जवाब में युद्धवीर सिंह ने कहा, देवीलाल परिवार को फायदा नहीं होगा। भूपेंद्र हुड्डा को लाभ मिल सकता है, बशर्ते कांग्रेस अपनी गलतियों से सबक ले तो। इतना तो तय है कि मेवात हिंसा के बाद जो राजनीतिक माहौल बन रहा है, वह भाजपा और मनोहर लाल खट्टर, दोनों के लिए खतरे की घंटी है।