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वित्तीय सेवाओं का बाजार के विकास व नियमन को बिल राज्यसभा में पेश
Tue, 12 Feb 2019 06:24 PM IST
Nilesh Kumar
भाषा, नई दिल्ली
भाषा, नई दिल्ली
Published by: Nilesh Kumar
Updated Tue, 12 Feb 2019 06:24 PM IST
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राज्यसभा
- फोटो : amar ujala
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सरकार ने भारत में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों में वित्तीय सेवाओं के बाजार को विकसित करने और उनके नियमन के मकसद से एक प्राधिकरण की स्थापना के प्रावधान वाला एक विधेयक मंगलवार को राज्यसभा में पेश किया। वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने इस प्रावधान वाले अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं केंद्र प्राधिकरण विधेयक, 2019 को उच्च सदन में पेश किया।
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विधेयक के कारणों और उद्देश्यों में कहा गया है कि विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) कानून 2015 के तहत ऐसे क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं केंद्र गठित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी देने का प्रावधान है। ऐसा पहला केंद्र गुजरात में गांधीनगर के जीआईएफटी सिटी में स्थापित किया गया है।
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इसमें कहा गया है कि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं केंद्र में बैंकिंग, पूंजी बाजार का नियमन, रिजर्व बैंक, सेबी, इरडा जैसी विभिन्न एजेंसियां कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं केंद्र में वित्तीय उत्पादन एवं सेवाओं के विकास के लिए केंद्रित एवं प्रतिबद्ध नियमन हस्तक्षेप और उच्च स्तरीय अंतरनियमन समन्वय की जरूरत है।
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इसलिए यह तय किया गया कि एक एकीकृत वित्तीय नियामक का गठन किया जाए जो कि विश्व स्तरीय नियमन माहौल उपलब्ध करा सके। विधेयक में भारत के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं केंद्र में वित्तीय सेवाओं के विकास एवं नियमन के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं केंद्र प्राधिकरण गठित करने का प्रावधान किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवाएं केंद्रों में वित्तीय सेवाओं में प्रत्येक लेन-देन उस विदेशी मुद्रा में होगा जो प्राधिकरण केंद्र सरकार के साथ विचार विमर्श करके निर्धारित करेगा। वार्षिक आधार पर प्राधिकरण के कामकाज की समीक्षा के लिए प्राधिकरण के कम से कम दो सदस्यों की सदस्यता वाली प्रदर्शन समीक्षा समिति का गठन किया जाएगा।