चीन अब भी अड़ा, NSG पर भारत के समर्थन में आ सकते हैं जर्मनी सहित कई देश
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ऐसे देश जो कुछ वक्त पहले से भारत की एनएसजी में सदस्यता का विरोध कर रहे थे वो अब भारत के समर्थन में आ सकते हैं। इससे भारत को एनएसजी सदस्यता मिलने का रास्ता थोड़ा आसान हो गया है। जर्मनी के राजदूत के मुताबिक जर्मनी के सलाहकार देशों का एक समूह बैठक कर रहा है, जिसमें भारत की सदस्या को लेकर चर्चा की गई है।
हालांकि इस समूह में चीन शामिल नहीं है। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में जर्मनी भारत की सदस्यता के पक्ष में आया है। भारत लगातार एनएसजी के समूह में शामिल होने के लिए कूटनीतिक तौर पर अपनी दावेदारी की पेशकश करता रहा है। यही वजह है कि पिछले हफ्ते अमेरिका ने भी भारत के समर्थन की बात फिर दोहराई थी।
हालांकि चीन अभी भी भारत की सदस्यता के पक्ष में नहीं है और अपनी रणनीति पर अड़ा हुआ है। आपको बता दें कि चीन नॉन-एनपीटी सदस्यों को एनएसजी समूह में शामिल करने का विरोध करता रहा है।
भारत और जर्मनी आ रहे करीब
कुछ वक्त पहले जर्मनी के विदेश सचिव मार्कस एडरर ने अपने समकक्ष भारत के विदेश सचिव एस जयशंकर से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच रिश्तों को बेहतर बनाने पर चर्चा की। जर्मनी के विदेश सचिव मार्कस एडरर ने अपने समकक्ष एस जयशंकर से मुलाकात कर दोनों देेशों के रिश्तों को मजबूत करने को लेकर चर्चा की।
इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल दो बार जर्मनी की यात्रा करेंगे- पहली यात्रा मई में और दूसरी जी-20 सम्मेलन के दौरान जुलाई में। जर्मनी अपनी विदेश नीति में बदलाव करते हुए भारतीय प्रायद्वीप में भारत के साथ काम करने की ओर कदम बढ़ाया है।
जयशंकर इसी हफ्ते श्रीलंका में होने वाली बैठक में जर्मनी के राजनयिकों से मुलाकात करेंगे। जर्मनी का मानना है कि भारतीय प्रायद्वीप में भौगोलिक स्तर पर देशों का हित बढ़ा है। ऐसे में इस क्षेत्र में जिओ-इकॉनमिक और जिओ पॉलिटिकल स्तर पर ध्यान देने की बेहद जरूरत है। जर्मनी इस क्षेत्र में स्थायित्व बरकरार रखना चाहता है, इसी वजह से वो भारत सरकार की स्मार्ट सिटी, अक्षय ऊर्जा, क्लीन गंगा, रेलवे समेत कई योजनाओं पर ध्यान देने की कोशिश कर रहा है।