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पुलिस के कानून लागू करने की ‘नाकामी’ से लोकतंत्र विफल होता है : एनएसए डोभाल
Thu, 05 Mar 2020 07:01 PM IST
योगेश साहू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुड़गांव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुड़गांव
Published by: योगेश साहू
Updated Thu, 05 Mar 2020 07:01 PM IST
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ajit doval
- फोटो : PTI
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पुलिस यदि कानून को लागू करने में नाकाम रहती है तो उसकी इस नाकामी से लोकतंत्र विफल होता है। यह बात राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने देशभर के युवा पुलिसकर्मियों को गुरुवार को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि आम आदमी को 'विश्वसनीय और निष्पक्ष' पुलिस नजर आनी चाहिए, अगर वह कानून लागू करने में नाकाम रहती है तो लोकतंत्र भी नाकाम होता है।
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एनएसए डोभाल ने पुलिस अधिकारियों से सुनिश्चित करने के लिए भी कहा कि आम लोगों में यह धारणा है कि पुलिस सिर्फ विशेषाधिकार प्राप्त लोगों की ही सेवा करती है, इसे दूर होना चाहिए। यह धारणा संगठन की छवि खराब करती है।
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डोभाल ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आने वाले पुलिस के एक थिंक टैंक पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरडी) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में कहा कि कानून बनाना किसी लोकतंत्र में सबसे पवित्र काम है। यह किसी साम्राज्यवादी शासक या किसी धार्मिक नेता के मंच से नहीं होता, बल्कि जनता के प्रतिनिधि इसे करते हैं और आप कानून लागू करने वाले लोग हैं। उन्होंने कहा कि यदि आप नाकाम होते हैं तो इससे लोकतंत्र विफल होता है।
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एनएसए डोभाल ने कहा कि यदि पुलिसकर्मी कानून लागू करने में सक्षम नहीं होते हैं तब उस कानून का बनना ही व्यर्थ है। कोई कानून उतना ही अच्छा होता है जितना कि उसका जमीनी क्रियान्वयन होता है। बता दें कि हाल ही में दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर डोभाल की यह टिप्पणी खासे मायने रखती है। दरअसल, दिल्ली हिंसा को नियंत्रित करने में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
डोभाल ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में कानून के प्रति समर्पण बहुत महत्वपूर्ण है। आपको निष्पक्षता से और वस्तुनिष्ठता से काम करना चाहिए। जरूरी है कि आप विश्वसनीय दिखें। उन्होंने कहा कि पुलिस के बारे में धारणा अहम है, क्योंकि लोग किसी या कुछेक गलत पुलिसकर्मियों के छिटपुट उदाहरणों को देखकर अन्य सभी पुलिसकर्मियों के बारे में धारणा बना लेते हैं कि यही भारतीय पुलिस है।
बता दें कि डोभाल 1968 बैच के आईपीएस अफसर हैं जो एक समय में इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक रह चुके हैं और बाद में साल 2014 में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उन्हें एनएसए के रूप में चुने गए।