एनआरसी में नहीं है नाम तो ये हैं आपके पास विकल्प, इस तरह कर सकते हैं अपील
- एनआरसी सूची से बाहर हुए लोग विदेशी न्यायाधिकरण से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटा सकते हैं
- सभी कानूनी विकल्पों का उपयोग करने से पहले सरकार कोई कार्रवाी नहीं कर सकती
- 120 दिनों में कर सकते हैं अरील। अपील करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर, 2019 है
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शनिवार को असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) की अंतिम सूची जारी कर दी है। इस सूची को आप nrcassam.nic.in पर क्लिक करके देख सकते है। सूची में जहां तीन करोड़ 11 लाख 21 हजार चार लोगों को भारतीय नागरिकता माना गया है। वहीं 19 लाख 6 हजार 657 लोगों को सूची से बाहर रखा गया है। यानी इन लोगों की नागरिकता पर तलवार लटक रही है। ऐसे लोगों के लिए चिंता की बात है कि अब उनके भविष्य का क्या होगा।
माना जा रहा है कि जिन लोगों के नाम इस सूची में शामिल नहीं है वह विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। हालांकि राज्य में किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षाबलों की 218 कंपनियों को हाईअलर्ट पर रखा गया है।
ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या 19 लाख लोगों को देश से बाहर निकाल दिया जाएगा? क्या उन्हें दोबारा अपील करने का अधिकार नहीं मिलेगा? इन लोगों के भविष्य का क्या होगा? इस तरह के कई सवाल आपके मन में उमड़ रहे होंगे जिनके हम जवाब दे रहे हैं:-
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जिन लोगों के नाम सूची में शामिल नहीं हैं वह विदेशी न्यायाधिकरण में अपील कर सकते हैं। इसके लिए राज्य में 400 न्यायाधिकरणों की स्थापना की गई है।
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यदि विदेशी न्यायाधिकरण के जरिए उन्हें नागरिकता नहीं मिलती तो वह उच्च न्यायालय से उच्चतम न्यायालय तक जा सकते हैं।
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सभी कानूनी विकल्पों को आजमाने तक सरकार उनके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं कर सकती।
120 दिनों में करनी होगी अपील
जिन लोगों के नाम एनआरसी की सूची में शामिल नहीं हैं उनके पास अपील करने के लिए केवल तीन महीने यानी 120 दिन हैं। पहले यह समयसीमा केवल 60 दिनों की थी जिसे बढ़ाया गया है। शेड्यूल ऑफ सिटिजनशिप के सेक्शन 8 के मुताबिक लोग एनआरसी में नाम न होने पर अपील कर सकते हैं। अपील की आखिरी तारीख 31 दिसंबर, 2019 तक है। गृह मंत्रालय के आदेश के तहत एनआरसी विवाद के निपटारे के लिए 1,000 न्यायाधिकरणों का गठन किया गया है।
गरीब परिवारों को मिलेगी कानूनी मदद
असम सरकार ने साफ किया है कि सूची में नाम शामिल न होने वाले परिवार यदि गरीब हैं और कानूनी लड़ाई लड़ने में अक्षम हैं तो उनकी मदद की जाएगी। वहीं सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी दलों ने भी ऐसे लोगों की मदद का भरोसा दिया है।
विधेयक लाकर मदद कर सकती है केंद्र सरकार
असम में ऐसे कई हजार परिवार हैं जिनकी पीढ़ी असमिया है लेकिन उनका नाम सूची में शामिल नहीं है। ऐसे लोगों की परेशानियों का निपटारा करने के लिए सरकार कोशिश कर रही है। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल का कहना है कि सूची में गलत तरीके से शामिल हुए विदेशी और सूची से बाहर हुए भारतीयों को लेकर केंद्र सरकार कोई विधेयक ला सकती है।