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क्या सॉफ्ट हिंदुत्व की तरफ बढ़ रही है राहुल गांधी की कांग्रेस?
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 10 Sep 2016 05:42 PM IST
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राहुल गांधी
- फोटो : amar ujala
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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों मिशन यूपी पर हैं। उनकी किसान यात्रा सुर्खियां बटोर रही है। एक खास तरह का ट्रेंड उनकी चुनावी यात्रा में दिख रहा है। कांग्रेस के राजनीतिक रूप से मुस्लिम तुष्टीकरण और हिंदू विरोधी होने का आरोप लगता रहा है। लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के नेता शशि थरूर ने यह टिप्पणी भी की थी कि कांग्रेस के हारने की वजह हिंदू विरोध रहा है। कांग्रेस के भीतर भी यह आवाजें समय-समय पर उठती रही हैं कि कांग्रेस की धर्म निपरेक्षता कई बार हिंदू विरोधी लगने लगती है।
क्या कांग्रेस अपनी इस इमेज को तोड़ना चाह रही है? ऐसा प्रश्न इसलिए उठा क्योंकि कांग्रेस ने जब यूपी चुनाव प्रचार की शुरुआत की तब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने दौरे की शुरुआत बनारस से की थी। अरसे बात ऐसा हुआ था कि कांग्रेस अध्यक्ष ने किसी मंदिर के दर्शन किए हों।
चुनावी यात्राओं में मंदिर जाने का यह सिलसिला राहुल के दौर के भी साथ रहा। अपनी किसान यात्रा के दौरान राहुल कई मंदिरों में गए। गुरुवार को वह जब अयोध्या पहुंचे तो इसे राजनीतिक समीकरण से जोड़कर देखा गया। बाबरी विध्वंस के करीब 22 के साल के बाद गांधी परिवार का कोई सदस्य अयोध्या पहुंचा था।
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राहुल की इस अयोध्या यात्रा को धर्म के नजरिए से भी देखा गया। राजनीतिक गलियारों में ऐसा कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री के रूप में ब्राहाण चेहरा प्रोजेक्ट करने के बाद कांग्रेस नरम हिंदुत्व की ओर कदम बढ़ा सकती है। हालांकि यह बात काल के गर्भ में छिपी है कि क्या वाकई कांग्रेस ऐसा करने जा रही है और ऐसा करने के बाद उसे राजनीतिक रूप से कोई नफा मिलने जा रहा है?
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क्या कांग्रेस अपनी इस इमेज को तोड़ना चाह रही है? ऐसा प्रश्न इसलिए उठा क्योंकि कांग्रेस ने जब यूपी चुनाव प्रचार की शुरुआत की तब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने दौरे की शुरुआत बनारस से की थी। अरसे बात ऐसा हुआ था कि कांग्रेस अध्यक्ष ने किसी मंदिर के दर्शन किए हों।
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चुनावी यात्राओं में मंदिर जाने का यह सिलसिला राहुल के दौर के भी साथ रहा। अपनी किसान यात्रा के दौरान राहुल कई मंदिरों में गए। गुरुवार को वह जब अयोध्या पहुंचे तो इसे राजनीतिक समीकरण से जोड़कर देखा गया। बाबरी विध्वंस के करीब 22 के साल के बाद गांधी परिवार का कोई सदस्य अयोध्या पहुंचा था।
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राहुल की इस अयोध्या यात्रा को धर्म के नजरिए से भी देखा गया। राजनीतिक गलियारों में ऐसा कयास लगाए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री के रूप में ब्राहाण चेहरा प्रोजेक्ट करने के बाद कांग्रेस नरम हिंदुत्व की ओर कदम बढ़ा सकती है। हालांकि यह बात काल के गर्भ में छिपी है कि क्या वाकई कांग्रेस ऐसा करने जा रही है और ऐसा करने के बाद उसे राजनीतिक रूप से कोई नफा मिलने जा रहा है?