'जंग में मानवीय पहलू ही निर्णायक': नौसेना प्रमुख ने युवाओं को दिए मंत्र; ओटीए से 29 महिलाओं समेत 365 पासआउट
नेवल स्टाफ के प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) से पास आउट होकर अपनी पहली पोस्टिंग पर जा रहे नए अधिकारियों से कहा कि वे साहस को एक मांसपेशी की तरह मजबूत करें। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में तकनीक और हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद इंसानी पहलू सबसे अहम होता है।
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भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने शनिवार को ओटीए की पासिंग आउट परेड में नए सैन्य अधिकारियों को आधुनिक युद्ध की बदलती तकनीक के बीच मानवीय नेतृत्व, साहस, सीखने की निरंतरता, देशसेवा और भरोसे को सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि हथियार और युद्ध तकनीक कितनी भी आधुनिक हो जाए, अंतिम परिणाम नेतृत्व करने, प्रेरित करने और विपरीत परिस्थितियों में डटे रहने वाले सैनिकों से ही तय होता है। उन्होंने तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त प्रशिक्षण और अभियानों को भी भविष्य की सैन्य क्षमता के लिए महत्वपूर्ण बताया।
'नेतृत्व और हौसले से तय होता है युद्ध का नतीजा'
उन्होंने युवा अधिकारियों से कहा कि आधुनिक युद्ध का नतीजा ऐसे नेता तय करते हैं, जो दूसरों को प्रेरित करते हैं, मुश्किल हालात में डटे रहते हैं और हार नहीं मानते। युद्ध का तरीका कई तरह से बदल सकता है, लेकिन असल में युद्ध आज भी मुख्य रूप से इंसानों से जुड़ा काम है। लड़ाई के दौरान नए-नए क्षेत्रों में नए हथियारों का इस्तेमाल हो सकता है, लेकिन उनका नतीजा उन पुरुषों और महिलाओं से ही तय होगा, जो लड़ते हैं, नेतृत्व करते हैं, प्रेरित करते हैं, डटे रहते हैं और हार नहीं मानते। वर्दी में करीब चार दशक बिताने के बाद उनका यह विश्वास और मजबूत हुआ है। उन्होंने यह बात ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी के ऐतिहासिक परमेश्वरन ड्रिल स्क्वायर में SCC-122 और SSC (W)-36 कोर्स की पासिंग आउट परेड का निरीक्षण करते हुए कही। एडमिरल स्वामीनाथन ने प्रेसिडेंट्स कमीशन पाने के लिए कड़ी ट्रेनिंग पूरी करने वाले 365 कैडेट्स को बधाई दी। इनमें मित्र देशों के 17 अधिकारी भी शामिल थे।
'चार दशक में बदल गया युद्ध का तरीका'
आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप पर बात करते हुए एडमिरल स्वामीनाथन ने 1987 में कमीशन मिलने के बाद से अपने करीब चार दशक के सैन्य करियर के दौरान आए बदलावों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज के युद्ध में लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाले हथियार, आधुनिक सेंसर और एक साथ कई क्षेत्रों में चलाए जाने वाले अभियान महत्वपूर्ण हो गए हैं। इसके बावजूद युद्ध का अंतिम नतीजा आज भी उन पुरुषों और महिलाओं पर निर्भर करता है, जो नेतृत्व करते हैं।
युवा अधिकारियों को दिए पांच मंत्र
भविष्य की चुनौतियों के लिए युवा अधिकारियों को तैयार करते हुए एडमिरल स्वामीनाथन ने पांच मुख्य बातें बताईं। उन्होंने कहा कि अपने दिमाग को सबसे बड़ा हथियार मानें, जीवनभर सीखते रहें, साहस को मांसपेशी की तरह मजबूत करें, खुद से पहले देश की सेवा को रखें और भरोसे को अपनी सबसे बड़ी पूंजी बनाएं।
तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
उन्होंने सशस्त्र बलों के बीच संयुक्त अभियानों की जरूरत पर भी जोर दिया। इसके लिए उन्होंने वैदिक सिद्धांत 'समानो मंत्रः' का हवाला दिया, जिसका अर्थ है हमारा मकसद एक है। उन्होंने सभी सेनाओं से साथ मिलकर ट्रेनिंग करने, संयुक्त अभियान चलाने और मिलकर जीत हासिल करने का आह्वान किया।
'अंतिम पग' से शुरू होगा नया सफर
उन्होंने कहा, 'ऑफिसर-कैडेट्स, बहुत जल्द आप एकेडमी की जिंदगी का 'अंतिम पग' यानी आखिरी कदम उठाएंगे। याद रखें, असल में यह एक नए सफर का 'प्रथम पग' यानी पहला कदम है। यह सम्मान, कर्तव्य, साहस, ईमानदारी, जिम्मेदारी और देश की निस्वार्थ सेवा का सफर है।' उन्होंने युवा अधिकारियों से आगे बढ़कर नेतृत्व करने की अपील भी की।
भारतीय रक्षा बलों में कमीशन हुए कैडेट्स
कुल 313 ऑफिसर कैडेट्स और 29 महिला ऑफिसर कैडेट्स को भारतीय रक्षा बलों की अलग-अलग शाखाओं और सेवाओं में कमीशन किया गया। इसके अलावा मित्र देशों सेशेल्स, तंजानिया, युगांडा, जिम्बाब्वे, एस्वातिनी, भूटान और लेसोथो के सात ऑफिसर कैडेट्स और दस महिला ऑफिसर कैडेट्स ने भी अपनी ट्रेनिंग पूरी की। इससे अलग-अलग देशों के बीच भाईचारे और सहयोग के रिश्ते और मजबूत हुए।
पिपिंग सेरेमनी में लिया देशसेवा का संकल्प
शानदार परेड के बाद 'पिपिंग सेरेमनी' हुई। यह नए अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण और गंभीर संकल्प का प्रतीक है। इस दौरान नए कमीशन प्राप्त अधिकारियों के कंधों पर इंसिग्निया लगाए गए। इसके साथ ही उन्होंने भारत के संविधान के प्रति निष्ठा और देश की रक्षा करने का संकल्प लिया।
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कैडेट्स को मिले मेडल और स्वॉर्ड ऑफ ऑनर
चीफ ऑफ नेवल स्टाफ ने BUO गुरकीरत सिंह होरा को 'स्वॉर्ड ऑफ ऑनर' और ब्रॉन्ज मेडल से सम्मानित किया। AUO अभिनब चौहान को OTA गोल्ड मेडल और ACA निकेत सिंह तोमर को सिल्वर मेडल दिया गया। पासिंग आउट परेड देखने वाले गणमान्य लोगों में OTA के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल माइकल AJ फर्नांडीज, दक्षिण भारत क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल उल्हास किरपेकर और सूडान, युगांडा तथा सेशेल्स के विदेशी सर्विस अताशे शामिल थे।