शोध में दावा, रोज ब्रश न करने वालों को होता है स्ट्रोक का ज्यादा खतरा
यह अध्ययन ऐसे 1145 लोगों पर किया गया जिन्हें कभी स्ट्रोक नहीं हुआ था। उनकी औसत उम्र 76 साल थी। शोधकर्ताओं ने एमआरआई ब्रेन स्कैनिंग के जरिये उनके मस्तिष्क की धमनियों में ब्लॉकेज का आकलन किया। इसमें पता चला कि औसतन 10 में से एक व्यक्ति के मस्तिष्क की धमनियां बुरी तरह ब्लॉक थीं।
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मसूड़ों की बीमारी से पीड़ित वयस्कों को स्ट्रोक का खतरा ज्यादा होता है। शोधकर्ताओं ने कहा है कि रोज ब्रश करने से मसूड़ों की बीमारी से बचा जा सकता है, लेकिन जो लोग ऐसा नहीं करते, उनके मस्तिष्क की धमनियों में ब्लॉकेज होने की आशंका दोगुनी होती है।
धमनियों में ब्लॉकेज से रक्त का प्रवाह प्रभावित होता है और यह स्ट्रोक का कारण बनता है। मसूड़ों में सूजन से ब्लॉकेज की प्रक्रिया तेज होती है क्योंकि यह खून की नलिकाओं की गतिविधियों को कमजोर करता है। मसूड़ों में सूजन से बचने का सबसे आसान और सही तरीका रोजाना ब्रश करना है।
दो हिस्सों में पूरा हुआ शोध
शोध के लेखक और यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलिना स्कूल ऑफ मेडिसिन के डॉ. सौविक सेन ने बताया कि 1145 लोगों पर अध्ययन किया गया जिन्हें कभी स्ट्रोक नहीं हुआ था। उनकी औसत उम्र 76 साल थी। शोधकर्ताओं ने एमआरआई ब्रेन स्कैनिंग के जरिये उनके मस्तिष्क की धमनियों में ब्लॉकेज का आकलन किया। इसमें पता चला कि औसतन 10 में से एक व्यक्ति के मस्तिष्क की धमनियां बुरी तरह ब्लॉक थीं।
शोध में पता चला कि मसूड़ों की सूजन से पीड़ित लोगों की धमनियों में ब्लॉकेज की आशंका 2.4 गुना ज्यादा होती है। शोध के दूसरे हिस्से में 265 लोगों को शामिल किया गया जिनकी औसत उम्र 64 साल थी। ये सभी स्ट्रोक के मरीज थे। इसमें पता चला कि मसूड़ों की सूजन से पीड़ित लोगों को स्ट्रोक की गंभीर समस्या होने की आशंका करीब तीन गुना ज्यादा होती है।
मसूड़ों की सूजन का कई बीमारियों से संबंध
मसूड़ों का सूजन गंदगी और बैक्टीरिया के जमा होने से होने वाला संक्रमण है। इसका सबसे प्रमुख लक्षण मसूड़ों से खून आना है। यदि शुरुआत में इलाज नहीं किया जाए तो यह जबड़ों के नजदीक स्थित उत्तकों तक पहुंच जाता है जिसका नतीजा दांतों का टूटना हो सकता है। मसूड़ों के सूजन का संबंध कई बीमारियों से है जैसे स्ट्रोक, डाइबिटिज और दिल की बीमारियां। इन बीमारियों में मसूड़ों के सूजन की क्या भूमिका है, यह स्पष्ट नहीं है।