{"_id":"60df2a3688484748af259fdd","slug":"north-india-is-best-in-handling-covid-control-south-india-is-way-behind","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोविड-19: उत्तर भारत में कोरोना संक्रमण का नियंत्रण सबसे बेहतर, दक्षिण भारत बदहाल","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
कोविड-19: उत्तर भारत में कोरोना संक्रमण का नियंत्रण सबसे बेहतर, दक्षिण भारत बदहाल
Fri, 02 Jul 2021 09:42 PM IST
गौरव पाण्डेय
आशीष तिवारी, नई दिल्ली
आशीष तिवारी, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 02 Jul 2021 09:42 PM IST
सार
दक्षिण भारत में रोजाना पूरे देश के तकरीबन 60 फीसदी पॉजिटिव मरीज मिल रहे हैं। इसमें अकेले केरल में ही 30 फीसदी मामले हैं जबकि महाराष्ट्र में 20 फीसदी हैं।
विज्ञापन
कोरोना से बचने के लिए मास्क लगाए लोग
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरोना संक्रमण नियंत्रण के मामले में उत्तर भारत के राज्यों की स्थिति बहुत बेहतर हो रही है। जबकि इसकी तुलना में दक्षिण भारत के राज्यों समेत पूर्वी राज्यों और महाराष्ट्र में हालात दुरुस्त नहीं हो पा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अब इस दिशा में ज्यादा गंभीरता से अध्ययन करना होगा कि आखिर उत्तर भारत की तुलना में इन राज्यों में मामले क्यों नहीं कम हो पा रहे हैं। क्योंकि डर इस बात का भी बना हुआ है कि अगर ये मामले कम नहीं हुए तो हालात तीसरी लहर की ओर ले जाएंगे।
विज्ञापन
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के मुख्य महामारी विज्ञानी डॉ. समीरन पांडा कहते हैं कि हमें दक्षिण भारत समेत महाराष्ट्र और पूर्वी भारत में मिल रहे लगातार पॉजिटिव मामलों के ट्रेंड को समझना होगा। जिन राज्यों में एक महीने से रोजाना मिलने वाले पॉजिटिव मामलों में कोई कमी नहीं हुई है वहां हमें रणनीति बदलने की आवश्यकता होगी।
विज्ञापन
उनका कहना है उत्तर भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले निश्चित तौर पर काफी कम हो रहे हैं। इसलिए दक्षिण भारत में उत्तर भारत में कम हो रहे मामलों को लेकर एक तुलनात्मक अध्ययन करने की आवश्यकता है। इसके आधार पर तथ्यों व रणनीति का अध्ययन कर दक्षिण के राज्यों में लागू करने से पॉजिटिव मामलों को नियंत्रित करने में काफी मदद मिल सकती है।
विज्ञापन
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि जब देश में कोरोना मरीज कम होने लगे, उसके बाद भी सिर्फ केरल में ही मिलने वाले मरीजों की संख्या औसतन रोजाना 12 हजार से ज्यादा बनी हुई है। मंत्रालय का कहना है जब उत्तर भारत में मामले कम हो रहे हैं तो दक्षिण भारत समेत महाराष्ट्र, असम और ओडिशा में भी यह ट्रेंड दिखना चाहिए। आईसीएमआर के विशेषज्ञों का कहना है कि भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से ऐसा बिल्कुल नहीं है कि दक्षिण भारत में मामले कम नहीं हो रहे हैं।
दरअसल एक मेडिकल जर्नल में इस बात का जिक्र भी किया गया था कि भौगोलिक परिस्थितियों के मुताबिक भी कोरोना वायरस का संक्रमण कम या ज्यादा होने की संभावना बनी रहती है। डॉ. समीरन पांडा कहते हैं कि ऐसी कोई भी रिसर्च फिलहाल स्पष्ट नहीं कर सकी है जिसमें भौगोलिक परिस्थितियों के मुताबिक इस वायरस के प्रसार का कम या ज्यादा होना पाया गया हो। इसलिए दक्षिण भारत में ज्यादा मिल रहे रहे मामलों को भौगोलिक परिस्थितियों से नहीं जोड़ा जा सकता है।
मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक बीते कुछ समय से महाराष्ट्र और केरल में रोजाना मिलने वाले पॉजिटिव मरीजों की संख्या तकरीबन एक स्थान पर ही टिकी हुई है। जबकि तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडिसा और असम में मरीजों की संख्या रोजाना तकरीबन ढाई हजार से साढ़े तीन हजार मरीजों के बीच बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन राज्यों में कोरोना संक्रमण के मरीजों की संख्या में गिरावट नहीं दर्ज होती है तो निश्चित तौर पर यह हालात अधिक चिंताजनक भी हो सकते हैं। उनका कहना है अगर इन राज्यों के लोगों का आना-जाना देश के अन्य हिस्सों से होता है तो तीसरी लहर आने की संभावना बहुत जल्दी बन जाएगी।