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'तीन तलाक पर अब सुनवाई नहीं हुई तो फिर हो जाएगी देर..' SC के 15 जजों की छुट्टी कैंसिल
amarujala.com- Written by: राघवेंद्र मिश्र
Updated Fri, 31 Mar 2017 10:51 AM IST
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तीन तलाक और मुस्लिमों की व्यक्तिगत कानूनों के तहत बहुविवाह सहित संवैधानिक महत्व के तीन मामलों के लिए पहली बार 15 जज गर्मी की छुट्टियों में सुनवाई करेंगे। इन तीनों मामलों पर संविधान पीठ 11 मई से सुनवाई करेगी।
चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति जेएस खेहर ने गुरुवार को बताया कि गर्मी की छुट्टियों में तीन अलग-अलग संविधान पीठ के गठन को मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इन मामलों की सुनवाई अब न हो सकी तो वर्षों तक इन मसलों का निपटारा नहीं हो पाएगा।
बताते चलें कि गर्मी की छुट्टियों में एक दो सदस्यीय पीठ के बैठने का चलन रहा है लेकिन इस बार सुप्रीम कोर्ट के 28 जजों में से 15 जज सुनवाई करेंगे। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने 27 मार्च को शीर्ष अदालत से कहा था कि इन प्रथाओं को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए क्योंकि ये मसले न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर के हैं।
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चीफ जस्टिस और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने बताया कि इस बार ग्रीष्मावकाश के दौरान मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक, निकाह हलाला व बहुविवाह की वैधता, व्हाट्स ऐप व फेसबुक यूजर्स के लिए निजता के अधिकार और भारत में जन्मे अवैध प्रवासियों के बच्चों को भारतीय नागरिकता देने के मसले पर पांच जजों वाली तीन पीठ सुनवाई करेगी।
उन्होंने कहा, ‘ये सभी महत्वपूर्ण मामले हैं। अगर अलग-अलग संविधान पीठ इन मामलों पर सुनवाई नहीं करेगी तो इनका निपटारा वर्षों में नहीं हो पाएगा।’ उन्होंने वकीलों से कहा कि अगर ऐसा नहीं होगा तो आप हमें दोष नहीं दीजिएगा।
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चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति जेएस खेहर ने गुरुवार को बताया कि गर्मी की छुट्टियों में तीन अलग-अलग संविधान पीठ के गठन को मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इन मामलों की सुनवाई अब न हो सकी तो वर्षों तक इन मसलों का निपटारा नहीं हो पाएगा।
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बताते चलें कि गर्मी की छुट्टियों में एक दो सदस्यीय पीठ के बैठने का चलन रहा है लेकिन इस बार सुप्रीम कोर्ट के 28 जजों में से 15 जज सुनवाई करेंगे। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने 27 मार्च को शीर्ष अदालत से कहा था कि इन प्रथाओं को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए क्योंकि ये मसले न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर के हैं।
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चीफ जस्टिस और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने बताया कि इस बार ग्रीष्मावकाश के दौरान मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक, निकाह हलाला व बहुविवाह की वैधता, व्हाट्स ऐप व फेसबुक यूजर्स के लिए निजता के अधिकार और भारत में जन्मे अवैध प्रवासियों के बच्चों को भारतीय नागरिकता देने के मसले पर पांच जजों वाली तीन पीठ सुनवाई करेगी।
उन्होंने कहा, ‘ये सभी महत्वपूर्ण मामले हैं। अगर अलग-अलग संविधान पीठ इन मामलों पर सुनवाई नहीं करेगी तो इनका निपटारा वर्षों में नहीं हो पाएगा।’ उन्होंने वकीलों से कहा कि अगर ऐसा नहीं होगा तो आप हमें दोष नहीं दीजिएगा।
11 मई से ट्रिपल तलाक के मसले पर सुनवाई होगी
फाइल फोटोः ट्रिपल तलाक
- फोटो : social media
वास्तव में चीफ जस्टिस ने यह जानकारी तब दी जब वह ट्रिपल तलाक मामले की सुनवाई के लिए तारीख तय की जा रही थी। चीफ जस्टिस ने कहा कि 11 मई से ट्रिपल तलाक के मसले पर सुनवाई होगी। 11-12 तारीख को इसे जुड़े मसले तय किए जाएंगे जिनका परीक्षण किया जाएगा। यदि आप चाहेंगे तो हम शनिवार-रविवार यानी 13-14 मई को भी सुनवाई कर सकते हैं। इसके बाद मसले पर सुनवाई के लिए हमारे पास पूरा सप्ताह रहेगा।
हालांकि अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी, वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, राजू रामचंद्रन सहित अन्य वकीलों को चीफ जस्टिस का यह आइडिया पसंद नहीं आया। इनका कहना था कि इन तीनों मामलों में उन्हें अपनी दलीलें रखनी हैं। ऐसे में तीन संविधान पीठ को एक साथ बिठाना सही नहीं होगा।
अटॉर्नी जनरल ने कहा कि ये तीनों ही मामले महत्वपूर्ण हैं और तीनों ही मामलों में उन्हें पेश होना है। ऐसे में मेरे लिए एक साथ तीनों पीठ के समक्ष पेश होना कैसे संभव है। उन्होंने कहा कि ग्रीष्मावकाश में सुनवाई करने के लिए वकीलों की सुविधा को भी ध्यान में रखने का प्रचलन है।
इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि किसी भी वकील पर कोई बाध्यता नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हमें कोई दिक्कत नहीं हैं। अगर आप लोग तैयार नहीं हैं तो हम भी गर्मी की छुट्टियों का मजा लेंगे।’
हालांकि अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी, वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, राजू रामचंद्रन सहित अन्य वकीलों को चीफ जस्टिस का यह आइडिया पसंद नहीं आया। इनका कहना था कि इन तीनों मामलों में उन्हें अपनी दलीलें रखनी हैं। ऐसे में तीन संविधान पीठ को एक साथ बिठाना सही नहीं होगा।
अटॉर्नी जनरल ने कहा कि ये तीनों ही मामले महत्वपूर्ण हैं और तीनों ही मामलों में उन्हें पेश होना है। ऐसे में मेरे लिए एक साथ तीनों पीठ के समक्ष पेश होना कैसे संभव है। उन्होंने कहा कि ग्रीष्मावकाश में सुनवाई करने के लिए वकीलों की सुविधा को भी ध्यान में रखने का प्रचलन है।
इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि किसी भी वकील पर कोई बाध्यता नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हमें कोई दिक्कत नहीं हैं। अगर आप लोग तैयार नहीं हैं तो हम भी गर्मी की छुट्टियों का मजा लेंगे।’