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अगस्तावेस्टलैंड सौदे का कोई रिकार्ड मौजूद नहीं: वायु सेना
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Fri, 26 Aug 2016 01:38 AM IST
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रक्षा मंत्रालय से आरटीआई के जरिए मांगी गई थी जानकारी
- फोटो : PTI
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यह पढ़ने में अटपटा लग सकता है लेकिन भारतीय वायु सेना ने दावा किया है कि उसके पास विवादित वीवीआईपी अगस्तावेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे का कोई रिकार्ड मौजूद नहीं है। इस सौदे में घूसखोरी के आरोप लगने के बाद इसे रद्द कर दिया गया था। सूचना अधिकार कानून के तहत वायु सेना और रक्षा मंत्रालय से इस बारे में जानकारी मांगी गई थी।
करीब 3600 करोड़ रुपये के इस सौदे में घूसखोरी के आरोप सामने आने के बाद रक्षा मंत्रालय ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी थी। आरटीआई के तहत रक्षा मंत्रालय से इस सौदे की कीमत को लेकर मोलभाव और फाइल नोटिंग सहित पूरी जानकारी मांगी गई थी। इसके अलावा आवेदनकर्ता ने इस सौदे को लेकर प्राइस निगोसिएशन कमेटी की बैठक, सौदे को रद्द करने, अगस्तावेस्टलैंड की ओर से दिए गए पहले एस्टिमेट, विशेष सुविधाओं, जिसके कारण कीमत बढ़ी के अलावा उड़ान सीमा और केबिन की ऊंचाई में कमी के बारे में की गई विवेचना की जानकारी मांगी गई थी।
इस आवेदन को रक्षा मंत्रालय ने जवाब देने के लिए 16 जून को भारतीय वायु सेना के पास हस्तांतरित कर दिया। ऐसा आरटीआई कानून की धारा 6(3) के तहत किया गया, जिसमें जन प्राधिकरण के पास जानकारी नहीं होने पर उसे आवेदन हस्तांतरित करने का अधिकार है।
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जवाब में वायु सेना मुख्यालय ने कहा कि आरटीआई आवेदन में मांगी गई जानकारी मुख्यालय में उपलब्ध नहीं है। रोचक तथ्य यह है कि इस मामले में छह मई को लोकसभा में चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने सौदे के बारे में तमाम जानकारियां दी थीं। इतना ही नहीं मामले की जांच कर रही सीबीआई ने तमाम रिकॉर्ड इकट्ठा किए हैं और नियमों के मुताबिक जहां से ये रिकॉर्ड लिए जाते हैं वहां पर उसकी प्रति मौजूद रहती है।
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करीब 3600 करोड़ रुपये के इस सौदे में घूसखोरी के आरोप सामने आने के बाद रक्षा मंत्रालय ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी थी। आरटीआई के तहत रक्षा मंत्रालय से इस सौदे की कीमत को लेकर मोलभाव और फाइल नोटिंग सहित पूरी जानकारी मांगी गई थी। इसके अलावा आवेदनकर्ता ने इस सौदे को लेकर प्राइस निगोसिएशन कमेटी की बैठक, सौदे को रद्द करने, अगस्तावेस्टलैंड की ओर से दिए गए पहले एस्टिमेट, विशेष सुविधाओं, जिसके कारण कीमत बढ़ी के अलावा उड़ान सीमा और केबिन की ऊंचाई में कमी के बारे में की गई विवेचना की जानकारी मांगी गई थी।
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इस आवेदन को रक्षा मंत्रालय ने जवाब देने के लिए 16 जून को भारतीय वायु सेना के पास हस्तांतरित कर दिया। ऐसा आरटीआई कानून की धारा 6(3) के तहत किया गया, जिसमें जन प्राधिकरण के पास जानकारी नहीं होने पर उसे आवेदन हस्तांतरित करने का अधिकार है।
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जवाब में वायु सेना मुख्यालय ने कहा कि आरटीआई आवेदन में मांगी गई जानकारी मुख्यालय में उपलब्ध नहीं है। रोचक तथ्य यह है कि इस मामले में छह मई को लोकसभा में चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने सौदे के बारे में तमाम जानकारियां दी थीं। इतना ही नहीं मामले की जांच कर रही सीबीआई ने तमाम रिकॉर्ड इकट्ठा किए हैं और नियमों के मुताबिक जहां से ये रिकॉर्ड लिए जाते हैं वहां पर उसकी प्रति मौजूद रहती है।