फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   no need to sign on NPT, india counters china

भारत का चीन को करारा जबाब, 'परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करना जरूरी नहीं'

Fri, 20 May 2016 07:29 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 20 May 2016 07:29 PM IST
विज्ञापन
no need to sign on NPT, india counters china
परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करना जरूरत नहीं - फोटो : file photo

भारत ने चीन की उस दलील को नकार दिया है जिस में कहा गया था कि एनएसजी सदस्यता के लिए परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करना जरूरी है। भारत ने कहा है कि फ्रांस ने किसी परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं फिर भी वह एनएसजी का सदस्य है।

विज्ञापन


विदेश मामले के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा है कि इस मुद्दे को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि परमाणु अप्रसार संधि गैर एनपीटी देशों के साथ असैन्य परमाणु सहयोग की अनुमति देता है। अगर एनपीटी और एनएसजी का कोई संबंध है तो वो यह एनएसजी और आईएईए के सुरक्षा उपायों और निर्यात नियंत्रण के साथ है।

विज्ञापन


स्वरूप ने कहा कि एनएसजी सदस्यों को सुरक्षा उपायों और निर्यात नियंत्रण का सम्मान करना चाहिए साथ ही परमाणु आपूर्ति भी एनएसजी के द्वारा तय किए गए दिशा निर्देशों के अनुसार की जानी चाहिए। फ्रांस जो कि परमाणु अप्रसार संधि का सदस्य कुछ समय के लिए नहीं था लेकिन फिर भी एनएसजी का सदस्य था।
विज्ञापन
विज्ञापन


बता दें कि चीन ने हमेशा से ही भारत के एनएसजी में शामिल होने का विरोध किया है। चीन और पाकिस्तान न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) में भारत के प्रवेशाधिकार को छीनने के लिए साथ आए हैं। चीन ने पाकिस्तान का पक्ष लेते हुए कहा था कि एनएसजी में दोनों देशों को एंट्री मिले या किसी को भी नहीं। अब चीन ने एक नया पेंच डाला है उसके अनुसार भारत को परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने चाहिए। परमाणु अप्रसार संधि या एनपीटी परमाणु हथियारों का विस्तार रोकने और परमाणु तकनीकि के शांतिपूर्ण ढंग से इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का एक हिस्सा है।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा है कि एनएसजी सहित सभी बहुपक्षीय अप्रसार निर्यात नियंत्रण व्यवस्थाओं और एनएसजी को भी एनपीटी को महत्व देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर भारत के अलावा और भी देश एनएसजी में शामिल होने की इच्छा करने लगे तो यह अंतराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक चुनौती होगी। क्योंकि इस हिसाब से तो बिना एनपीटी पर हस्ताक्षर किए एनएसजी का सदस्य बना जा सकता है? उन्होंने कहा कि चीन नहीं चाहता की यह किसी एक देश पर लागू हो बल्कि सभी देशों पर लागू हो।


चीन के विदेश मामलों के उप मंत्री लियू झेनमिन ने इस बात से इनकार किया है कि उनका देश भारत के एनएसजी समूह में शामिल होने का विरोध कर हा है। उन्होंने कहा है कि वो सभी 48 देशों के साथ मिलकर इस मुद्दे का हल निकालेंगे जिसमें भारत भी शामिल होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed