फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   No need to bring slaughterhouses, meat processing units under EIA: Centre

NGT: 'बूचड़खानों को EIA के दायरे में लाने की जरूरत नहीं, पहले से दिशानिर्देश मौजूद', केंद्र ने एनजीटी को बताया

Mon, 18 Mar 2024 05:35 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 18 Mar 2024 05:35 PM IST
सार

NGT: केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने हाल ही में एनजीटी को एक हलफनामा सौंपा। इसमें मंत्रालय ने कहा कि बूचड़खानों या मांस प्रसंस्करण इकाइयों को पर्यावरण के दृष्टिकोण विनियमित करने के लिए जरूरी दिशानिर्देश या सुरक्षा उपाय पहले से ही मौजूद हैं।

विज्ञापन
No need to bring slaughterhouses, meat processing units under EIA: Centre
राष्ट्रीय हरित अधिकरण - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से कहा कि बूचड़खानों और मांस प्रसंस्करण इकाइयों को पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) अधिसूचना, 2006 के दायरे में लाने की जरूरत नहीं हैं। इसके लिए सरकार ने तर्क दिया कि पर्यावरण के नजरिए से उन्हें विनियमित करने के लिए दिशानिर्देश और सुरक्षा उपाय पहले से मौजूद हैं। 

विज्ञापन

दरअसल, पशु अधिकार कार्यकर्ता गौरी मौलेखी ने पिछले साल एनजीटी का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने मांग की थी कि बूचड़खानों और मांस प्रसंस्करण इकाइयों को ईआईए 2006 के दायरे में लाया जाए। उन्होंने बूचड़खानों में पानी की अधिक खपत, ठोस कचरे के अनुचित तरीके से निपटान से पानी दूषित होने और जूनोटिक (जानवरों से फैलने वाले) रोगों के खतरे को लेकर चिंता जताई थी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने हाल ही में एनजीटी को एक हलफनामा सौंपा। यह हलफनामा मंत्रालय द्वारा गठित आठ सदस्यीय कार्यसमूह की रिपोर्ट पर आधारित था। इसमें मंत्रालय ने कहा, बूचड़खानों या प्रसंस्करण इकाइयों को पर्यावरण के दृष्टिकोण विनियमित करने के लिए जरूरी दिशानिर्देश या सुरक्षा उपाय पहले से ही मौजूद हैं। बूचड़खानों या मांस प्रसंस्करण इकाइयों को ईआईए 2006 के दायरे में लाने की कोई आवश्यकता नहीं है। 

विज्ञापन

इसमें कहा गया है कि जिलाधिकारियों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास (एपीडा) सहित विभिन्न एजेंसियों का विनियमन ढांचा बूचड़खानों और मांस प्रसंस्करण से जुड़े पर्यावरणीय मुद्दों के समाधान के लिए पर्याप्त है। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी इकाइयों को ईआईए 2006 के दायरे में लाने से कोई खास मूल्यवर्धन नहीं होगा, क्योंकि केवल पहले मौजूद नियमों के क्रियान्वयन का है। 

मंत्रालय ने कहा कि याचिकार्ता (गौरी मौलेखी) की दलीलें खासतौर पर असंगठित बूचड़खानों और मांस प्रस्करण इकाइयों को लेकर हैं। कार्य समूह ने उनके आधुनिकीकरण को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया है। कार्य समूह की रिपोर्ट में कहा गया है कि नौ जानवरों तक की क्षमता वाले अवैध बूचड़खाने पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं और इन्हें अधिक कुशल तरीके से विनियमित किए जाने की जरूरत है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed