No-Confidence Motion: अविश्वास प्रस्ताव से आज तक भारत में नहीं गिरी कोई सरकार, इतिहास में 27 बार पेश हो चुका
सरकार के प्रति अविश्वास प्रस्ताव कितना गंभीर मामला हुआ करता था, इसे ऐसे समझें कि पहली दो सरकारों के खिलाफ इसे कभी नहीं लाया गया। चीन के खिलाफ 1962 के युद्ध में मिली पराजय जैसी विकट घटना के बाद अगस्त 1963 में पहली बार तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू सरकार के खिलाफ जेबी कृपलानी अविश्वास प्रस्ताव लाए।
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लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए बुधवार को सहमति मिल गई। भारतीय संसद के इतिहास में यह 28वां मौका होगा जब कोई सरकार इस प्रस्ताव का सामना करेगी। हालांकि, आज तक किसी अविश्वास प्रस्ताव से कोई सरकार नहीं गिरी।
अब तक आए अविश्वास प्रस्तावों में सबसे ज्यादा 15 प्रस्ताव इंदिरा गांधी के खिलाफ थे। उन्होंने सभी को पराजित किया। इसके बाद सबसे ज्यादा तीन-तीन बार लाल बहादुर शास्त्री और पीवी नरसिंह राव के खिलाफ प्रस्ताव आए। ताजा प्रस्ताव को गिनें तो मोरारजी देसाई और नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ दो-दो प्रस्ताव हुए। इनके अलावा जवाहरलाल नेहरू, राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ एक-एक बार यह प्रस्ताव लाया गया था। इन्हें लेकर संसद के इतिहास व भारतीय राजनीति की कई रोचक बातें भी जुड़ीं हैं।
चीन से युद्ध में हार के बाद आया था पहला प्रस्ताव
सरकार के प्रति अविश्वास प्रस्ताव कितना गंभीर मामला हुआ करता था, इसे ऐसे समझें कि पहली दो सरकारों के खिलाफ इसे कभी नहीं लाया गया। चीन के खिलाफ 1962 के युद्ध में मिली पराजय जैसी विकट घटना के बाद अगस्त 1963 में पहली बार तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू सरकार के खिलाफ जेबी कृपलानी अविश्वास प्रस्ताव लाए। इस पर चार दिन में 40 सांसदों ने कुल 21 घंटे बहस की। प्रस्ताव 62 के मुकाबले 347 मतों से पराजित हुआ। हालांकि, खुद नेहरू ने कहा, प्रस्ताव पर बहस कई मायनों में रोचक रही और फायदेमंद भी। मैं इस प्रस्ताव और बहस का स्वागत करता हूं। मुझे लगता है कि समय-समय पर ऐसे परीक्षण होते रहें तो अच्छा होगा। इसके बाद वर्ष 1964 से 1975 के बीच 15 बार अविश्वास प्रस्ताव लाए गए।
इनमें से तीन नेहरू के निधन के बाद प्रधानमंत्री बने लाल बहादुर शास्त्री सरकार के खिलाफ और 15 इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ थे। माकपा सांसद ज्योतिर्मय बसु नवंबर 1973 से मई 1975 के बीच इंदिरा गांधी के खिलाफ 4 बार अविश्वास प्रस्ताव लाए जो एक रिकॉर्ड है।
तीन बार विश्वास मत में सरकार गिरी
देश में जिन तीन विश्वास मत में सरकारें गिरीं हैं, उनमें 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार शामिल है। इसके अलावा 1990 में वीपी सिंह सरकार और 1997 में एचडी देवगौड़ा सरकार भी विश्वास प्रस्ताव पर मतदान में गिर गई थीं। 7 नवंबर, 1990 को वीपी सिंह ने संसद में विश्वास प्रस्ताव पेश किया। राम मंदिर मुद्दे पर भाजपा के समर्थन वापस लेने के कारण प्रस्ताव पर सरकार हार गई। वह प्रस्ताव 142 के मुकाबले 346 मतों से गिर गया था। इसी तरह, 1997 में, एचडी देवगौड़ा सरकार 11 अप्रैल को विश्वास मत हार गई। देवगौड़ा की 10 महीने पुरानी गठबंधन सरकार गिर गई क्योंकि 292 सांसदों ने सरकार के खिलाफ मतदान किया, जबकि 158 सांसदों ने समर्थन किया। वहीं, 1998 में सत्ता में आने के बाद, अटल बिहारी वाजपेयी ने विश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जो 17 अप्रैल, 1999 को अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) की वापसी के कारण एक वोट से गिर गया था।