प्रधानमंत्री फसल बीमा प्रीमियम में किसानों की नहीं बदलेगी हिस्सेदारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रीमियम में किसानों की हिस्सेदारी में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव आशीष के भूटानी ने शुक्रवार को बताया कि योजना के तहत प्रीमियम में किसानों की हिस्सेदारी को लेकर कोई बदलाव नहीं किया गया है।
फरवरी, 2016 में शुरू की गई योजना के तहत खरीफ फसल के लिए किसानों को बीमा प्रीमियम का 2 फीसदी और रबी फसल के लिए 1.5 फीसदी हिस्से का भुगतान करना होता है। वहीं, वाणिज्यिक फसलों और बागवानी के क्षेत्र में 5 फीसदी प्रीमियम देना पड़ता है। भूटानी ने कहा, न तो किसानों के प्रीमियम में कोई बदलाव किया गया है और न ही इसे भविष्य में खत्म किया जाएगा।
राज्य सब्सिडी समय पर नहीं आने से होती से किसानों को भुगतान में देरी
समाचार पत्र ‘बिजनेस लाइन’ द्वारा आयोजित एक कृषि सम्मेलन में पीएमएफबीवाई के मुख्य कार्याधिकारी और कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव आशीष के भूटानी ने किसानों को भुगतान दावों के निस्तारण में देरी संबंधी आलोचनाओं के बारे में कहा कि यह मुख्य रूप से तीन कारणों से होता है।
उन्होंने कहा कि इस देर का कारण या तो राज्य सब्सिडी का समय पर नहीं आना होता है जो देरी से भुगतान किए जाने का सबसे बड़ा कारण है। दूसरा बीमा कंपनियों को फसल कटाई प्रयोग (सीसीई) आंकड़ों को देने में होने वाली देरी है और तीसरा कारण राज्यों के द्वारा संग्रहित सीसीई आंकड़ों पर कंपनियों द्वारा उठाया गया विवाद है। भूटानी ने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए योजना में कुछ बदलाव किए गए हैं।
निर्धारित समय सीमा से परे बीमा कंपनियों को अपेक्षित प्रीमियम सब्सिडी जारी करने में काफी देरी किए जाने की स्थिति में राज्यों को बाद के सत्रों में योजना को लागू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि खरीफ और रबी सीजन के लिए इस प्रावधान को लागू करने की कट-ऑफ तारीखें क्रमशः 31 मार्च और 30 सितंबर होंगी।
बीमा कंपनियों की योजना के जरिए धन लाभ होने का किया खंडन
बीमा कंपनियां को योजना के जरिए धन लाभ होने संबंधी खबरों का खंडन करते हुए अधिकारी ने कहा कि यह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि मोटर बीमा में थर्ड पार्टी आकलनकर्ता होता है, लेकिन यहां दावा प्रतियोगिता की पूरी कवायद राज्य सरकार के पास होती है। कंपनियों के पास राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रयोगों का सह-निरीक्षण करने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि यदि सीसीई के आंकड़े समय पर नहीं दिए जाते हैं, तो दावों के समय पर भुगतान के मकसद से आंकड़ों को जुटाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाएगा।
अधिकारी ने कहा कि पीएमएफबीवाई योजना में वर्तमान में सीसीई पुरानी तकनीक पर चल रही है, जिसमें हेरफेर का खतरा है। अधिकारी ने कहा कि इसमें प्रौद्योगिकी आधारित मूल्यांकन की ओर कदम उठाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार प्रौद्योगिकी के माध्यम से फसल और क्षेत्र विशेष उपज अनुमान पर काम करने के लिए 13 एजेंसियों को काम पर रखा है।