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NITI Aayog: 'डिजिटल दुनिया में सबसे बड़ी प्रयोगशाला बना भारत', सीईओ सुब्रमण्यम बोले- अब कोई भी प्रयोग संभव
Sat, 16 Nov 2024 03:10 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हैदराबाद
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sat, 16 Nov 2024 03:10 AM IST
सार
नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने बताया कि 2047 तक भारत के 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है, जो अमेरिका और चीन की मौजूदा अर्थव्यवस्थाओं से भी बड़ी होगी।
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नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुूब्रमण्यम (फाइल)
- फोटो : ANI
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विस्तार
नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने शुक्रवार को कहा कि भारत अब डिजिटल दुनिया में सबसे बड़ी प्रयोगशाला बन चुका है, जहां विशाल डिजिटल बुनियादी ढांचे के कारण कोई भी बड़ा प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने यह बात हैदराबाद में इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) में दिए अपने मुख्य भाषण में कही।
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सुब्रमण्यम ने बताया कि 2047 तक भारत के 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है, जो अमेरिका और चीन की मौजूदा अर्थव्यवस्थाओं से भी बड़ी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पिछले 10 वर्षों में हर हफ्ते एक विश्वविद्यालय और दो कॉलेज खोले गए, लेकिन अभी भी सिर्फ 29 फीसदी लोग ही विश्वविद्यालयों में दाखिला लेते हैं।
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भारत ने डिजिटल पहचान और बैंक खातों की बनाई विशाल व्यवस्था
उन्होंने भारत की डिजिटल पहचान को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल पहचान और बैंक खातों की एक विशाल व्यवस्था बनाई है, जो दुनिया में कहीं और संभव नहीं है। उदाहरण के तौर पर, भारत में 140 करोड़ लोग डिजिटल पहचान से जुड़े हैं और 120 करोड़ लोगों के पास बैंक खाता है।
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भारत में तकनीकी नवाचारों की चल रही लहर
एनआईटीआई सीईओ सुब्रमण्यम ने कहा कि भारत में तकनीकी नवाचारों की लहर चल रही है, जैसे UPI (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) जो एक प्रमुख नवाचार है। इसके कारण, भारत में वैश्विक वित्तीय लेन-देन का 48-50% हिस्सा होता है। प्रति माह 10 अरब लेनदेन तेजी से हो रहे हैं। यह मूल्य के लिहाज से कम और मात्रा के लिहाज से बहुत अधिक हो सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत को सिर्फ एक समृद्ध देश ही नहीं, बल्कि एक समावेशी और समग्र राष्ट्र बनना चाहिए। इसके लिए शिक्षा, शोध और नवाचार पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आज 1,200 विश्वविद्यालय हैं, जिनमें चार करोड़ से कुछ अधिक छात्र हैं। कॉलेजों में 50 फीसदी छात्र हों, इसके लिए देश में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की संख्या दोगुनी करने की जरूरत है।
देश में पिछले दशक के दौरान हुए बदलावों पर डाला प्रकाश
सुब्रमण्यम ने पिछले दशक के दौरान देश में हुए बदलाव के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि अगले साल के अंत तक भारत में प्रत्येक गांव तक पीने का पानी पहुंच जाएगा। उन्होंने कहा कि हर घर बिजली आपूर्ति से जुड़ा है। हर गांव तक सड़क है। हमारे पास आवास है जो तेजी से बनाया जा रहा है। पिछले 10 वर्षों में 25 करोड़ लोग गंभीर गरीबी से बच गए हैं। उन्होंने देश में राजमार्गों, रेलवे (वंदे भारत ट्रेनों सहित) और अन्य में परिवर्तन पर भी प्रकाश डाला।
जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में अग्रणी बन सकता है भारत
सुब्रमण्यम ने यह भी कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में अग्रणी बन सकता है, क्योंकि इस मुद्दे से निपटने के लिए प्रौद्योगिकियों का अभी तक पूरी तरह से आविष्कार नहीं हुआ है। यह देखते हुए कि पश्चिम के अधिकांश देशों ने स्थिर अर्थव्यवस्थाएं विकसित की हैं, जिन्हें हरित भविष्य के लिए पुनर्जीवित और पुन: इंजीनियर किया जाना है। उन्होंने कहा कि भारत के बड़े हिस्से में इस तरह की री-इंजीनियरिंग की आवश्यकता नहीं है और जलवायु-अनुकूल गतिशीलता और बिजली प्रणाली विकसित की जा सकती है।
देश को मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं बना रहा नीति आयोग
अंत में, उन्होंने कहा कि नीति आयोग देश को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं बना रहा है, जिसमें नए तकनीकी क्षेत्रों में नवाचार, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी पहलें शामिल हैं। भारत को वैश्विक स्तर पर प्रौद्योगिकियों के लिए मानक स्थापित करने चाहिए और नीति आयोग इस दिशा में काम कर रहा है।