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Nithari Case: हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, सीबीआई ने दायर की है याचिका
Wed, 14 Aug 2024 03:19 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 14 Aug 2024 03:19 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने बीती 19 जुलाई को सीबीआई समेत अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करने पर सहमति जताई थी। अदालत ने इन याचिकाओं पर कोली को नोटिस भी जारी कर उसका जवाब मांगा था।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट बुधवार को निठारी मामले में सुनवाई के लिए तैयार हो गया। दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीते साल अपने एक फैसले में निठारी मामले के आरोपी सुरेंद्र कोली को दोषमुक्त करार दिया था। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सीबीआई और कई अन्य द्वारा दायर याचिकाओं को संलग्न कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने बीती 19 जुलाई को सीबीआई समेत अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करने पर सहमति जताई थी। अदालत ने इन याचिकाओं पर कोली को नोटिस भी जारी कर उसका जवाब मांगा था।
एक पीड़ित के पिता ने भी दायर की है याचिका
निठारी कांड में पीड़ितों में से एक के पिता ने भी सुरेंद्र कोली को दोषमुक्त करने के उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। निठारी मामले में सत्र न्यायालय ने मोनिंदर सिंह पंधेर को बरी कर दिया था, जबकि उसके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली को 28 सितंबर 2010 को मौत की सजा सुनाई थी। 12 मामलों में कोली और दो मामलों में पंधेर को दी गई मौत की सजा को पलटते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि 'अभियोजन पक्ष दोनों आरोपियों के अपराध को परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर साबित करने में विफल रहा और यह जांच एजेंसियों द्वारा जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात से कम नहीं है।'
क्या था निठारी कांड
निठारी मामले में पंधेर और कोली पर बलात्कार और हत्या का आरोप लगाया गया था और उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी। इस मामले में यौन उत्पीड़न, क्रूर हत्या और संभावित नरभक्षण के आरोपों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। पंधेर और कोली के खिलाफ 2007 में कुल 19 मामले दर्ज किए गए थे। सीबीआई ने सबूतों के अभाव में तीन मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। शेष 16 मामलों में, कोली को पहले तीन में बरी कर दिया गया था और एक में उसकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था। 29 दिसंबर, 2006 को राष्ट्रीय राजधानी की सीमा से लगे नोएडा के निठारी में पंढेर के घर के पीछे एक नाले से आठ बच्चों के कंकाल मिलने के साथ ही सनसनीखेज हत्याओं का खुलासा हुआ।
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एक पीड़ित के पिता ने भी दायर की है याचिका
निठारी कांड में पीड़ितों में से एक के पिता ने भी सुरेंद्र कोली को दोषमुक्त करने के उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। निठारी मामले में सत्र न्यायालय ने मोनिंदर सिंह पंधेर को बरी कर दिया था, जबकि उसके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली को 28 सितंबर 2010 को मौत की सजा सुनाई थी। 12 मामलों में कोली और दो मामलों में पंधेर को दी गई मौत की सजा को पलटते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि 'अभियोजन पक्ष दोनों आरोपियों के अपराध को परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर साबित करने में विफल रहा और यह जांच एजेंसियों द्वारा जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात से कम नहीं है।'
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क्या था निठारी कांड
निठारी मामले में पंधेर और कोली पर बलात्कार और हत्या का आरोप लगाया गया था और उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी। इस मामले में यौन उत्पीड़न, क्रूर हत्या और संभावित नरभक्षण के आरोपों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। पंधेर और कोली के खिलाफ 2007 में कुल 19 मामले दर्ज किए गए थे। सीबीआई ने सबूतों के अभाव में तीन मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। शेष 16 मामलों में, कोली को पहले तीन में बरी कर दिया गया था और एक में उसकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था। 29 दिसंबर, 2006 को राष्ट्रीय राजधानी की सीमा से लगे नोएडा के निठारी में पंढेर के घर के पीछे एक नाले से आठ बच्चों के कंकाल मिलने के साथ ही सनसनीखेज हत्याओं का खुलासा हुआ।
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