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आत्मनिर्भर भारत के तहत स्कूल और उच्च शिक्षण के छात्र टोल फ्री नंबर पर मांग सकते हैं मदद
Wed, 22 Jul 2020 02:53 AM IST
अवधेश कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: अवधेश कुमार
Updated Wed, 22 Jul 2020 02:53 AM IST
सार
- करीब 32 करोड़ छात्र व युवा प्रभावित, सबसे अधिक पहली से पांचवीं कक्षा के 12 करोड़ छात्र शामिल
- छात्रों और अभिभावकों को तनाव अब मनोदर्पण करेगा दूर
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भारतीय छात्र
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
कोविड-19, लॉकडाउन, घर में बंद रहने और ऑनलाइन क्लासेज की पढ़ाई का तनाव अब मनोदर्पण दूर करेगा। आत्मनिर्भर भारत के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय के विशेषज्ञों ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों केतनाव को दूर करने के लिए पहली मनोवैज्ञानिक मनोदर्पण गाइडलाइन बनायी है। टोल फ्री 8448440632 नंबर पर सुबह आठ से शाम आठ बजे तक फोन करने पर मनोचिकित्सक परामर्श देंगे।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ने मंगलवार को इस मनोदर्पण योजना की शुरुआत की। इससे पहले केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 17 मई को आत्मनिर्भर भारत के तहत मनोदर्पण शुरू करने की घोषणा की थी। निशंक ने कहा कि इससे छात्रों और अभिभावकों को इस महामारी के चलते होने वाले विभिन्न प्रकार के तनाव को दूर करने में मदद मिलेगी। पूरी दुनिया कोविड.19 की एक विकट परिस्थिति से गुजर रही है। ऐसे में स्वाभाविक है कि दबाव और तनाव मनुष्य को प्रभावित करे।
हमें इस स्थिति को एक चुनौती के रूप में स्वीकार करना है । हमें परिस्थितियों का गुलाम बनने की बजाय उनका मुकाबला करना है। इस कार्यक्रम के तहत एक वेबसाइट भी है जिसमें निर्देश, सुझाव हैं। इस पोर्टल पर अभिभावक या शिक्षक समस्याएं बताने के साथ सुझाव भी दे सकते हैं। इसमें पांच सौ से अधिक चिकित्सक सहयोग देंगे। एक इंटरैक्टिव ऑनलाइन चैट प्लेटफार्म भी शुरू किया है।
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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ने मंगलवार को इस मनोदर्पण योजना की शुरुआत की। इससे पहले केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 17 मई को आत्मनिर्भर भारत के तहत मनोदर्पण शुरू करने की घोषणा की थी। निशंक ने कहा कि इससे छात्रों और अभिभावकों को इस महामारी के चलते होने वाले विभिन्न प्रकार के तनाव को दूर करने में मदद मिलेगी। पूरी दुनिया कोविड.19 की एक विकट परिस्थिति से गुजर रही है। ऐसे में स्वाभाविक है कि दबाव और तनाव मनुष्य को प्रभावित करे।
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हमें इस स्थिति को एक चुनौती के रूप में स्वीकार करना है । हमें परिस्थितियों का गुलाम बनने की बजाय उनका मुकाबला करना है। इस कार्यक्रम के तहत एक वेबसाइट भी है जिसमें निर्देश, सुझाव हैं। इस पोर्टल पर अभिभावक या शिक्षक समस्याएं बताने के साथ सुझाव भी दे सकते हैं। इसमें पांच सौ से अधिक चिकित्सक सहयोग देंगे। एक इंटरैक्टिव ऑनलाइन चैट प्लेटफार्म भी शुरू किया है।
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