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निर्भया फंड: तीन साल में दिए गए 3,000 करोड़, खर्च मात्र 400 करोड़

Sat, 06 May 2017 11:24 AM IST
amarujala.com, Presented By: अजय कुमार सिंह
amarujala.com, Presented By: अजय कुमार सिंह Updated Sat, 06 May 2017 11:24 AM IST
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nirbhaya fund: rs 3000 cr for womens safety only rs 400 cr spent
बलिया की बेटी पर बन रही फिल्म ‘नेवर अगेन निर्भया’ - फोटो : amar ujala

दिल्ली में करीब साढ़े चार साल पहले दरिंदों की शिकार निर्भया को सुप्रीम इंसाफ मिला लेकिन निर्भया फंड खर्च करने में सरकारें और संस्थाएं फिसड्डी साबित हुईं। निर्भया कांड के बाद देश व्यापी महिलाओं की सुरक्षा के लिए अभियान चलाया गया और 3000 करोड़ रुपये का एक निर्भया फंड बनाया गया। लेकिन विंडबना ये कि इन चार सालों में केवल 400 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए।

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बता दें कि केन्द्र सरकार ने 2013 के आम बजट में निर्भया कोष घोषित किया था, जिसमें 1,000 करोड़ रुपये प्रति वर्ष खर्च करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन अभी तक इस फंड में से केवल 400 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
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मुंबई मिरर की खबर के मुताबिक, महिला और बाल विकास मंत्रालय ने जनवरी 2017 में बताया, "निर्भय निधि के तहत, 21 प्रस्तावों के लिए 2195.97 करोड़ रुपये अब तक प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 2187.47 करोड़ रुपये की 16 प्रपोजल को एक उच्चस्तरीय कमिटी ने मंजूरी दे दी है।"
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निर्भया निधि का सबसे महत्वपूर्ण घटक है, सेंट्रल विलीटी कॉम्पेन्सेशन फंड जिसमें 200 करोड़ रुपये का संग्रह है। इस फंड के तहत बलात्कार पीड़ितों की मदद की जाती है। रेप या ऐसिड अटैक की पीड़िताओं को 3 लाख रुपये का मुआवजा देने का प्रावधान है। इसमें से 50 फीसदी भाग राज्य सरकारें वहन करेंगी लेकिन राज्य सरकारें अपना भाग नहीं दे रही हैं। राज्य सरकारों का कहना है कि उनके पास फंड की कमी है। इसके अलावा मंत्रालय ने वन स्टॉप सेंटर, वीमेन हेल्पलाइन और महिला पुलिस वॉलंटियर की योजनाएं शुरू की गई थीं।

सुरक्षा के लिहाज से अब भी बदहाल दिल्ली

nirbhaya fund: rs 3000 cr for womens safety only rs 400 cr spent
नई दिल्ली - फोटो : SELF

वहीं तमाम सिफारिश और बजट प्रावधानों के बावजूद दिल्ली में ना तो सीसीटीवी कैमरे लगे और ना ही अंधेरी जगह पर लाइट्स लग सकी हैं। सिर्फ 200 बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाए, बाकी के लिए अभी तक कैबिनेट का फैसला तक नहीं हुआ। सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी लगाने का काम तक नहीं शुरू हुआ।

बलात्कार पीड़िता को हर संभव मदद एक ही जगह पर मिल सके इसके लिए वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर बनाए जाने थे, उसमें भी प्रगति नहीं हुई है। हालात यह है कि सार्वजनिक स्थल पर सीसीटीवी का बजट 2016-17 में खर्च नहीं हो पाया तो बसों में सीसीटीवी सिर्फ पॉयलट प्रोजेक्ट तक सिमटकर रह गया। 
     
बलात्कार पीड़िता की सहायता के लिए वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर बनाए जाने थे। शुरुआत में कुछ जगह स्वास्थ्य विभाग ने बनाए थे लेकिन बाद में महिला एवं बाल विकास और उससे दिल्ली महिला आयोग को ये काम शिफ्ट हो गया। दिल्ली महिला आयोग एक भी सेंटर स्थापित नहीं कर पाया। दिल्ली महिला आयोग के प्रवक्ता भूपेन्द्र का कहना है कि केन्द्र सरकार से फंड नहीं मिला। इसके लिए आयोग ने केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को पत्र भी लिखा है। फंड मिलने के बाद प्रस्ताव तैयार करने का काम भी विभाग का है।       

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