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निर्भया केस : फांसी से बचने को प्रदूषण की दुहाई, सुप्रीम कोर्ट ने एक-एक 'कुतर्क' पर लगाई झाड़

Wed, 18 Dec 2019 09:13 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित कुमार Updated Wed, 18 Dec 2019 09:13 PM IST
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Nirbhaya case: Supreme Court Slams convict referred to pollution in review plea
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media

निर्भया के हत्यारों में से एक अक्षय ने फांसी के फंदे से बचने के लिए अपनी सुप्रीम कोर्ट याचिका में जो अजीबोगरीब तर्क दिया था, उसे पढ़कर बुधवार को सुनवाई कर रहे न्यायधीश को भी गुस्सा आ गया। जस्टिस आर भानुमति ने इसे लेकर अक्षय के वकील को भी झाड़ लगाई। 

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अक्षय के वकील एपी सिंह ने पुनर्विचार याचिका में लिखा था कि लोग वैसे ही प्रदूषण से मर रहे हैं, ऐसे में फांसी देने का क्या औचित्य है। साथ ही उसने अपने 'कुतर्कों' में गांधी, सतयुग, कलयुग तक का भी जिक्र किया था। 

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दलील-1 : प्रदूषण से मर रहे लोग, तो फिर फांसी क्यों 

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस याचिका को खारिज कर दिया। मगर उससे पहले इतने गंभीर मामले में इस तरह के हल्के तर्क पेश करने पर झाड़ भी लगाई। जस्टिस आर भानुमति ने इस तरह की टिप्पणी को बेहद 'दुर्भाग्यजनक' बताया। 

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दलील-2 : कई देशों में फांसी की सजा खत्म 

याचिका खारिज करते हुए अपना फैसला सुनाते हुए पीठ ने कहा, 'यह बहुत ही निराशाजनक है कि इतने गंभीर मामले में इस तरह की दलीलें दी गईं।' दोषी ने अपनी याचिका में उन देशों का भी हवाला दिया था, जहां फांसी की सजा खत्म हो चुकी है। इस पर अदालत ने कहा, 'जब तक मौत की सजा यहां, हम कुछ नहीं कर सकते। यह काम विधानमंडल का है।' अक्षय के वकील ने इन्हीं दो दलीलों पर अपने मुवक्किल को फांसी नहीं देने की अपील की थी। 

दलील-3 : फांसी जीने के अधिकार और अहिंसा के सिद्धांत के खिलाफ 

अक्षय के वकील ने पुनर्विचार याचिका में फांसी को मानवाधिकार उल्लंघन बताया था। याचिका में कहा गया था कि यह जीने के अधिकार को छीनता है और साथ ही यह अहिंसा के सिद्धांत के खिलाफ है। पीठ ने कहा, 'पुनर्विचार याचिका में कहा गया कि सिर्फ गरीब लोगों को ही फांसी दी जाती है। इस तरह के तर्कों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।'

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