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निर्भया मामला: 6 साल बाद भी मुकम्मल नहीं हुआ फैसला, अब भी न्याय का इंतजार

Mon, 09 Jul 2018 03:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 09 Jul 2018 03:46 PM IST
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Nirbhaya Case: Know all about what happened till 16 December 2012 to yet

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप मामले के आरोपियों की पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए उनकी फांसी की सजा को बरकरार रखा है। मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस आर भानुमति और अशोक भूषण की पीठ ने चार आरोपियों में से तीन द्वारा दायर की गई पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। पिछले साल 5 मई 2017 को देश की सर्वोच्च अदालत ने फास्ट ट्रैक कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट की द्वारा दी गई मौत की सजा को बरकरार रखा था।

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क्या है निर्भया मामला

16 दिसंबर 2012 को 23 साल की पैरामेडिकल छात्रा के साथ चलती बस में 6 लोगों ने गैंगरेप करने के साथ ही हैवानियत की सारी सीमाएं लांघ दी थी। निर्भया के साथ उसका एक दोस्त मौजूद था जिसे कि आरोपियों ने बुरी तरह पीटा था। निर्भया के साथ बलात्कार करने के बाद आरोपियों ने उसके निजी अंगों में लोहे की रॉड डाल दी थी। इसके बाद बुरी तरह जख्मी और नग्न हालत में उसे और उसके दोस्त को हाईवे से नीचे फेंककर आरोपी फरार हो गए थे। दोनों को बस से कुचलकर मारने की भी कोशिश की गई थी।
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पूरे देश में हुआ था विरोध

निर्भया कांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। लड़की के साथ हुई दरिंदगी की खबर सुनने के बाद पूरा देश उसके आरोपियों को सजा दिलाने के लिए सड़कों पर उतर गया था। इंडिया गेट और जंतर-मंतर पर कैंडल मार्च निकालने के साथ ही लोगों ने काफी विरोध प्रदर्शन किया था। इस घटना के कारण पूरे देश में विरोध की आंधी आ गई थी। घटना ने मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार को बैकफुट पर लाकर खड़ा कर दिया था। पीड़िता को नाजुक हालत में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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6 आरोपी गिरफ्तार

निर्भया कांड में शामिल सभी 6 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। मामले के पांच आरोपी बालिग तो एक नाबालिग था। बताया जा रहा था कि निर्भया के साथ सबसे ज्यादा दरिंदगी नाबालिग आरोपी ने ही की थी। पांचों आरोपियों को दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया था। यहां आरोपी बस ड्राइवर राम सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। नाबालिग को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत तीन साल की सजा देते हुए बाल सुधार गृह भेजा गया था। वहीं बाकी के चारों आरोपियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चलाया गया था।

Nirbhaya Case: Know all about what happened till 16 December 2012 to yet

सिंगापुर में पीड़िता की मौत

एक तरफ जहां सड़क से लेकर सोशल मीडिया और संसद भवन में इस कांड की चर्चा हो रही थी। वहीं दूसरी करफ पीड़िता की हालत नाजुक बनी हुई थी। उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। कई सर्जरी के बाद भी पीड़िता ठीक नहीं हो पा रही थी। जनाक्रोश की वजह से सरकार को बेहतर इलाज के लिए उसे सफदरजंग से हटाकर सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि 29 दिसंबर की रात को करीब सवा दस बजे निर्भया ने सिंगापुर दम तोड़ दिया था।

फास्ट ट्रैक और दिल्ली हाईकोर्ट ने दी सजा-ए-मौत

सभी चार आरोपियों के खिलाफ दिल्ली की फास्ट ट्रैक में मामला चलाया गया। कोर्ट ने 10 सितंबर, 2013 को सभी आरोपियों को मौत की सजा सुनाई। जिसके बाद आरोपियों ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 जनवरी 2014 को अपना फैसला सुरक्षित रखा और 13 मार्च 2014 को फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले को बरकरार रखने का फैसला सुनाते हुए उनकी सज-ए-मौत बरकरार रखी।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

चारों आरोपियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। मामले में दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने 27 मार्च 2017 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इसके बाद 5 मई 2017 को अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी की फांसी की सजा पर मुहर लगा दी थी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि इस घटना ने इंसानियत को शर्मसार करने का काम किया है। सोमवार को तीन आरोपियों द्वारा दायर की गई पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

निर्भया के बाद इन कानूनों में हुए बदलाव

निर्भया कांड के बाद 3 फरवरी 2013 को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 181 और 182 में संशोधन किया गया। इसके तहत बलात्कार से जुड़े कानून को पहले से ज्यादा सख्त बनाया गया। बलात्कार के आरोपियों को फांसी की सजा मिल सके इसका प्रवाधन किया गया। इसके अलावा बलात्कार की सजा को 7 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया। 22 दिसंबर 2015 को संसद में जुवेनाइल जस्टिस बिल लाया गया। जिसके अंतर्गत 16 साल या उससे अधिक उम्र के आरोपियों को जघन्य अपराध करने पर बालिग मानते हुए व्यस्कों की तरह सजा देने का प्रावधान किया गया। इसके अलावा बलात्कार, बलात्कार से हुई मृत्यु, सामूहिक दुष्कर्म और एसिड-अटैक जैसे महिलाओं के साथ होने वाले अपराध जघन्य अपराध की श्रेणी में लाए गए।

Nirbhaya Case: Know all about what happened till 16 December 2012 to yet

जेएस वर्मा कमिटी

निर्भया कांड के बाद देश में बलात्कार और यौन शोषण से जुड़े मामलों में कानून को बेहतर बनाने के लिए एक समिति का गठन किया गया। जस्टिस जेएस वर्मा के नेतृत्व में एक समिति बनाई गई जिसे कि सरकार को अपनी सिफारिश देनी थी। सरकार के सामने समिति ने इन मामलों से जुड़े कानून को सख्त बनाने की जरूरत पर बल दिया था। जस्टिस वर्मा ने लड़कियों का पीछा करने, घूरने जैसे अपराध को सजा के अंतर्गत लाने का सुझाव दिया था। समिति ने 29 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी और उसे 80 हजार सुझाव मिले थे। समिति ने यह सिफारिशे की थीं:

-महिला के कपड़े फाड़ने की कोशिश पर 7 साल की सजा 

-बदनीयती से देखने या अश्लील इशारे करने पर 1 साल की सजा

-इंटरनेट पर जासूसी करने पर 1 साल की सजा

-मानव तस्करी के मामले में पीड़ित की सहमति गैरजरूरी हो और 7 साल की सजा दी जाए। बच्चों की तस्करी के मामले में सरकार ठोस कदम उठाए और एक डेटाबेस बनाए।

-बलात्कार के मामले दर्ज करने में नाकाम रहने या देरी करने वाले अफसरों पर कार्रवाई होनी चाहिए

-पीड़िता की मेडिकल जांच के लिए दिया गया प्रोटोकॉल लागू किया जाए

-सैन्य बलों की तरफ से यौन हिंसा को सामान्य कानून के तहत लाया जाए

-हिंसाग्रस्त इलाकों में महिला अपराधों की जांच के लिए स्पेशल कमिश्नर तैनात हों

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