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महाराष्ट्र: बार-रेस्तरां पर छापा नहीं मारने की एवज में लिए थे नौ लाख, पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर और अन्य के खिलाफ आरोप पत्र में खुलासा
Sat, 04 Dec 2021 10:46 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sat, 04 Dec 2021 10:46 PM IST
सार
अपराध शाखा पुलिस इकाई-11 ने अपने पूर्व मुखिया परमबीर सिंह और तीन अन्य पर 400 पेज का आरोप पत्र दाखिल किया है। परमबीर सिंह ने इस मामले में पिछले सप्ताह बयान दर्ज कराया था। दो दिन पहले महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था।
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परमबीर सिंह
- फोटो : ANI
विस्तार
गोरेगांव के कारोबारी बिमल अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि साझेदारी में चल रहे दो बार और रेस्तरां पर छापा नहीं मारने की एवज में उन्होंने परमबीर सिंह और अन्य पुलिस अधिकारियों को नौ लाख रुपये दिए थे। यही नहीं, उन्हें 2.92 लाख रुपये कीमत के दो स्मार्टफोन खरीदकर देने के लिए भी मजबूर किया गया। आरोप जनवरी 2020 और मार्च 2021 से संबंधित हैं। इनकी रिपोर्ट भारतीय दंड संहिता की धारा 384 और 385 के तहत दर्ज हुई थी।
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अपराध शाखा पुलिस इकाई-11 ने अपने पूर्व मुखिया परमबीर सिंह और तीन अन्य पर 400 पेज का आरोप पत्र दाखिल किया है। परमबीर सिंह ने इस मामले में पिछले सप्ताह बयान दर्ज कराया था। दो दिन पहले महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में दाखिल आरोप पत्र में अन्य आरोपी बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे, सुमित सिंह और अल्पेश पटेल हैं। विशेष लोक अभियोजक एडवोकेट शेखर जगताप ने बताया कि सचिन वाजे, पूर्व पुलिस कमिश्नर और अन्य के खिलाफ रिपोर्ट 23 जुलाई को गोरेगांव थाने में दर्ज हुई थी। बाद में जांच अपराध शाखा को सौंपी गई थी।
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तत्कालीन गृह मंत्री पर लगाए थे आरोप
अपने खिलाफ भ्रष्टाचार और उगाही के छह मामले दर्ज होने के बाद 1988 बैच के आईपीएस परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर तत्कालीन गृह मंत्री और एनसीपी के नेता अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार और दुराचरण के आरोप लगाए थे। इसके बाद 17 मार्च को उन्हें कमिश्नर पद से हटाकर होमगार्ड का जनरल कमांडर बना दिया गया था।
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जबरन वसूली का 75 प्रतिशत परमबीर सिंह को जाएगा और बाकी को वाजे अपनी जेब में डाल देगा
मुंबई पुलिस ने जबरन वसूली के एक मामले में अपने आरोपपत्र में दावा किया है कि बर्खास्त किए गए पुलिस अधिकारी सचिन वाजे ने मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह को नंबर 1 बताया और उनकी ओर से जबरन वसूली की। आरोप पत्र में बताया कि जबरन वसूली का 75 प्रतिशत परमबीर सिंह को जाएगा और बाकी को वाजे अपनी जेब में डाल देगा।
मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने शनिवार को उपनगरीय गोरेगांव पुलिस थाने में जबरन वसूली के एक मामले में परमबीर सिंह, वाजे और दो अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया। मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट एसबी भाजीपाले के समक्ष 400 पृष्ठों से अधिक का आरोप पत्र दायर किया गया।
अन्य आरोपियों में से सुमित सिंह और अल्पेश पटेल जमानत पर बाहर हैं जबकि विनायक सिंह और रियाज भट्टी को वांछित आरोपी के रूप में दिखाया गया है। सभी आरोपियों पर आईपीसी की धाराओं के तहत जबरन वसूली, सबूत मिटाने और आपराधिक साजिश समेत अन्य आरोप लगाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा परमबीर सिंह को गिरफ्तारी से मिली अंतरिम राहत खत्म होने के दो दिन पहले चार्जशीट आई थी। उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास के पास विस्फोटकों के साथ एक एसयूवी लगाने और बाद में व्यवसायी मनसुख हिरन की हत्या में उनकी कथित भूमिका के लिए एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद पूर्व सहायक निरीक्षक सचिन वाजे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं।